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  • प्रजातंत्र
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    झुलस रहा सत्य देश में

    झुलस रहा सत्य देश में घुट रही साँसें प्रजातंत्र की चढ़ती ग्लुकोज मँहगाई की खा रहा सुई भूख मिटने की आखिर! मैं जिंदा जो हूँ। रोजगार की लात की ठोकर मार रहे प्रजातंत्र के सीने पर आँसू बहते टूटी पीठ […] More

  • हमारी अपनी संस्कृति का भारत
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    हमारी अपनी संस्कृति का भारत

    हमारी अपनी संस्कृति का भारत तीज त्यौहारों का भारत, ख़ुशियों से सरोबर भारत, दिवानी मस्तानी में झूमता भारत, खेत खलिहानों में बसता भारत, देश के प्रति समर्पित सेना का भारत, प्रेम प्यार नेह का भारत, धरा से आसमान को निहारता भारत, नई पौध के बचपन का भारत, शिखरता की मंज़िलों को चूमता भारत, तम से उजास की और बढ़ता भारत, विश्व में विजयी पताका लहराता भारत, देश रक्षा में अटल भारत, माटी की ख़ुशबू से नहाता भारत, कल कल करती नदीयों का भारत उद्योग विकास की दुनिया बसाता भारत मज़दूरों की मेहनत के खून पसीने का भारत, माताओं बहनो के समर्पण का भारत, सभी धर्मों का प्रेम बरसाता भारत, ये है नमस्ते और गुरु ज्ञान का भारत, माँ भारती के जन जन का भारत, देश के लिए मर मिटे वीर सपूतों का भारत, मेरा भारत आपका भारत हम सबका भारत। …देवेंद्र बंसल इंदौर More

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    बेड़ियाँ

    क्या यह वही बेड़ियाँ हैं, जो किसी मुजरिम को बाँध कर रखती है ? क्या यह वही बेड़ियाँ हैं,जो किसी गुनहगार को कैदखाने में कैद कर के रखती है ? नहीं….. नहीं….. यह वे बेड़ियाँ नहीं —-यह तो वे बेड़ियाँ […] More

  • स्वाधीनता दिवस
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    हुंकार

    स्वाधीनता दिवस पर देश के नाम “युवा शक्ति की हुंकार” युवा शक्ति तुम आगे आओ, आगे बढ़कर देश बचाओ। क्या लड़की, क्या हो लड़के, देश बचाओ आगे बढ़के। क्या नर और क्या है नारी, हिला के रख दो दुनिया सारी। […] More

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    कुछ पल की बातें।

    कुछ पल की बातें।। माँ से, कुछ पल की बातें किये, मानो एक अरसा हुआ।। माँ ने तुमको जीतना समझा है, शायद तुम माँ को उसका अंश भी न समझ पाओ। मातृत्व तो जीते, अब बाल पक गए है, तुम […] More

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    भूमिगत सेंसर

    कोई पार न कर ले मन की सरहद लगवाई है कुछ कंटीली झाड़ नवीनतम तरंग भेदी डिवाइस कुछ भूमिगत सेंसर फाइबर ऑप्टिक सेंसर अँधेरे और मरती रौशनियों में सोये ख्वाब में आंखें गड़ाये एक पुरानी सूरत ऊंघ रही थी अंधियारे […] More