राहत इंदौरी

राहत इंदौरी का नाम भारतीय कविताओं और शायरियो के महान कवियों में गिना जाता है।  उनकी कविताओं का प्रभाव सिर्फ उनके समय में ही सीमित नहीं है, आपने , "बुलाती है मगर जाने का नहीं" यह शायरी तो सुना ही होगा ये गाना लॉकडाउन के टाइम सोशल मीडिया जैसे टीक टोक ,इंस्ट्राग्राम, फेसबुक  पर काफी वायरल हुआ था इस गाने के बोल लिखने वाले महान कवि राहत इंदौरी को  बच्चो से लेकर बूढ़े तक सब जानते  हैं।

Jun 10, 2024 - 17:44
Jun 15, 2024 - 18:42
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राहत इंदौरी
Rahat Indori

राहत इंदौरी का नाम भारतीय कविताओं और शायरियो के महान कवियों में गिना जाता है।  उनकी कविताओं का प्रभाव सिर्फ उनके समय में ही सीमित नहीं है, आपने , "बुलाती है मगर जाने का नहीं" यह शायरी तो सुना ही होगा ये गाना लॉकडाउन के टाइम सोशल मीडिया जैसे टीक टोक ,इंस्ट्राग्राम, फेसबुक  पर काफी वायरल हुआ था इस गाने के बोल लिखने वाले महान कवि राहत इंदौरी को  बच्चो से लेकर बूढ़े तक सब जानते  हैं। उनकी कविताओं ने न केवल बॉलीवुड में, बल्कि साहित्यिक जगत में भी विशेषरूप से  पहचान बनाई है। उनकी शायरी का जादू लोगों के दिलों में बसता है और उनकी बातों में जीवन की सच्चाई छुपी मिलती है। उनकी विशेषता थी कि वे अपनी कविताओं में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को  उठाते थे, जिससे उन्हें लोकप्रियता मिली और उनके शब्दों की ताक़त ने लोगों को प्रेरित किया। आज हम इस लेख में राहत इंदौरी के जीवन के बारे में और गहराई से जानेंगे।

राहत इंदौरी का प्रारंभिक जीवन 
राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरेशी (पिता) और मकबूल उन निसा बेगम (माता) के घर हुआ था। उनके पिता एक कपड़े के  मिल मजदूर थे और उनकी माता एक गृहिणी थीं। राहत इंदौरी जी का बचपन का नाम कामिल जो की बाद में बदल कर  राहत   उल्लाह (Rahat ullah ) रख दिया गया ।उनका पूरा नाम राहत कुरेशी था । वह अपने माता पिता के चौथे संतान थे । उनके पिता एवं माता सोनकच्छ से इंदौर आ कर बस गए थे । उनके माता पिता ने सोचा भी नही था की उनका बेटा एक दिन जगत में इतना बड़ा नाम कर जाए गा ।

जब उनके पिता सोनकच्छ से इंदौर आए तब उन्होंने अपना जीवन यापन करने के लिए ऑटो और कई कपड़ो के मिल में काम किया  , यह उस समय की बात है जब विश्व भर में आर्थिक मंदी चल रही थी । 1939 से 1945 से लेकर विश्व युद्ध के चलते दुनिया भर की हालत खराब थी , उन दिनों भारत  यूरोप से जादा तर निर्यात करता था । विश्व युद्ध के चलते यूरोप के भी हालात खराब थे जिस कारण कई कपड़ो की मिले थप पर गई थी जिसका असर इंदौर में भी था वह भी कपड़े के मिल बंद पर गए थे । इस के चलते राहत इंदौर जी के पिता की भी नौकरी चली गई थी । इस कारण। राहत इंदौरी का बचपन गरीबी में गुजरा ।

राहत इंदौरी की शिक्षा
राहत इंदौरी ने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल से पूरी की। साल 1973 में उन्होंने इंदौर के इस्लामिया करीमिया कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। वर्ष 1975 में उन्होंने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में पोस्टग्रेजुएशन( M A ) किया। 

