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Category: कविता

मैं ईश्वर से प्यार माँगता हूँ

मैं ईश्वर से प्यार माँगता हूँ, तो वो मुझे तू दे,देते है, एक ऐसा प्यार, जिसमें तुझे छूना जरूरी नहीं, एक ऐसा प्यार, जिसमें साथ रहना जरूरी नहीं, मैं ईश्वर से प्यार… तो वो मुझे तू दे,देते है। एक ऐसा प्यार, जिसमें चीढ़ है खोने का, एक ऐसा प्यार, जिसमें खीज़ है,एक न होने की More

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चौपई छंद “चूहा बिल्ली”

चौपई छंद( बाल कविता)   म्याऊँ म्याऊँ के दे बोल। आँखें करके गोल मटोल।। बिल्ली रानी है बेहाल। चूहे की बन काल कराल।।   घुमा घुमा कर अपनी पूँछ। ऊपर नीचे करके मूँछ।। पंजों से दे दे कर थाप। मूषक लेना चाहे चाप।।   छोड़ सभी बाकी के काज। चूँ चूँ की दे कर आवाज।। More

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पवन छंद श्याम शरण

पवन छंद   श्याम सलोने, हृदय बसत है। दर्श बिना ये, मन तरसत है।। भक्ति नाथ दें, कमल चरण की। शक्ति मुझे दें, अभय शरण की।।   पातक मैं तो, जनम जनम का। मैं नहिं जानूँ, मरम धरम का।। मैं अब आया, विकल हृदय ले। श्याम बिहारी, हर भव भय ले।।   मोहन घूमे, जिन More

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तोटक छंद “विरह”

तोटक छंद सब ओर छटा मनभावन है। अति मौसम आज सुहावन है।। चहुँ ओर नये सब रंग सजे। दृग देख उन्हें सकुचाय लजे।।   सखि आज पिया मन माँहि बसे। सब आतुर होयहु अंग लसे।। कछु सोच उपाय करो सखिया। पिय से किस भी विध हो बतिया।।   मन मोर बड़ा अकुलाय रहा। विरहा अब More

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माँ गंगा

माँ गंगा का अवतरण

शीर्षक (माँ गंगा का अवतरण) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) गंगोत्री मेरा जन्म हुआ। देवप्रयाग में मैं आयी। देवप्रयाग से होते हुवे ऋषिकेश हो आयी। हरिद्वार को पावन किया। कानपुर में जगह बनाई। प्रयागराज की धरती पर मैं अपनी बहनों से मिल पाई। तब जा के कही मैं संगम कहलायी। काशी की धरती पर हुई मेरी बड़ी बड़ाई । पटना की धरती पर मैंने अपनी अदभुत छठा फैलाई। कोलकाता की धरती पर  मैं गंगासागर में हूँ  समाई। More

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जिसने देश का मान बढ़ाया !!

जिसने देश का मान बढ़ाया, जीता मेडल नाम कमाया, सुन ली गर्जन वीर शेरनी की । क्रोधित शेरनी ने ललकारा !! है हिम्मत तो निकलो आगे । देशहित में हाथ बढ़ाओ ।। ना हम किसी से डरने वाले । ना हम डर के बैठने वाले ।। क्या ग़लत कहा था मैंने । ग़लत को गलत More

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

गीतिका छंद “चातक पक्षी”

मास सावन की छटा सारी दिशा में छा गयी। मेघ छाये हैं गगन में यह धरा हर्षित भयी।। देख मेघों को सभी चातक विहग उल्लास में। बूँद पाने स्वाति की पक्षी हृदय हैं आस में।।   पूर्ण दिन किल्लोल करता संग जोड़े के रहे। भोर की करता प्रतीक्षा रात भर बिछुड़न सहे।। ‘पी कहाँ’ है More

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रुचि छंद “कालिका स्तवन”

माँ कालिका, लपलप जीभ को लपा। दुर्दान्तिका, रिपु-दल की तु रक्तपा।। माहेश्वरी, खड़ग धरे हुँकारती। कापालिका, नर-मुँड माल धारती।।   तू मुक्त की, यह महि चंड मुंड से। विच्छेद के, असुरन माथ रुंड से।। गूँजाय दी, फिर नभ अट्टहास से। थर्रा गये, तब त्रयलोक त्रास से।।   तू हस्त में, रुधिर कपाल राखती। आह्लादिका,असुर-लहू चाखती।। More

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काश तुम ना कहते तो अच्छा …

काश तुम ना कहते तो अच्छा होता  हम जज्बातों  में ना बहते तो अच्छा होता !   काश ये दिल तुझ पे आया ही ना होता  काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा  होता !!                                          More

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विरह

नील छंद "विरहणी"

नील छंद / अश्वगति छंद   वे मन-भावन प्रीत लगा कर छोड़ चले। खावन दौड़त रात भयानक आग जले।। पावन सावन बीत गया अब हाय सखी। आवन की धुन में उन के मन धीर रखी।।   वर्षण स्वाति लखै जिमि चातक धीर धरे। त्यों मन व्याकुल साजन आ कब पीर हरे।। आकुल भू कब अंबर More

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तिलका छंद “युद्ध”

गज अश्व सजे। रण-भेरि बजे।। रथ गर्ज हिले। सब वीर खिले।।   ध्वज को फहरा। रथ रौंद धरा।। बढ़ते जब ही। सिमटे सब ही।।   बरछे गरजे। सब ही लरजे।। जब बाण चले। धरणी दहले।।   नभ नाद छुवा। रण घोर हुवा। रज खूब उड़े। घन ज्यों उमड़े।।   तलवार चली। धरती बदली।। लहु धार More

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bhagavaan shiv

भगवान शिव

 मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) डम-डम डमरू बाजे भोले नाथ शिव शंकर नाचे। जटाओं में उनके गंगा विराजे। माथे पर उनके चन्द्रमा साझे। जो पिये है विष का प्याला भोले शंकर डमरू वाला। भभूत से जो है नहाये माथे पर तिलक लगाये। जो कालो में काल कहलाये भोले अपना नाम बताये। गले में जिनके साँपों की माला। हाथ में उनके डमरू बाजे भोला संग नंदी नाचे । नन्दी है जिनकी सवारी, हाथों में उनके है त्रिशूल भारी। कैलाश पे जिनका निवास है, माँ पार्वती उनके साथ है। काल भी जिनको देख कर थरराये, वो महाकाल कहलाये। दानव मानव सबके कर्ता भोले शंकर शम्भू सबके दुख है हर्ता । पसंद है जिनको बेल का पत्ता। दुनियाँ के है वो कर्ता धर्ता। वो है सारे जग के स्वामी वो अन्तर्यामी। आदि भी वो है अन्त भी वो है इन सब मेँ अनंत भी वो है। More

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