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आई आई टी बनाम आई टी आई

राजेश बाबू आज अपनी बेटी रीना के विवाह की बातचीत करने पूर्णिया जा रहे थे। रीना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और एम.फिल. करके अभी पी.एच.डी कर रही थी। राजेश बाबू चाहते थे उसके योग्य नौकरी और बराबर का पढ़ा लिखा समझदार लड़का हो। इस वर के लिए पता चला था कि इसने आईआईटी किया हुआ है।
राजेश बाबू ने सोचा, चलो अच्छा ही है आईआईटियन मिल रहा है, तो उसकी उच्च आय की नौकरी में बेटी सुखी रहेगी।  मानसिक स्तर पर भी दोनों बराबर होंगे। वर के पिता रामनरेश बाबू से उनकी फोन से बात हुई। रीना की शिक्षा दीक्षा की पूरी जानकारी देकर जब वर के सम्बन्ध में जानकारी लेना चाहा तो उन्होंने कहा –
‘अरे भाई आप परिचय और फोटो लेकर आ जाइये, यहीं एक साथ बैठेंगे और आराम से बातें करेंगे। फोन से क्या बात करेंगे’।
और राजेश बाबू चल पड़े वर के पिता से बातचीत करने। जाने के पहले उन्होंने रीना का बायोडाटा और एक अच्छी सी तस्वीर भी ले ली। पता पूछते हुए वे वर के घर पहुंचे तो वर के पिता राम नरेश बाबू ने इनका स्वागत किया।
स्वागत सत्कार और कुछ जलपान के बाद उनकी बातचीत प्रारंभ हुई। राम नरेश बाबू ने रीना के विषय में पहले पूरी जानकारी ली। उसके बाद पूछा –
‘बिटिया को सिर्फ पढ़ा ही रहे हैं या कुछ घर गृहस्थी का काम भी सिखाया है। मतलब खाना बनाना कुछ सीना पिरोना’।
राजेश बाबू मुस्कुराये और कहा –
‘आप चिंता नहीं कीजिए बीएससी मेरे साथ रहकर ही की है। और सामान्य खाना जो हमारे समाज में सामान्यतः खाते हैं वह सब कुछ तो बना ही लेती है, बहुत सारे विशेष डिश भी बनाती है।  जब भी भी छुट्टियों में आती है तो मुझे रोज कुछ नया बना कर खिलाती है। और स्कूल के टाइम में उसके स्कूल में कढ़ाई सिलाई बुनाई सब कुछ सिखलाया जाता था, तो वह सिलाई कढ़ाई बिनाई भी जानती है। करने का समय तो नहीं मिलता लेकिन थोड़ा बहुत कर लेती है’।
राजेश बाबू बार-बार वर के संबंध में पूछना चाह रहे थे, लेकिन राम नरेश बाबू के सवालों से पीछा छूटे तभी तो पूछ पायें।
अभी रीना के सम्बन्ध में सारा कुछ बताने के बाद एक मौका मिला उन्हें तो उन्होंने झट से सवाल पूछ दिया-
‘आप बताएं आपके बेटे मोहित जी किस कंपनी में नौकरी करते हैं और कहां से उन्होंने पढ़ाई किया है, किस आईआईटी से उन्होंने पढ़ाई किया है’।
नरेश बाबू ने कहा वह चंडीगढ़ में काम कर रहा है। वहां उसकी बुआ भी रहती है तो वहीं गया था और वहीं उसने काम पकड़ लिया। राजेश बाबू को कुछ अजीब तो लगा, फिर उन्होंने सोचा हो सकता है चंडीगढ़ के किसी बड़ी कंपनी में नौकरी मिली होगी। संयोग से उनकी बुआ भी वहीं रहती होंगी।
फिर पूछा उन्होंने- ‘कहां से आई आई टी किया है’।
रामनरेश बाबू ने जवाब दिया-
‘अरे कहीं दूर जाने की क्या जरूरत थी। यहीं पूर्णिया से ही किया है’।
राजेश जी चकराए- ‘क्या पूर्णिया से। पूर्णिया में आई आई टी कहां है’।
राम नरेश बाबू- ‘क्या बात करते हैं राजेश बाबू, आई आई टी तो यहां है ही। जमाने से यहां आईआईटी है’।
अब तो राजेश बाबू चकराए। समझ नहीं पा रहे थे कि राम नरेश बाबू किस आईआईटी की बात कर रहे हैं। अचानक उनके दिमाग में कुछ कौंध गया था, और उन्होंने पूछा-
‘क्या आप आईटीआई की बात कर रहे हैं ?’
राम नरेश बाबू- ‘हाँ भाई आई टी आई और आई आई टी एक ही चीज है ना। एक ही बात तो है’।
राजेश बाबू सोच रहे थे कहाँ फंस गये। अभी यदि उन्हें पत्थर मिलता, तो उसे अपने सिर पर ही मार लेते। वे खामोशी से थोड़ी देर इधर-उधर की बात करके राम नरेश बाबू से विदा लेकर अपनी गाड़ी में बैठ कर वापस अपने घर के लिये प्रस्थान कर गए।

-निर्मला कर्ण

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