वर्ष 1985 में, इंदौरी ने  उनकी थीसिस 'उर्दू मैं मुशायरा' के लिए भोज विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश से उर्दू साहित्य में पीएचडी से  किया ।  और डाक्टर राहत इंदौरी की उपाधि प्राप्त की ।

राहत इंदौरी साहब ने देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक के रूप में भी कार्य किया । उन्होंने  चित्रकारी में भी काफी नाम कमाया  था ।

राहत इंदौरी भाई बहन 
राहत इंदौरी पांच भाई बहन थे वह चौथे नंबर की संतान थे और राहत इंदौरी साहब की दो बड़ी बहनें थीं जिनके नाम तकरीब  और तहजीब था, उनके एक बड़े भाई अकील और उसके बाद फिर एक छोटे भाई आदिल थे। 

राहत इंदौरी जी  के भाई-बहनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

इंदौरी साहब के परिवार की आर्थिक स्तिथि कुछ ठीक नहीं होने के कारण उन्हें शुरुआती दिनों में।मुस्किलो का सामना करना पड़ा था , राहत इंदौरी साहब ने केवल 10 की छोटी सी उम्र में एक साइन पेंटर के रूप के काम किया । पेंटिंग  उनकी रुचि  में से एक थी और जल्दी ही  राहत इंदौरी साहब ने  इस क्षेत्र में नाम कमाया । एक ऐसा समय भी आया जब राहत साहब द्वारा पैंट की हुई बोर्ड लोग लगा ने के लिए काफी समय तक इंतजार करते थे .

राहत इंदौरी साहब पर लिखी हुई किताब डॉ. दीपक रुहानी  'मुझे सुनाते रहे लोग वाकया मेरा' में एक किस्से का जिक्र है किया गया है जहा राहत साहब राहत साहब इंदौर के नूतन हायर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ा करते थे , जब वह नौंवी क्लास में थे तब राहत साहब के  स्कूल में एक मुशायरा होने वाला था। राहत इंदौरी साहब को यह काम दिया गया था की उन्हें शायरों का स्वागत करना था । जब वाहा जांनिसार अख्तर आए तो राहत इंदौरी साहब तुरंत उनसे ऑटोग्राफ लेने पहुंचे और जानिसार अख्तर जी से कहा कि मैं भी शेर पढ़ना चाहता हूं , मुझे इसके लिए क्या करना होगा। इस बात  पर जांनिसार अख्तर साहब  ने राहत इंदौरी जी से कहा - पहले कम से कम पांच हजार शेर याद करलो.. उस वक्त राहत इंदौरी साहब बोले- इतने तो मुझे अभी भी  याद हैं। तब जांनिसार साहब ने कहा- तो फिर अगला शेर जो होगा वो तुम्हारा होगा..।
फिर बाद में  जांनिसार अख्तर ऑटोग्राफ देते हुए अपने शेर का पहला मिसरा लिखा- 'हमसे भागा न करो दूर गज़ालों की तरह', तब राहत इंदौरी  साहब  ने दूसरा मिसरा कहा- 'हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह..'।

•  शादी और बच्चे ।
राहत इंदौरी ने 27 मई 1986 को सीमा राहत से शादी की। दोनो की एक बेटी शिबिल और दो बेटे- फैसल राहत और सतलज राहत थे। इसके बाद उन्होंने साल 1988 में उर्दू और हिंदी भाषा की कवयित्री अंजुम रहबर से शादी की और 1993 में दोनों अलग हो गए । 
सतलज अपने पिता की तरह ही शेर-ओ-शायरी का शौक रखते हैं। वह पेशे से एक पत्रकार हैं

राहत इंदौरी करियर 
राहत इंदौरी साहब कवि और गीतकार बनने से पहले,  16 वर्षों तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य पढ़ाया। वह एक चित्रकार भी थे और उन्होंने कई बॉलीवुड पोस्टर और बैनर चित्रित किए। 

