तेरी एक छुअन से
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तेरी एक छुअन से

फिर जाग उठा अहसास तेरी एक छुअन से
जैसे बदली छट गई नभ में छाई चिलमन से

उभरी मदहोशी तेरे नाजुक होंठों को छूने से
खुशबू तेरी फिर महक ने लगी मेरे बदन से

आंखों में यूं उभरता तेरी हर यादों का दरिया
खुलने लगे दबे राज मेरे चेहरे की शिकन से

अब क्यों मिलना हमारा तुम्हारा इत्तफाकन
सबब कुछ हो मिलो कभी तुम हमें सुकून से

-हनीफ़ सिंधी

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Written by Sahitynama

साहित्यनामा मुंबई से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका है। जिसके साथ देश विदेश से नवोदित एवं स्थापित साहित्यकार जुड़े हैं।

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दिल

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एहसास-ए-मोहब्बत

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