बन जा महावीर सा
बन जा महावीर सा
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बन जा महावीर सा

खुद पर विजय तू प्राप्त कर,

और बन जा शूरवीर सा,

चुन सत्य की राहें सदा,

बन के दिखा महावीर सा I

खुद जी सके,जीने भी दे,

बन शांति का प्रतीक सा I

बस कर्म कर,करता ही चल

बन ऐसा कर्मवीर सा I

मन में दया का भाव हो

बन कर्ण दानवीर सा I

वाणी में संयम रख सदा,

बन शील और गंभीर सा I

है स्वयं में सर्वग तू,

हो ना कभी अधीर सा I

निज स्वार्थ का अब त्याग कर,

बन धर्म की तस्वीर सा I

राग और द्वेष से परे,

सुख दुःख में सम रहे सदा,

कर ध्यान महावीर का

बन के दिखा महावीर सा I

तू बन जा महावीर सा,

तू बन जा महावीर सा I

: रुचि गोस्वामी

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Written by Sahitynama

साहित्यनामा मुंबई से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका है। जिसके साथ देश विदेश से नवोदित एवं स्थापित साहित्यकार जुड़े हैं।

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