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बूढ़ी अम्मा…

बूढ़ी अम्मा...

सड़क किनारे बूढ़ी अम्मा को खड़े दो घंटे हो गए थे हर आते जाते लोगों को ताक रही थी कि शायद कोई उसका हाथ पकड़ कर उसे रास्ता पार करा दे। शिमला की बर्फीली वादियाँ और ये सड़क जो पटी हुई थी सफ़ेद बर्फ़ की चादर से अभी अभी गिरी थी ताज़ा ताज़ा उसे डर है कि कहीं फिसल कर गिर ना जाए उसके पूरे शरीर पर झुर्रियाँ थीं।
सारे मांस ने हड्डियों का साथ छोड़ दिया था। आशान्वित आँखों से ताक रही थी इधर-उधर कि शायद किसी की कृपा दृष्टि उस पर पड़ जाए और रास्ता पार करा दे, पर लोगों के पास फ़ुर्सत कहाँ। एक आदमी उसे धक्का देता निकल गया ‘ऐ बुढ़िया ज़रा किनारे हट के खड़ी हो’

वो बोली, ‘बेटा ज़रा उस पार जाना है सड़क पार करा दे’ वो अकड़ कर बोला ‘तेरा शरीर अब ऐसा नहीं कि तू बाज़ार भर में घूमती फिरे घर पर बैठा कर’ ये सुन अम्मा की आँखों से आँसू लुढ़क आए। उसका एक ही बेटा जो उसे छोड़ विदेश में बस गया है। हर महीने चंद रुपयों के अलावा कुछ नहीं भेजता उसे आए हुए भी आठ साल हो गए। तभी एक घोड़ा गाड़ी तेज़ी से उसके बिल्कुल क़रीब से निकली और वो बेचारी संतुलन न बना पायी और गिर गई। ब़र्फ पर  गिरने के कारण थोड़ी दूर तक फिसलती चली गई… उसके घुटने छिल गए दर्द से वो बेचारी कराह उठी। किसी तरह वह ख़ुद ही उठी आस पास खड़े लोग उसे सिर्फ़ देखते रहे लेकिन मदद करने कोई नहीं आया।

समझ नहीं आता कि ये कैसा व्यवहार होता है। संवेदनशीलता न जाने कहाँ छुप कर बैठ गई है। इंसान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है? तभी अचानक पास के विद्यालय से छुट्टी की घंटी बजी सभी छात्र-छात्राएँ विद्यालय के गेट से शोर मचाते हुए बाहर आने लगे। बरफ गिरने की वजह से विद्यार्थी बहुत ़खुश थे। वह सड़क पर भाग दौड़ करने लगे, क्योंकि बच्चों को बर्फ़ बहुत पसंद होती है। वो बर्फ़ उठाकर एक दूसरे के ऊपर फेंकने लगे। तभी अम्मा के पास से ही बच्चों की एक टोली गुज़री उसमें से एक लड़का अम्मा को देख वहीं ठिठक गया और चलता हुआ उसके पास आया। उसने अम्मा से पूछा, ‘अम्मा कहाँ जाना है’
अम्मा ने कहा बेटा दवाई लेने आयी थी, क्या तुम मुझे मेरे घर पहुँचा सकते हो जो की सड़क के उस पार है’ लड़के ने सहर्ष ही अम्मा का हाथ थामा और धीरे धीरे उन्हें उनके पहुँचा दिया। अम्मा ने उसे बहुत सारी दुआएँ दीं। जब वह लौट कर आया सब साथियों ने उसकी हँसी उड़ाई तब लड़के ने कहा, ‘जब एक दिन मैं अपने माता पिता से दूर चला जाऊँगा तब मेरे माता पिता का खय़ाल रखने वाला कोई नहीं होगा। आज मैं इन बूढ़ी अम्मा का साथ दे रहा हूँ, शायद कभी जीवन में मेरे माता-पिता को ज़रूरत पड़े तो मेरे जैसा कोई बच्चा उनको राह दिखाएगा और उनके काम आएगा’ ये बात सुनकर वहाँ सन्नाटा पसर गया। उस रात को अम्मा ने प्रार्थना की तो उनकी प्रार्थना में उस लड़के के लिए दुआओं के सिवा और कुछ नहीं था…

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