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पौधरोपण

-निर्मला कर्ण 

आज बहुत दिनों के बाद मोनिका का परिवार सहित कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बना था l कोरोना काल में लॉक डाउन होने के कारण सभी लगभग घर में ही बंद रहे थे l ऑफिस का कार्य भी घर से ही हो रहा था l आज उन लोगों ने शहर से दूर कहीं पिकनिक मनाने का कार्यक्रम तय किया था l सुबह-सुबह तैयारी करके निकल पड़े वे l रास्ते में एक जगह सड़क किनारे मोनिका ने अचानक गाड़ी रोकने के लिए कहा l सभी परेशान हुए क्या हुआ क्यों रुकवा रही हैं गाड़ी l

पति ने कहा –   “क्या हो गया यहां सुनसान में गाड़ी रुकवाने का कारण”?

मोनिका –   ” सुनसान कहां है देखिये तो सामने एक घर है और कितना खूबसूरत स्थान है यह l थोड़ी देर यहां रुकते हैं”| उतरने के बाद उसने गाड़ी की डिक्की खुलवा कर उसमें रखी हुई छोटी कुदाल और डिक्की में रखे हुए कुछ पौधे निकाले l

बेटे ने कहा –   ” तो इसलिये आज सामान रखने के लिये आपने डिक्की खोलने नहीं दिया था माँ l परन्तु यह आपने डिक्की में कब डाला”?

मोनिका –  “याद नहीं कल ही तो गई थी मैं नर्सरी और वह पौधा खरीदा था”|

पति ने कहा  –  “हां खरीदा तो था,मैंने सोचा शायद तुम्हें अपने कार्यालय में पौधारोपण के लिए ले जाना है”|

मोनिका –  “वहां इतना स्थान कहां | हर साल बस नाम के लिए पौधारोपण होता है l बाद में जब सारे पौधे बरबाद हो जाते हैं तो बहुत दुःख लगता है l आज हम लोग पर्यावरण दिवस में ही घूमने निकले हैं तो कुछ पौधारोपण भी कर लें”|

पति – “क्या यहाँ पौधे बरबाद नहीं होंगे यहाँ इनकी देखभाल कौन करेगा”?

मोनिका – ” आप देखते रहिये”|

अब उसके पति और बेटों ने उसके हाथ से कुदाल लिया और मिट्टी की खुदाई करना प्रारंभ किया बारी बारी से सबने l मोनिका सामने स्थित झोपड़ी में गई और उनसे बाल्टी मांगा पानी के लिए l उनके घर के आगे थोड़ी दूर पर एक कुआं था, उन लोगों ने रस्सी बाल्टी दे दी | एक बेटे ने मोनिका के हाथ से बाल्टी लेकर कुऍं से पानी खींचा और उन लोगों ने मिलकर वहां पौधारोपण करना प्रारम्भ किया l

थोड़ी थोड़ी दूर पर सड़क के दोनों किनारे उन लोगों ने 15 पौधे लगाए l इनमें आम, अमरूद, पपीता,नींबू आदि फल के पौधे थे | जिनके घर से बाल्टी और रस्सी लिया था उन लोगों को मोनिका ने पौधे के पास इकट्ठा किया और बोलना शुरू किया –  “भाई देखिए यह सड़क किनारे की जमीन है, तो सरकारी जमीन है l हमने यहां पौधा लगा दिया है, और अब आप इसकी देखभाल करें, और प्रतिदिन इसमें पानी भी डालें , हमने इस पौधे में खाद भी डाला है l आपको और कुछ नहीं करना होगा, सिर्फ पौधे को जानवरों से बचाना होगा | और इसके बदले जब ये पौधे बड़े हो जायेंगे, वृक्ष बनेंगे तो आपको खाने के लिए इनके फल मिलेंगे l हम तो फल लेने आएंगे नहीं क्योंकि हम यात्री हैं जो आज इधर से जा रहे हैं l हो सकता है फिर वर्षों बाद ही इधर से जाएं या नहीं भी आ सकते हैं l यह पौधे यदि सुरक्षित रहे तो आपकी जीविका के भी साधन बनेंगे l इनके फल बेचकर आपकी आय भी होगी l मेरा अनुरोध है आप इन पौधों को जानवरों से बचाने का पूरा प्रयास करें”|

वह घर आदिम जनजाति पहाड़िया जाति के व्यक्ति का था | उसने कहा –

“दीदी मनी आप चिंता ना करें हम इसका झूर से घेरान कर देंगे और इसकी पूरी देखभाल भी करेंगे l और हम आपसे अनुरोध करते हैं आप बीच में कभी देखने के लिए अवश्य ही आइयेगा कि हमने इसकी देखभाल अच्छी तरह की है या नहीं की है l आप हमारे लिए इतना सोच रही हैं तो क्या हम पौधों की देखभाल नहीं करेंगे l यह पौधे तो हमारा जीवन हैं  l हम प्रकृति के बीच रहने वाले लोग हैं l आप विश्वास कीजिए यह पौधे बड़े भी  होंगे और फलेंगे भी l यह हमारी जीविका के साधन तो होंगे ही साथ ही इस रास्ते से गुजरने वाले पथिक को छाया भी देंगे l यदि उस समय फल लगे रहे तो हम उन्हें  स्वयं से तोड़कर खाने को भी देंगे, और दीदी मनी आप विश्वास कीजिए यह पौधा रोपण फिर कभी कम नहीं होगा l आगे की सड़कों पर रिक्त स्थान में हम भी पेड़ लगाते रहेंगे l आपने हमें एक रास्ता दिखाया है l और हम इस रास्ते पर जितना संभव होगा दूर तक चलेंगे l आपके समान हम भी वृक्ष दान करेंगे”|

मोनिका के पति और उसके बच्चे भी बहुत खुश थे l मोनिका के छोटे बेटे ने कहा   –  “मां हम लोग दूर क्यों जाएँ, अपने इन्हीं भाई बंधु के साथ आज हम पिकनिक क्यों नहीं मनायें”|

सभी की सहमति पर बन गई और उस दिन उस पहाड़िया परिवार के साथ मिलकर उन सब की पिकनिक की खुशी दोगुनी हो गई l

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