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  • मन पंछी

    नभ में एक मन पंछी देखा पंख फड़फड़ा रहा था विपरीत थी हवाएं फिर भी उड़ता ही जा रहा था मुश्किल भरी डगर थी उसने हार नहीं थी मानी जाना भी उस दिशा में था जहां जाने की थी ठानी […] More

प्रेमचंद

वर्तमान काल में प्रेमचंद और उनकी कृत्यों की प्रासंगिकता

धनपत राय श्रीवास्तव का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने एक मदरसे में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने उर्दू और फ़ारसी सीखी, और बाद में एक मिशनरी स्कूल में अंग्रेजी सीखी। उन्होंने अपनी पहली More

अवधू मेरा मन मतवाला

अवधू मेरा मन मतवाला

 लाखों वर्ष पहले का आलौकिक दृश्य । आश्रम,तप करते हुए ऋषि,सघन तरूच्छाया,कोमल पत्तियों के भार से झुकी शाखाएं,हवन के धुंए से सुगंधित हवाओं के झोंके,ऋग्वेद के पवित्र श्लोकों से ध्वनित होती पृथ्वी । आज का दिन कुछ अलग है,आश्रम में More

गांधारी का प्रायश्चित!!

गांधारी का प्रायश्चित!!

हतभागिन एक विवश होकर,मन विचलित है धीरज खोकर, बिखरे मृत अंगों बीच खड़ी,थक हार मृत्यु चहुँओर पड़ी, वह अपनी क्षुधा मिटाने को, फल एक, वृक्ष से पाने को, निर्बल हाथों को बल देकर,बिखरी लाशों को तल देकर। इक दूजे के More

बिखरता परिवार एवम सिमटता परिवार

बिखरता परिवार एवम सिमटता परिवार

 परिवार के भीतर पति पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं। ये आज का एकल परिवार है। जब हम रामायण महाभारत के युग की बात करते हैं तो दादा दादी ताऊ ताई चाचा चाची सहित परिवार हुआ करता था। जिसे संयुक्त More

दूसरा पहलू

कहानी – दूसरा पहलू

आज मेरे पचासवें जन्म दिन पर मेरे बहुत मना करने के वावजूद मेरे पति साहिल मुझसे रात के 12 बजे सुगर फ्री केक कटवा कर ही माने‌ क्योंकि आज कल बर्थ डे कुछ ऐसे ही सेलिब्रेट किया जाता है और More

मासूम की मासूमियत पर परिवेश का प्रभाव

मासूम की मासूमियत पर परिवेश का प्रभाव

बचपन जिंदगी का वो सबसे खूबसूरत और खुशनुमा अवस्था है जहाँ चाँद- तारों की बात होती है,तितलियों के पीछे भागता सतरंगी ख्वाब होता है,बागों में आम की लटकी मंजरो में मासूमियत अपना रंग चुनती है।एक कागज की नाव काफी होती More

GAZAL

  • मणिकर्णिका

    जश्न–ए–जनाजा

    कितनों की आँखें नम होंगी, क्या यारों का भरमार लगेगा कितनी संजीदा सजेगी अर्थी, कितनों का व्यापार बनेगा, जब आखिरी पड़ाव में जल कर शव मेरा अंगार बनेगा, मणिकर्णिका पे जश्न भी होगा भस्म मेरा श्रृंगार बनेगा। इक ख्वाब अधूरा […] More

आख़िरी मुलाकात

आख़िरी मुलाकात

यकीनन जानता हूं मैं कि उस रोज क्या होगा? लिए हाथों में पत्थर रूढ़ियों का काफ़िला होगा, तरफदारी करेंगे जाम और शीशे ज़माने की, अन्तिम भेंट वाली शाम खूनी सिलसिला होगा। मैं जाऊंगा ज़माने से तुम जाओगी ज़माने में, हमारे More

आशियां बादलों पर बनाते हैं

आशियां बादलों पर बनाते हैं

खुशनुमा गीत हम गुनगुनाते हैं।  आशियां बादलों पर बनाते हैं।।    रूह को सुकूंन कभी मिलता नहीं,  जब भी दर्दे- गम को छुपाते हैं ।   चोट हल्की लगी जख्म गहरा हुआ,  क्या हुआ था हमसफर सब बताते हैं । More