पिछले 40-45 सालों से राहत इंदौरी मुशायरों और कवि सम्मेलनों में सक्रिय रूप से प्रस्तुति दे रहे थे। राहत इंदौरी न केवल भारत में एक प्रसिद्ध शायर थे बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मान्यता प्राप्त उर्दू शायर थे। उन्होंने यूएसए, यूके, यूएई, कनाडा, सिंगापुर, मॉरीशस, केएसए, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि में कई प्रदर्शन दिए हैं। 

राहत इंदौर की मौत
राहत इंदौरी ने 70 साल की उम्र में दो कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित होने के बाद 11 अगस्त, 2020 को इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अपनी मृत्यु से एक दिन पहले उनका COVID-19 टेस्ट पॉजिटिव आया था।

राहत इंदौरी के हॉबीज 
पेंटिंग करना और यात्रा करना उनके शौक थे।  
उन्हें हॉकी और फुटबॉल खेल देखना भी पसंद था.

•  राहत इंदौरी के बारे में रोचक तथ्य 
राहत इंदौरी को छोटी उम्र से ही साहित्य पढ़ने और कविताएं पढ़ने का शौक था वो अपने स्कूल के समय अपने स्कूल के हॉकी  और फुटबॉल के कैप्टन थे ।

राहत साहब ने  अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन वर्ष 1972 में दिया था  जब वह 19 वर्ष के थे।  

उन्होंने  उर्दू साहित्य में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया और स्वर्ण पदक जीता। बाद में उन्होंने उर्दू  साहित्य में पी एच डी की । 16 वर्ष तक टीचर के रूप में पढ़ाया । 

1993 में आई फिल्म 'सर' के लिए लिखा पहला गाना।

राहत इंदौरी की मीडिया अपीयरेंस
राहत इंदौरी को द कपिल शर्मा शो में दो बार गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था. सबसे पहले, 1 जुलाई 2017 को सीजन 1 का एपिसोड कुमार विश्वास और शबीना जी के साथ; और दूसरी बार 21 जुलाई 2019 को अशोक चक्रधर के साथ !

सब टीवी पर वाह! वाह! क्या बात है! शो में इंदौरी को  बुलाया गया था!  .

उनकी लिखी हुए शायरी बुलाती है मगर जाने का नही । बहुत जड़ा वायरल हुई थी  वह ट्रेंडिंग हो गई थी फेसबुक और इंस्टाग्राम ,टीक टीक पर 2020 वेलेंटाइन के समय, लोग यह लाइन बुलाती है मगर जाने का नही इसे कई मिम और विडियोज बना ने लग गए थे । meme.एक और लोकप्रिय दोहा, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

2016 में राहत इंदौरी की किताब 'मेरे बाद' दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में रिलीज हुई थी। यह किताब उनकी ग़ज़लों और शायरी का संकलन है।

1 जनवरी 2021 को, उनके 71वें जन्मदिन पर, सॉन्गड्यू  ने डॉ. राहत इंदौरी - एक अलग पहचान नामक एक अनूठी श्रद्धांजलि का अनावरण किया। इस अनूठी श्रद्धांजलि के हिस्से के रूप में भारत के 9 प्रसिद्ध कलाकार भारतीय संगीतकारों ने डॉ इंदौरी द्वारा लिखी गई 9 प्रसिद्ध ग़ज़लों की रचना करने और उनके लेखन से प्रेरित पेंटिंग बनाने के लिए एक साथ आए।

राहत इंदौरी की किताबें

राहत इंदौरी की कुछ सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबें हैं दो कदम और सही, नाराज़, मालूम, मुसाफिर, धूप बहुत है, मौजूद, रुत, चराग और चांद पागल है।

1- रट
2- कादर या साही करो
3- मेरे बाद
4- धूप बहुत है
5- चांद पागल है
6- मौज़ूद
7- नाराज़

