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आख़िरी मुलाकात

आख़िरी मुलाकात
यकीनन जानता हूं मैं कि उस रोज क्या होगा?
लिए हाथों में पत्थर रूढ़ियों का काफ़िला होगा,
तरफदारी करेंगे जाम और शीशे ज़माने की,
अन्तिम भेंट वाली शाम खूनी सिलसिला होगा।
मैं जाऊंगा ज़माने से तुम जाओगी ज़माने में,
हमारे बीच अब धरती गगन का फासला होगा
मैं बरसूंगा गगन से वेदना की बूंद बन कर के,
तुम्हारे सामने मेरी आंसुओं का श्रृंखला होगा।
-आशुतोष शर्मा 

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