एहसास-ए-मोहब्बत
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एहसास-ए-मोहब्बत

आज अचानक नजरें रुक गई…
सांसे बढ़ गयी और धड़कने थम गई…
वो दो नखरीले नैन, वो होठों पे मुस्कान…
ऐसा लगा बरसों के अधूरे पूरे हुए अरमान…

कोई इरादा नहीं था गुफ्तगू-ए मोहब्बत का….
पर न जाने क्यों बदले मेरे जज्बात….
तुझे वो बिन पलके झपकाए ताकना….
तेरी ही यादों में खुद को मशगूल रखना….

कुछ ऐसा असर हुआ तेरी उस मुलाकात का…
सारा हाल बदल गया मेरे दिल के जज्बात का…
कैसे बताऊं वो अंदाज-ए इश्क…
तुझे छुपकर ताकना, अपनी नजरों से दिल में झाँकना…

तेरे आने से सब बदल गया….
बदले जज्बात, दिल भी संभल गया….
रुकी हुई धड़कने चलने लगी है…
होंठों पे हँसी फिर से खिलने लगी है…

अब इंतज़ार है तेरे इकरार का…
कारवाँ शुरू हो उस प्यार का…
तू भी पलट के देखे मुझे…
जैसे तुझे भी इंतज़ार था उसी बात का।।

-डॉली शर्मा

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Written by Sahitynama

साहित्यनामा मुंबई से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका है। जिसके साथ देश विदेश से नवोदित एवं स्थापित साहित्यकार जुड़े हैं।

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