मंज़िलों का निशान बाक़ी है 

मंज़िलों का निशान बाक़ी है 

मंज़िलों का निशान बाक़ी है और इक इम्तहान बाक़ी है एक पूरा जहान पाया है एक पूरा जहान बाक़ी है आसमां, तुम रहो ज़रा बचकर अब भी उसकी उड़ान बाक़ी है तन तो सारा निचोड़ आया हूँ मन की सारी More

दरारों

इन दरारों से कहीं

खिड़की से भीतर आती लैंप पोस्ट की रोशनी जब मेरे कमरे में गिरती है, भरम होता है कि चाँदनी है। हर बार होता है। हाँ! मैं जानता हूँ चाँदनी दूधिया होती है, पीली नहीं, पर इंतज़ार में हर आहट आने More

रु़ह़

रु़ह़

मैं कोई ग़ज़ल तो नहीं जि़से,  तुम व़क्त़ वेवक्त़ गुनगुना लो। मैं कोई नज़्म भी नहीं जि़से, जब चाहें हाले दि़ल सुना लो। मैं कोई अफ़साना भी नहीं जि़से, चाहे याद रखो,चाहें भु़ला दो। मैं कोई आशि़याना भी नहीं जि़से, अपने दिल More

ग़ालिब हो जाने के लिए

ग़ालिब हो जाने के लिए

सुना था ग़ालिब को उमराव की गोद में लेटे लेटे चुप जुबां आरज़ू समेटे जब नया ख्याल आता वो उनके दुपट्टे के कोने में गिरह लगा देते और ख्याल कैद कर लेते और जब कलम स्याही पाते दुपट्टे की गिरह More

POEM

  • मन पंछी

    नभ में एक मन पंछी देखा पंख फड़फड़ा रहा था विपरीत थी हवाएं फिर भी उड़ता ही जा रहा था मुश्किल भरी डगर थी उसने हार नहीं थी मानी जाना भी उस दिशा में था जहां जाने की थी ठानी […] More

गांधारी का प्रायश्चित!!

गांधारी का प्रायश्चित!!

हतभागिन एक विवश होकर,मन विचलित है धीरज खोकर, बिखरे मृत अंगों बीच खड़ी,थक हार मृत्यु चहुँओर पड़ी, वह अपनी क्षुधा मिटाने को, फल एक, वृक्ष से पाने को, निर्बल हाथों को बल देकर,बिखरी लाशों को तल देकर। इक दूजे के More

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी

मासूम तरसती आँखों को दो जून की रोटी वक्त पर नसीब नहीं। बालश्रम नियम का सच बयां करने वाला जमाने में कोई नकीब नहीं।। वह मजबूरियों का मारा दर दर भटकता बदनसीब गरीब है। कम उम्र के हिसाब से  समझाये More

प्रजातंत्र

झुलस रहा सत्य देश में

झुलस रहा सत्य देश में घुट रही साँसें प्रजातंत्र की चढ़ती ग्लुकोज मँहगाई की खा रहा सुई भूख मिटने की आखिर! मैं जिंदा जो हूँ। रोजगार की लात की ठोकर मार रहे प्रजातंत्र के सीने पर आँसू बहते टूटी पीठ More

हमारी अपनी संस्कृति का भारत

हमारी अपनी संस्कृति का भारत

हमारी अपनी संस्कृति का भारत तीज त्यौहारों का भारत, ख़ुशियों से सरोबर भारत, दिवानी मस्तानी में झूमता भारत, खेत खलिहानों में बसता भारत, देश के प्रति समर्पित सेना का भारत, प्रेम प्यार नेह का भारत, धरा से आसमान को निहारता भारत, नई पौध के बचपन का भारत, शिखरता की मंज़िलों को चूमता भारत, तम से उजास की और बढ़ता भारत, विश्व में विजयी पताका लहराता भारत, देश रक्षा में अटल भारत, माटी की ख़ुशबू से नहाता भारत, कल कल करती नदीयों का भारत उद्योग विकास की दुनिया बसाता भारत मज़दूरों की मेहनत के खून पसीने का भारत, माताओं बहनो के समर्पण का भारत, सभी धर्मों का प्रेम बरसाता भारत, ये है नमस्ते और गुरु ज्ञान का भारत, माँ भारती के जन जन का भारत, देश के लिए मर मिटे वीर सपूतों का भारत, मेरा भारत आपका भारत हम सबका भारत। …देवेंद्र बंसल इंदौर More