राहत इंदौरी द्वार लिखे गए बॉलीवुड गाने

1- फिल्म मैं तेरा आशिक के लिए मेरे ख्याल. 
2- फिल्म आशियां के लिए टूटा हुआ दिल तेरे हवाले. 
3- फिल्म आशियां के लिए जिंदगी नाम को हमारी है. 
4- आज हमने दिल का हर किस्सा फिल्म सर के लिए। 
5- फिल्म जानम के लिए दिल जिगर के जान अच्छा है.
6- फिल्म खुद्दार के लिए तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम. 
7- फिल्म खुद्दार के लिए खत लिखना हमें खत लिखना. 
8- फिल्म खुद्दार के लिए तुम मानो या ना मानो. 
9- फिल्म खुद्दार के लिए रात क्या मांगे एक सितारा. 
10- फिल्म मर्डर के लिए दिल को हज़ार बार रोका। 
11- फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए एम बोले। 
12- फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए चैन चैन। 
13- फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए 'देखले  आंखो मे आखें डाल देख ले मरना है एक बार मरने से पहले ...
14- फिल्म मिशन कश्मीर के लिए धुआं धुआं. 
15- फिल्म मीनाक्षी के लिए ये रिश्ता क्या कहलाता है। 
16- फिल्म करीब के लिए चोरी चोरी जब नजरें मिलीं। 
17- फिल्म इश्क के लिए देखो देखो जानम हम। 
18- फिल्म इश्क के लिए नींद चुरायी मेरी। 
19- फिल्म बेगम जान के लिए मुर्शिदा. 
20- फिल्म घातक के लिए कोई जाए तो ले ऐ। 

राहत इंदौरी की शायरी 

1- बुलाती है मगर जाने का नई,
वो दुनिया है उधर जाने का नई। 

2- माई मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, 
लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना। 

3- आंख में पानी रखो, होठों पर चिंगारी रखो,
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो। 

4- किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है?
आप तो अंदर हैं, बाहर कौन है?

5- ये हादसा तो कोई दिन गुजारने वाला था, 
मैं बच भी जाता तो एक रोज़ मरने वाला था। 

6- सभी का खून शामिल है इस मिट्टी में, 
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोरी है। 

• राहत इंदौरी लव शायरी इन हिंदी 

तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के 
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के 

आते जाते हैं कई रंग मिरे चेहरे पर 
लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के 

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे 
वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के 

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने 
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के 

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भँवर है जिस की 
तुम ने अच्छा ही किया मुझ से किनारा कर के 

मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे 
चाँद को छत पुर बुला लूँगा इशारा कर के 

दिलों में आग, लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चहेरों पर, दोहरी नकाब रखते हैं"

रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के 
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के 

आते जाते हैं कई रंग मिरे चेहरे पर 
लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के 

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे 
वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के 

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने 
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के 

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भँवर है जिस की 
तुम ने अच्छा ही किया मुझ से किनारा कर के 

मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे 
चाँद को छत पुर बुला लूँगा इशारा कर के 

राहत इंदौरी गजल

सूरज, सितारे चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे

साँसों की तरह साथ रहे सारी ज़िंदगी
तुम ख़्वाब से गए तो ख़्यालात में रहे

हर बूँद तीर बन के उतरती है रूह में
तन्हा मेरा तरह कोई बरसात में रहे

हर रंग हर मिज़ाज में पाया है आपको
मौसम तमाम आपकी ख़िदमत में रहे

शाखों से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे के औक़ात में रहे

दिल बुरी तरह से धड़कता रहा
वो बराबर मुझे ही तकता रहा

रोशनी सारी रात कम ना हुई
तारा पलकों पे इक चमकता रहा

छू गया जब कभी ख़याल तेरा
दिल मेरा देर तक धड़कता रहा

कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया घर में
और घर देर तक महकता रहा

उसके दिल में तो कोई मैल न था
मैं ख़ुदा जाने क्यूँ झिझकता रहा

मीर को पढ़ते पढ़ते सोया था
रात भर नींद में सिसकता रहा 

दिए बुझे हैं मगर दूर तक उजाला है
ये आप आए हैं या दिन निकलने वाला है

ख़्याल में भी तेरा अक़्स देखने के बाद
जो शख़्स होश गंवा दे वो दोश वाला है

जवाब देने के अन्दाज़ भी निराले हैं
सलाम करने का अन्दाज़ भी निराला है

सुनहरी धूप है सदक़ा तेरे तबस्सुम का
ये चाँदनी तेरी परछाईं का उजाला है

है तेरे पैरों की आहट ज़मीन की गर्दिश
ये आसमां तेरी अंगड़ाई का हवाला है

क्या खरीदोगे ये बाज़ार बहुत महंगा है
प्यार की ज़िद न करो प्यार बहुत महंगा है

चाहने वालों की एक भीड़ लगी रहती है
आज कल आपका दीदार बहुत महंगा है

इश्क़ में वादा निभाना कोई आसान नहीं
करके पछताओगे इक़रार बहुत महंगा है

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे
दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है

