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मन पंछी

नभ में एक मन पंछी देखा

पंख फड़फड़ा रहा था

विपरीत थी हवाएं फिर भी

उड़ता ही जा रहा था

मुश्किल भरी डगर थी

उसने हार नहीं थी मानी

जाना भी उस दिशा में था

जहां जाने की थी ठानी

जीवन में मुश्किलों के

तूफां बहुत थे आए

दुख से भरे थे बादल

विकराल बन के छाए

बिजली जो कोंधती थी

ख्वाबों को रोंधती थी

दुश्मन थी आंधियां भी

उड़ने से रोकती थी

पर हौसला था मन में

 तूफां से लड़ गया वो

पंखों पर कर भरोसा

सफर ये पार कर गया वो

खुद पर अगर यकीन हो

तो क्या कुछ नहीं है मुमकिन

तेरी हिम्मतों के आगे

छोटी सी है सब मुश्किल ।

रूचि गोस्वामी

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Written by Ruchi-Goswami

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