बेड़ियाँ

क्या यह वही बेड़ियाँ हैं, जो किसी मुजरिम को बाँध कर रखती है ? क्या यह वही बेड़ियाँ हैं,जो किसी गुनहगार को कैदखाने में कैद कर के रखती है ? नहीं….. नहीं….. यह वे बेड़ियाँ नहीं —-यह तो वे बेड़ियाँ More

स्वाधीनता दिवस

हुंकार

स्वाधीनता दिवस पर देश के नाम “युवा शक्ति की हुंकार” युवा शक्ति तुम आगे आओ, आगे बढ़कर देश बचाओ। क्या लड़की, क्या हो लड़के, देश बचाओ आगे बढ़के। क्या नर और क्या है नारी, हिला के रख दो दुनिया सारी। More

STORY

  • अवधू मेरा मन मतवाला

    अवधू मेरा मन मतवाला

     लाखों वर्ष पहले का आलौकिक दृश्य । आश्रम,तप करते हुए ऋषि,सघन तरूच्छाया,कोमल पत्तियों के भार से झुकी शाखाएं,हवन के धुंए से सुगंधित हवाओं के झोंके,ऋग्वेद के पवित्र श्लोकों से ध्वनित होती पृथ्वी । आज का दिन कुछ अलग है,आश्रम में […] More

दूसरा पहलू

कहानी – दूसरा पहलू

आज मेरे पचासवें जन्म दिन पर मेरे बहुत मना करने के वावजूद मेरे पति साहिल मुझसे रात के 12 बजे सुगर फ्री केक कटवा कर ही माने‌ क्योंकि आज कल बर्थ डे कुछ ऐसे ही सेलिब्रेट किया जाता है और More

नीरजा

नीरजा

कितनी खुशी खुशी से  शादी करके आयी थी  नीरजा ससुराल में। मन मे सतरंगी सपने लिए। मायके में पिता और भाई का इतना डर था कि किसी लड़के की तरफ देखना तो दूर मन मे किसी का ख्याल लाने का More

पौधरोपण

-निर्मला कर्ण  आज बहुत दिनों के बाद मोनिका का परिवार सहित कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बना था l कोरोना काल में लॉक डाउन होने के कारण सभी लगभग घर में ही बंद रहे थे l ऑफिस का कार्य भी More

प्रेम सिंधारा

मीता और मयंक की शादी को चार महीने होने को आये,दोनों का प्रेम विवाह हुआ है, मंयक के परिवार वालों ने तो इस रिश्ते को आगे बढ़कर अपनी स्वीकृति दी और स्वागत किया ।लेकिन ना जाने क्यों मीता के परिवार More

आई आई टी बनाम आई टी आई

राजेश बाबू आज अपनी बेटी रीना के विवाह की बातचीत करने पूर्णिया जा रहे थे। रीना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और एम.फिल. करके अभी पी.एच.डी कर रही थी। राजेश बाबू चाहते थे उसके योग्य नौकरी और बराबर का पढ़ा More

बूढ़ी अम्मा…

सड़क किनारे बूढ़ी अम्मा को खड़े दो घंटे हो गए थे हर आते जाते लोगों को ताक रही थी कि शायद कोई उसका हाथ पकड़ कर उसे रास्ता पार करा दे। शिमला की बर्फीली वादियाँ और ये सड़क जो पटी More

PERSONALITY

  • जनकवि नागार्जुन

    ‘नागार्जुन की गिनती न तो प्रयोगशील कवियों के संदर्भ में होती है, न ‘नई कविता’ के प्रसंग में, फिर भी कविता के रूप संबंधी जितने प्रयोग अकेले नागार्जुन ने किए हैं, उतने शायद ही किसी ने किए हों और भाषा […] More

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  • मन पंछी

    नभ में एक मन पंछी देखा पंख फड़फड़ा रहा था विपरीत थी हवाएं फिर भी उड़ता ही जा रहा था मुश्किल भरी डगर थी उसने हार नहीं थी मानी जाना भी उस दिशा में था जहां जाने की थी ठानी […] More

अवधू मेरा मन मतवाला

अवधू मेरा मन मतवाला

 लाखों वर्ष पहले का आलौकिक दृश्य । आश्रम,तप करते हुए ऋषि,सघन तरूच्छाया,कोमल पत्तियों के भार से झुकी शाखाएं,हवन के धुंए More

गांधारी का प्रायश्चित!!

गांधारी का प्रायश्चित!!