प्यार का रिश्ता कितना गहरा लगता है
हर चेहरा अब तेरा चेहरा लगता है

तुमने हाथ रखा था मेरी आंखों पर
उस दिन से हर ख़्वाब सुनहरा लगता है

उस तक आसानी से पहुंचना मुश्किल है
चाँद के दर पे रात का पहरा लगता है

जब से तुम परदेस गए हो बस्ती में
चारों तरफ़ सहरा ही सेहरा लगता है

•  राहत इंदौर बेस्ट शायरी

- तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

- ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

- फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे
जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे
फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

- बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

- मैं बच भी जाता तो
किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है
ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था
मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था

- अंदर का ज़हर चूम लिया
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए
कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है
कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे

- मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए
रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते
मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए
और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूं हैं

- एक चिंगारी नज़र आई थी
नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से
ख़्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूं हैं
एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे
वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के
इन रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता है
नींदें कमरों में जागी हैं ख़्वाब छतों पर बिखरे हैं


राहत इंदौरी फैमस हिंदी गाने 
राहत इंदौरी ने लगभग दो दर्जनों फ़िल्मों में गीत लिख चुके है । उनके प्रसिद्ध हिन्दी फ़िल्म गीत कुछ इस प्रकार हैं-
- आज हमने दिल का हर क़िस्सा (फ़िल्म- सर)
- तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है (फ़िल्म- खुद्दार)
- खत लिखना हमें खत लिखना (फ़िल्म- खुद्दार)
- रात क्या मांगे एक सितारा (फ़िल्म- खुद्दार)
- दिल को हज़ार बार रोका (फ़िल्म- मर्डर)
- एम बोले तो मैं मास्टर (फ़िल्म- मुन्नाभाई एमबीबीएस)
- धुंआ धुंआ (फ़िल्म- मिशन कश्मीर)
- ये रिश्ता क्या कहलाता है (फ़िल्म- मीनाक्षी)
- चोरी-चोरी जब नज़रें मिलीं (फ़िल्म- करीब)
- देखो-देखो जानम हम दिल (फ़िल्म- इश्क़)
- नींद चुरायी मेरी (फ़िल्म- इश्क़)
- मुर्शिदा (फ़िल्म - बेगम जान)

