स्वर संगम फाउण्डेशन और उत्तर भारतीय मंच के संयुक्त तत्वावधान में लोक गायन कजरी का कार्यक्रमअपनेी मोहक, सरस प्रस्तुति से सम्पन्न

स्वर संगम फाउण्डेशन और उत्तर भारतीय मंच के संयुक्त तत्वावधान में 23 अगस्त 2026 को मीरा रोड के विरंगुला केन्द्र में कजरी लोकगायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य बृजेश सिंह एवं उनके साथियों ने श्रावण मास और पावस ऋतु में गाई जाने वाली पारंपरिक कजरी को अपनी मधुर आवाज और लोकधुनों के साथ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में ‘घिर आई बदरिया’, ‘मिर्जापुर कइलै गुलजार हो’, ‘कचौड़ी गली सून कइलै बलमू’, ‘अबकी ना जाइब सावन में नैहरवां’ सहित कई लोकप्रिय कजरियां प्रस्तुत की गईं। तबले पर वैभव सिंह, ढोल पर फीरोज खान और मंजीरे पर रामभवन त्रिपाठी एवं पांच वर्षीय विदेह राज सिंह ने संगति दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरिप्रसाद राय ने किया।

Aug 24, 2026 - 16:58
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स्वर संगम फाउण्डेशन और उत्तर भारतीय मंच के संयुक्त तत्वावधान में लोक गायन कजरी का कार्यक्रमअपनेी मोहक, सरस प्रस्तुति से सम्पन्न
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रविवार दिनांक 23/08/2026 को स्थानीय विरंगुला केन्द्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत व लोक संगीत में दीक्षित प्राचार्य बृजेश सिंह व उनके साथियों ने श्रावण मास व पावस ऋतु में गाए जानेवाले लोक गीत कजरी की दिलकश प्रस्तुति दी। दिनांक 23 अगस्त सायं साढ़े पांच बजे से साढ़े आठ बजे तक बृजेश सिंह, अवधेश विश्वकर्मा, राजेश सिंह तथा एडवोकेट एच आर  शर्मा ने अपनी खूबसूरत आवाज व परंपरिक लोकधुन की कलात्मक प्रस्तुति तथा सुरीली स्वर लहरियों से श्रोताओं का मन मोह लिया।  प्रारंभ में उत्तर भारतीय मंच के अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र चतुर्वेदी ने सभी कलाकारों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। स्वागत समारोह के बाद शैलेश सिंह ने लोकगाीत कजरी के पारंपरिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा भारतीय ग्रामीण क्षेत्र का जन - जीवन प्रकृति से पूरी तरह  आबद्ध रहता रहा है।

प्रकृति के साहचर्य में विभिन्न लोक विधाओं व कलाओं का विकास हुआ। हमारे यहां पावस ऋतु में कजरी , वसंत ऋतु में फाग तथा ग्रीष्म ऋतु में चैता, पचरा और अन्य गीत गाए जाते रहे हैं।, कजरी श्रावण मास में गाए जाने वाला बेहद लोकप्रिय लोक गीत है। लोकगीत की यह विधा मुख्य रूप से भोजपुरी भू- क्षेत्र में गाई जाती है। इसमें प्रेम, बिरह, झूला , बादल, पवन, ननद - भौजाई आदि के माध्यम से बिरहा अपने भावनाओं को व्यक्त करता है।  इस संक्षिप्त परिचय के बाद बृजेश सिंह और उनके साथियों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए।  घिर आई बदरिया , हमके मेंहदी मंगाई द  मोती झील से जा के साइकिल से ना,  मिर्जापुर कइलै गुलजार हो,  कचौड़ी गली सून कइलै बलमू,  अबकी ना जाइब सावन में नैहरवां, सखी  रे श्याम गए मधुबनवां  कि रिमझिम बरसै सवनवा ना कैइसे खेलब जाइब सावन में कजरिया  कि बदरिया घिर आई ननदी, चारों ओर भईल  हरियाली, नाचै झूम के फूलों की डारी, रिमझिम सावन -भावै मनभावन  आदि गीतों ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

 तबले पर संगति दी वैभव सिंह ने    हारमोनियम गायक श्री बृजेश सिंह स्वयं बजा रहे थे, ढोल की  मोहक ताल  से सबको मुग्ध किया  जनाब फीरोज़ खान ने  मंजीरे से मोहक स्वर लहरी निकाल रहे थे श्री रामभवन  त्रिपाठी तथा पांच वर्षीय वादक विदेह राज सिंह।  कार्यक्रम का कुशल व रंजक  संचालन डा हरि प्रसाद राय ने  किया। अन्त में स्वर संगम फाउण्डेशन के सचिव  डा हरि प्रसाद राय ने  गायक  व वादक कलाकारों  तथा उपस्थित श्रोताओं के प्रति हृदय से आभार वयक्त किया।  जायकेदार व गरमागरम चाय व नाश्ते   से कार्यक्रम मधुर  समापन हुआ।  ।।इति।।

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