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Sahityanama Mar 29, 2024 0 30
दादी सुकून घर की शान रही दुर्भाव नहीं।।
Sahityanama Mar 21, 2024 0 26
संग सांसों का अनमोल खजाना लुट जाए कब यह कोई न जाना
Sahityanama Mar 21, 2024 0 32
लेती है रूप मां सरस्वती का ज्ञान के अमिट प्रकाश के लिए। और होती है प्रकट मां...
Sahityanama Mar 19, 2024 0 31
मेरे भीतर, भीतर घना कोहरा था मगर वैसा नही, जैसा बाहर होता है,
Sahityanama Mar 19, 2024 0 15
दीवारों से गले लग कर कर लेती हूँ मन हल्का ।
Sahityanama Mar 19, 2024 0 27
नौ माह तक बच्चों को गर्भ में रखती है न जाने कितने दुखों को सहती है, झेलती है फ...
Sahityanama Mar 19, 2024 0 21
घर मे सुकून रहता था, ख़ुद मे जुनून रहता था।
Sahityanama Mar 19, 2024 0 22
डोर किसी के हाथ सधी, हम बने हुए कठपुतली। नाच रहे ज्यों हम ख़ुद हों,
Sahityanama Mar 19, 2024 0 16
टँगे रहा करते थे जिन पर दिन अपने बहुरंगे। लुप्त हो गए शनैः शनैः
Sahityanama Mar 19, 2024 0 17
अक्सर घिरा समस्याओं से, किन्तु किसी को नहीं जताया।
SACHIN KUMAR SONKER Mar 15, 2024 0 35
शीर्षक (मानवता) (सचिन कुमार सोनकर)
Sahityanama Mar 15, 2024 0 20
खो जाना चाहती हूं मैं किसी किताब के पन्नों के बीच
Sahityanama Mar 15, 2024 0 17
तेरी इस अलौकिक छवि के पीछे छुपे हैं सैंकड़ों त्याग जिन्हें चाहे अनचाहे तूने ब...
अपने जीवन काल में मैंने कभी ऐसा नहीं देखा है कि बारहों महीने में किसी दिन तु...
Sahityanama Mar 15, 2024 0 33
पिताजी की हठ पर अब माँ खीझ जाती हैं... काम करते-करते अब कई बार झीक जाती हैं...
Sahityanama Mar 15, 2024 0 15
ममता मीठी खांड सी। ममता है अंबार ।
Sahityanama Nov 15, 2023 0 3.9k
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