राहत इंदौरी फैमस ग़ज़ल

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

राहत इंदौरी  को मिले पुरस्कार 
डॉ. राहत इंदौरी को दिए गए अनगिनत सम्मानों में से कुछ पुरस्कार इस प्रकार हैं:
- ह्यूस्टन सिटी काउंसिल, ह्यूस्टन यूएसए से सम्मान
- फारुख ए उर्दू अदाब पुरस्कार-कुवैत
-शायार ए महफिल पुरस्कार
-अंजुमन फारुख ए उर्दू अदाब, कुवैत
-मोहम्मद अली ताज पुरस्कार, एमपी उर्दू अकादमी, भोपाल-सम्मान
-राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर-सम्मान-मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल
-मौलाना मोहम्मद अली जौहर पुरस्कार-जामिया ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन, नई दिल्ली
-अदीब अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार
-साहिर सांस्कृतिक अकादमी, लुधियाना
-हक बनारसी पुरस्कार-अंजुमन नवा ए हक, बनारस-साहित्य सरस्वती, हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग
-इंदिरा गांधी पुरस्कार, नेशनल फेडरेशन, हल्द्वानी
-प्रदेश रत्न, हिंदी साहित्य परिषद, भोपाल
राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, भारतीय सांस्कृतिक सोसायटी, नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश हिंदी उर्दू साहित्य पुरस्कार, सरकार। उत्तर प्रदेश का, लखनऊ
राजीव गांधी साहित्य पुरस्कार, हम सब एक हैं, भोपाल
उर्दू कविता, सामाजिक शिक्षा और कल्याण संघ में उत्कृष्टता पुरस्कार (SEWA), मुंबई-सदभावना पुरस्कार, बजम ए गंगो जामन, उज्जैन
आफाक हैदर पुरस्कार, शमीम मेमन मेमोरियल फाउंडेशन, वारनाई
फानी ओ शकील पुरस्कार, डॉ. उर्मिलाश जन चेतना समिति, बदायूं
ईश्वर वहीदी पुरस्कार, नेशनल बुक फेयर ट्रस्ट, कानपुर
नेताजी सुभाष अलंकारन, सुभाष मंच, इंदौर
डॉ. जाकिर हुसैन पुरस्कार, नई दिल्ली
निशान ए एजाज, डॉ. शकील वेलफेयर एजुकेशनल सोसाइटी, बरेली
कैफ़ी आज़मी पुरस्कार, भारतीय राष्ट्रीय एकता परिषद, वाराणसी-उर्दू पुरस्कार, झांसी
इशरत पुरस्कार, वाराणसी-कबीर सम्मान
वादीज हिंदी शिक्षा समिति, जम्मू-कश्मीर
जगजीत सिंह पुरस्कार, निर्मला देवी फाउंडेशन
इंदौर रत्न-दैनिक दबंग दुनिया, इंदौर
राष्ट्रीय एकता वा मान्यता सम्मान, यंग इंडियन सोशल सोसाइटी, अमरावती
कमल मद्रासी मेमोरियल अवार्ड
पंजाब एसोसिएशन और कमल उर्दू अकादमी, चेन्नई
मिर्जा गालिब पुरस्कार, झांसी.

• राहत इंदौरी मोटिवेशनल ( Motivational.) शायरी 

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है, ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में, यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन, हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है, हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे, किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

"शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे"

"हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते"

" आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो"

"हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं"

 सोचने दे जमाने को जो सोचना है, अगर तेरा दिल सच्चा है तो नाज़ कर खुद पर.

राहत इंदौरी sad शायरी 

- दुनिया मे वही शख्स उदास  रहता है जो खुद से ज्यादा दूसरों की परवाह करता है..!

- ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था 8 मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने
वाला था..!

- कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं, और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता..

- न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा, हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

•. राहत इंदौरी राजनीति ( political )शायरी

- बनके एक हादसा बाजार में आ जाएगा
जो नहीं होगा वह अखबार में आ जाएगा
चोर उचक्के की करो कद्र कि मालूम नहीं
कौन कब कौन सी सरकार में आ जाएगा।

- हर सुबह है वही मातम दर ओ दीवार के साथ कितनी लाशें मेरे घर आएंगे अखबार के साथ
आज वो चुप हैं जो पहले बहुत बोलते थे
लोग समझौता किए बैठे हैं सरकार के साथ!

- जो चक्की चल रही है उसके दोनों पाठ उल्टे हैं
जो बेईमान है वो बेईमान कहते हैं

जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते हैं खामोशी
और जो आंखों में दिखाई दे
उसे तूफान कहते हैं,
मेरे अंदर से एक एक कर के सब कुछ हो गया रुखसत
मगर एक चीज बाकी है जिसे ईमान कहते हैं।

- लाल पीले कई रंगों के अलम आएंगे और आखिर में यही होगा कि हम आएंगे,
इस बरस हमने जमीनों में धुआं बोया है फल नहीं आएंगे अब शाखों पर बम आएंगे।

- कल तक दर दर फिरने वाले, घर के अंदर बैठे हैं और बेचारे घर के मालिक, दरवाजे पर बैठे हैं,
खुल जा सिम सिम, याद है किसको, कौन कहे और कौन सुने? गूंगे बाहर सीख रहे हैं, बहरे अंदर बैठे हैं।


