‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ का भव्य लोकार्पण, लगभग 60 कवियों ने किया काव्य पाठ
मुंबई के मीरा रोड में अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ की प्रथम पुस्तक ‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ का भव्य लोकार्पण हुआ। समारोह में करीब 60 कवियों ने काव्य पाठ किया।
मुंबई। आकार म्यूजिक, विभावरी काव्य धारा तथा स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 13 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर कवि, नाटककार एवं संगीतकार अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ की प्रथम काव्य कृति ‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ का भव्य लोकार्पण मुंबई के मीरा रोड स्थित प्रसिद्ध साहित्यिक मंच विरुंगला केंद्र में संपन्न हुआ। नीलम पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में महानगर के अनेक प्रतिष्ठित कवि, साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
पुस्तक लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता आदरणीय हौशिला अन्वेषी जी ने की। मुख्य वक्ताओं के रूप में हृदयेश मयंक, हरिप्रसाद राय, शैलेश सिंह तथा राकेश शर्मा ने ‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ पर अपने विचार व्यक्त किए और कृति के विभिन्न साहित्यिक पक्षों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हुबनाथ पांडेय जी ने पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ को अपने गीतों और ग़ज़लों की विरुंगला केंद्र में संगीतमय प्रस्तुति देने के साथ-साथ उन्हें संगीतबद्ध कर व्यापक स्तर पर समाज तक पहुँचाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी रचनाएँ निश्चित रूप से व्यापक लोकप्रियता हासिल करेंगी।
विशिष्ट अतिथि श्री आर. एस. विकल ने ‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ की रचनाओं में समाज के विघटनकारी तत्वों पर की गई टिप्पणियों को विशेष रूप से रेखांकित किया। वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर जनाब शमीम अब्बास जी ने पुस्तक के लेखक अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ को पुस्तक प्रकाशन एवं साहित्यिक यात्रा के लिए हार्दिक मुबारकबाद दी।
दूसरे सत्र में सजा काव्य का मंच
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता जनाब शमीम अब्बास जी ने की और उन्होंने अपनी ग़ज़लों से साहित्यिक महफ़िल में समां बाँध दिया। कवि सम्मेलन का प्रभावी संचालन श्री अमित दुबे ने किया।
इस अवसर पर लगभग 60 कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, जो कार्यक्रम का एक उल्लेखनीय और रिकॉर्ड बनाने वाला पक्ष रहा। पुस्तक लोकार्पण समारोह में इतनी बड़ी संख्या में कवियों की उपस्थिति और उनके द्वारा रचना पाठ किया जाना आयोजन की साहित्यिक गरिमा और सफलता को दर्शाता है।
कवि सम्मेलन में एन. बी. सिंह ‘नादान’, अनिल राही, प्रमोद पल्लवित, विनय शर्मा ‘दीप’, आनंद पाण्डेय ‘केवल’, त्रिलोचन अरोरा, रहबर, अंजनी कुमार द्विवेदी, लालबहादुर यादव, श्रीधर मिश्र, राजीव मिश्रा, अरुण दुबे, अनिल गौड़, कल्पेश यादव, नीतू पाण्डेय ‘क्रांति’, लक्ष्मी यादव, कुसुम तिवारी, लक्ष्मी कांत ‘नयन’, वीरेंद्र यादव, जमदग्नि पुरी, दिनेश बैसवारी, ओम प्रकाश तिवारी, नन्दन मिश्रा, शेखर तिवारी, डॉ. दिनेश कुमार वर्मा, नीलम पब्लिकेशन से दिनेश वर्मा, रामसिंह, विजय कुलकर्णी, रामजी कनौजिया, राम व्यास उपाध्याय, भूपेंद्र मिश्र, रामदत्त तिवारी, सुनीता गुप्ता, आनंद शंकर, राजेश कुमार सिंह, पुलक चक्रवर्ती, राहुल पी., विजय नाथ मिश्र, वीर बहादुर यादव सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
समूचा आयोजन साहित्य, संगीत और काव्य की त्रिवेणी का सुंदर उदाहरण रहा। ‘मेरी अभिलाषा मेरा मन’ के लोकार्पण के साथ ही अवधेश विश्वकर्मा ‘नमन’ ने साहित्य जगत में अपनी पहली पुस्तक के माध्यम से एक नई रचनात्मक यात्रा का शुभारंभ किया। समारोह में उपस्थित साहित्यकारों और कवियों ने उनकी इस साहित्यिक पहल की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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