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  • अवधू मेरा मन मतवाला

    अवधू मेरा मन मतवाला

     लाखों वर्ष पहले का आलौकिक दृश्य । आश्रम,तप करते हुए ऋषि,सघन तरूच्छाया,कोमल पत्तियों के भार से झुकी शाखाएं,हवन के धुंए से सुगंधित हवाओं के झोंके,ऋग्वेद के पवित्र श्लोकों से ध्वनित होती पृथ्वी । आज का दिन कुछ अलग है,आश्रम में […] More

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नीरजा

नीरजा

कितनी खुशी खुशी से  शादी करके आयी थी  नीरजा ससुराल में। मन मे सतरंगी सपने लिए। मायके में पिता और More

पौधरोपण

-निर्मला कर्ण  आज बहुत दिनों के बाद मोनिका का परिवार सहित कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बना था l कोरोना More

प्रेम सिंधारा

मीता और मयंक की शादी को चार महीने होने को आये,दोनों का प्रेम विवाह हुआ है, मंयक के परिवार वालों More

आई आई टी बनाम आई टी आई

राजेश बाबू आज अपनी बेटी रीना के विवाह की बातचीत करने पूर्णिया जा रहे थे। रीना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से More

बूढ़ी अम्मा…

सड़क किनारे बूढ़ी अम्मा को खड़े दो घंटे हो गए थे हर आते जाते लोगों को ताक रही थी कि More

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  • मणिकर्णिका

    जश्न–ए–जनाजा

    कितनों की आँखें नम होंगी, क्या यारों का भरमार लगेगा कितनी संजीदा सजेगी अर्थी, कितनों का व्यापार बनेगा, जब आखिरी पड़ाव में जल कर शव मेरा अंगार बनेगा, मणिकर्णिका पे जश्न भी होगा भस्म मेरा श्रृंगार बनेगा। इक ख्वाब अधूरा […] More

आख़िरी मुलाकात

आख़िरी मुलाकात

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दरारों

इन दरारों से कहीं

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रु़ह़

रु़ह़

मैं कोई ग़ज़ल तो नहीं जि़से,  तुम व़क्त़ वेवक्त़ गुनगुना लो। मैं कोई नज़्म भी नहीं जि़से, जब चाहें हाले दि़ल सुना More

ग़ालिब हो जाने के लिए

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गांधारी का प्रायश्चित!!

गांधारी का प्रायश्चित!!

हतभागिन एक विवश होकर,मन विचलित है धीरज खोकर, बिखरे मृत अंगों बीच खड़ी,थक हार मृत्यु चहुँओर पड़ी, वह अपनी क्षुधा More

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी

मासूम तरसती आँखों को दो जून की रोटी वक्त पर नसीब नहीं। बालश्रम नियम का सच बयां करने वाला जमाने More

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झुलस रहा सत्य देश में

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हमारी अपनी संस्कृति का भारत

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हमारी अपनी संस्कृति का भारत तीज त्यौहारों का भारत, ख़ुशियों से सरोबर भारत, दिवानी मस्तानी में झूमता भारत, खेत खलिहानों में बसता भारत, देश के प्रति समर्पित सेना का भारत, प्रेम प्यार नेह का भारत, धरा से आसमान को निहारता भारत, नई पौध के बचपन का भारत, शिखरता की मंज़िलों को चूमता भारत, तम से उजास की और बढ़ता भारत, विश्व में विजयी पताका लहराता भारत, देश रक्षा में अटल भारत, माटी की ख़ुशबू से नहाता भारत, कल कल करती नदीयों का भारत उद्योग विकास की दुनिया बसाता भारत मज़दूरों की मेहनत के खून पसीने का भारत, माताओं बहनो के समर्पण का भारत, सभी धर्मों का प्रेम बरसाता भारत, ये है नमस्ते और गुरु ज्ञान का भारत, More

बेड़ियाँ

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हुंकार

स्वाधीनता दिवस पर देश के नाम “युवा शक्ति की हुंकार” युवा शक्ति तुम आगे आओ, आगे बढ़कर देश बचाओ। क्या More

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  • जनकवि नागार्जुन

    ‘नागार्जुन की गिनती न तो प्रयोगशील कवियों के संदर्भ में होती है, न ‘नई कविता’ के प्रसंग में, फिर भी कविता के रूप संबंधी जितने प्रयोग अकेले नागार्जुन ने किए हैं, उतने शायद ही किसी ने किए हों और भाषा […] More

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