- सारी कदरें ही सियासत में बदल डाली हैं
हाथ अब कोई मिलाता है तो डर लगता है 
पहले कांटों को भी आंखों से लगा लेता था
खुद फूल भी लाता है तो डर लगता है


- जो दौर है दुनिया का उसी दौर से बोलो
बहरों का इलाका है ज़रा ज़ोर से बोलो
दिल्ली से हमीं बोला करें अम्न की बोली
यारों कभी तुम लोग भी लाहौर से बोलो

- आप ही दूल्हा आप बाराती जिंदाबाद
जितने साथी सब खैराती जिंदाबाद
दिन दो दिन और, यह पागल फौजें हैं
पोरस के ये पीले हाथी जिंदाबाद

- अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
बस्तियां छोड़ के जाने को कहा जाता है
पत्तियां रोज गिरा जाती हैं जहरीली हवा
और हमें पेड़ लगाने को कहा जाता है

- मेरे घर तक जो मेरी तक में आ जाते हैं
चंद कीड़े मेरी मिस्वाक में आ जाते हैं
इन दहाडों में कोई दम नहीं, डर मत जाना
भेड़िए शेर की पोशाक में आ जाते हैं

- जो वाक्य है उसे वाकई में रहना है
यह बांकपन तो मेरी शायरी में रहना है
तुझे गुरूर के तेरी यहां हुकूमत है
मुझे भी जिद है कि इसी मुंबई में रहना है

- दिल जो तेरा आईना है, तोड़ डाला जाएगा
आज इस मस्जिद से एक काफिर निकाला जाएगा
ये पता कर लीजिए दुश्मन का दुश्मन कौन है अब इसी कांटे से ये कांटा निकाला जाएगा

- शहरों में तो बारुदों का मौसम है
गांव चलो अमरूदों का मौसम है
सूख चुके हैं सारे फूल फरिश्तों के
बागों में नमरूदों का मौसम है

- जहां से गुजरो धुआं बिछा दो,
जहां भी पहुंचो धमाल कर दो,
तुम्हें सियासत ने हक दिया है,
हरी जमीनों को लाल कर दो
मोहब्बतों का हूं मैं सवाली, मुझे भी एक दिन निहाल कर दो,
नज़र मिलाओ, नज़र मिला कर फकीर को मालामाल कर दो
अपील भी तुम, दलील भी तुम, गवाह भी तुम, वकील भी तुम,
जिसे भी चाहो हराम लिख दो, जिसे भी चाहो हलाल कर दो
है सादगी में अगर यह आलम, के जैसे बिजली चमक रही है
जो बन संवर के सड़क पे निकलो, तो शहर भर में धमाल कर दो
तुम ही सनम हो, तुम ही खुदा हो, वफा भी तुम हो तुम, तुम ही जफा हो,
सितम करो तो मिसाल कर दो करम करो तो कमाल कर दो
तुम्हें किसी की कहां है परवाह, तुम्हारे वादे का क्या भरोसा,
जो पल की कह दो तो कल बना दो, जो कल की कह दो तो साल कर दो
अभी लगेगी नई नई सी, यह इश्क फजा है जो सुरमई सी,
जो जुल्फ चेहरे से तुम हटा लो, तो सारा मंज़र गुलाल कर दो...

राहत इंदौरी दोस्ती की  शायरी  

दोस्ती जब किसी से की जाए 
दुश्मनों की भी राय ली जाए 
मौत का ज़हर है फ़ज़ाओं में 
अब कहाँ जा के साँस ली जाए 
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ 
ये नदी कैसे पार की जाए 
अगले वक़्तों के ज़ख़्म भरने लगे 
आज फिर कोई भूल की जाए 
लफ़्ज़ धरती पे सर पटकते हैं 
गुम्बदों में सदा न दी जाए 
कह दो इस अहद के बुज़ुर्गों से 
ज़िंदगी की दुआ न दी जाए 
बोतलें खोल के तो पी बरसों 
आज दिल खोल कर ही पी जाए 

प्रिया झा

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