हृदयेश मयंक का अमृत महोत्सव सम्मान समारोह संपन्न
सुप्रसिद्ध कवि एवं चिंतनदिशा के संपादक हृदयेश मयंक के 76वें वर्ष में प्रवेश पर अमृत महोत्सव सम्मान समारोह आयोजित हुआ। साहित्य जगत की कई हस्तियां रहीं मौजूद।
हृदयेश मयंक का अमृत महोत्सव सम्मान समारोह संपन्न
लीवर ट्रांसप्लांट के बाद जीवन-संघर्ष से उबरकर 76वें वर्ष में प्रवेश पर हुआ विशेष सम्मान समारोह
मुंबई। सुप्रसिद्ध कवि, ‘चिंतनदिशा’ त्रैमासिक के संपादक एवं जनवादी लेखक संघ, महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष हृदयेश मयंक के 75 वर्ष पूर्ण कर 76वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर भव्य अमृत महोत्सव सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने उपस्थित होकर उन्हें शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
हृदयेश मयंक पिछले चार-पांच वर्षों से लीवर ट्रांसप्लांट के बाद जीवन-संघर्ष से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य लाभ के बाद उनके परिवारजनों ने स्वरसंगम फाउंडेशन के सहयोग से इस विशेष समारोह का आयोजन किया। समारोह में मयंक का सम्मान करने के साथ ही उनके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर डाॅ. सोमनाथ चट्टोपाध्याय और डाॅ. गौरव मेहता का विशेष अभिनंदन किया गया। दोनों चिकित्सकों ने भावुक होते हुए हृदयेश मयंक के जीवन-संघर्ष और उनके पुत्र एवं डोनर अभिषेक दुबे के योगदान की सराहना की।
समारोह में सुप्रसिद्ध गीतकार समीर अनजान, लोकप्रिय विधायक नरेंद्र मेहता, स्थानीय नगर सेवक मनोज दुबे, अनिल विरानी सहित नगर एवं उपनगर के अनेक लेखक, कवि, पत्रकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विनोद कुमार श्रीवास्तव, विनोददास, राकेश शर्मा, अजय ब्रह्मात्मज, धीरेंद्र अस्थाना, ललिता अस्थाना, संजय भिसे, मुख्तार खान, भूपेंद्र मिश्र, डाॅ. रीता दास राम, प्रशांत जैन, डाॅ. अवधेश राय तथा महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. शीतलाप्रसाद दुबे की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। मराठी के कवि सुनील ओवाल और भागवत बंसोडे सहित अनेक स्थानीय गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।
समारोह का विशेष आकर्षण हर्ष व्यास द्वारा हृदयेश मयंक की ग़ज़लों की सुमधुर प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी गायकी से उपस्थित श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम का सफल संचालन कवि शैलेश सिंह ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। अंत में रमन मिश्र ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हृदयेश मयंक के अमृत महोत्सव का यह आयोजन उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ उनके जीवन-संघर्ष और पुनः स्वस्थ होकर सक्रिय साहित्यिक जीवन में लौटने की खुशी का भी उत्सव बना।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
1
Wow
0