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आशियां बादलों पर बनाते हैं

आशियां बादलों पर बनाते हैं
आशियां बादलों पर बनाते हैं

खुशनुमा गीत हम गुनगुनाते हैं।

 आशियां बादलों पर बनाते हैं।।

 

 रूह को सुकूंन कभी मिलता नहीं,

 जब भी दर्दे- गम को छुपाते हैं ।

 

चोट हल्की लगी जख्म गहरा हुआ,

 क्या हुआ था हमसफर सब बताते हैं ।

 

 होठ हंसते हैं दिल यह रोता मगर,

 ऐ खुदाया ! क्यों इतना सताते हैं ?

 

 जब उमड़े हैं बादल तो बरसेंगे ही,

 थाम कर हाथ है आओ छुप जाते हैं ।

 

मस्त मौसम बड़ा हवाएं बहकी हुई 

डोर बन जा पतंग हम उड़ाते हैं ।

 

रूठ कर हमसे अब ना जाना कभी,

 गले लग कर एक दूजे को मनाते हैं।

नमिता “प्रकाश”

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