इंसान का दिमाग कोरे काग़ज़ की तरह होता है। यानी कहा जाए तो कुछ भी लिखा नहीं होता है। वहीं दूसरी ओर हम सब जानते हैं कि उस कागज पर जो लिखा जाएगा अंततः वहीं पढ़ा जाएगा। कहने का तात्पर्य यह है कि इंसान का दिमाग भी वास्तविक सम्प्रेषण को जाने बिना यानी झूठे विचारों से भर जाता है। और तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है। वास्तविकता से रूबरू होने से पहले अनगिनत पूर्वाग्रह संप्रेषण के माध्यम से इंसान के दिमाग को जकड़ लेते हैं। और वहीं पूर्वाग्रह धीरे-धीरे एक विकराल रूप धारण कर लेता है। जब उसका विस्फोट होता है और विस्फोट के परिणाम इतने भयंकर निकलते हैं कि सदियों तक उसके अंश आस-पास के वातावरण में मौजूद रहते हैं। जो आने वाली पीढ़ी के लिए मीठा और धीमा जहर साबित हो जाता है। इंसान की अनमोल जिंदगी को बेह्तरीन बनाने के लिए सम्प्रेषण के पूर्वाग्रह से कैसे और किस प्रकार सुरक्षित रह सकते हैं। आईए विश्लेषक कुमार जितेन्द्र 'जीत' के साथ विश्लेषण से समझने का प्रयास करते हैं।
क्या होता है संप्रेषण - संप्रेषण का अर्थ यह है कि विचारों का आदान-प्रदान करना। यानी एक व्यक्ति के विचार दूसरे व्यक्ति तक किसी भी माध्यम से पहुंचाना। सम्प्रेषण के रूप लिखित, मौखिक और सांकेतिक भी हो सकते है। सम्प्रेषण रूप और माध्यम कौनसा होगा। यह उन दो व्यक्तियों पर निर्भर करता है। जो सम्प्रेषण के लिए तैयार है ।
आधुनिक युग में वास्तविक सम्प्रेषण का अभाव- आधुनिक युग में अधिकतर देखा जाए तो इंसान पूर्वाग्रह से अधिक ग्रसित हो रहा है। जहाँ भी देखे पूर्वाग्रह ने इंसान को जकड़ लिया है। जिससे इंसान अब आंतरिक रूप से खोखला नजर आ रहा है। जिसको हर कोई अपनी मर्जी से जब चाहे बजा रहा है। और बजने के बाद उसकी ध्वनि आस-पास को अधिक प्रभावित कर रही है। इसका मुख्य कारण य़ह है कि आधुनिक युग में वास्तविकता जिसकी बहुत अधिक जरूरत है लेकिन संप्रेषण में आपको इसका अभाव काफी हद तक देखा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर दस व्यक्तियों को एक पंक्ति में खड़ा कर दिया गया है। प्रथम व्यक्ति को एक छोटा सा वाक्य दिया `वह अजमेर गया' और कहा गया कि इस वाक्य को दूसरे व्यक्ति, दूसरा व्यक्ति तीसरे को... ऐसे करके अंतिम दसवें व्यक्ति तक वाक्य सम्प्रेषण के माध्यम से पहुंचाना है । अब हम देखते हैं कि प्रथम व्यक्ति से दसवें व्यक्ति एक छोटा सा वाक्य क्या से क्या बन कर रह गया।
आप यह सुनकर हैरान हो जाएंगे कि सम्प्रेषण में वास्तविकता का वाकई में कितना अभाव है ।
देखिए अंतिम दसवें व्यक्ति तक कौनसा वाक्य पहुचा हैं - `वह मर गया' सुनकर हो गए न आश्चर्यचकित। यह हक़ीक़त है कि आप भी ऐसे समुह बनाकर प्रायोगिक कार्य करके सम्प्रेषण वास्तविकता को जान सकते हैं। या अपने आस-पास ऐसी घटनाओं पर एक नजर डाल सकते हैं।
विवादों की जड़ हैं-जहरीले सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह- बिल्कुल सत्य कथन है। इसको हमें स्वीकार करना ही होगा ताकि आने वाली पीढ़ी पूर्वाग्रह से ग्रस्त ना हो। आधुनिक युग में देखा जाए तो जितने भी हर पल जो विवाद उत्पन्न हो रहे हैं, उसकी मुख्य जड़ हैं जो सदैव बिन पानी भी जिवित रहती है त् वह है चारो ओर फैल रहा जहरीले सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह और इससे ग्रस्त हो रहीं हैं वर्तमान की युवा पीढ़ी। दौड़ भाग की जिंदगी में रुकने का दो पल किसी के पास नहीं है लेकिन आपस में कहीं भी मिल जाए तो जहरीले सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह शुरू हो जाता है। यह छोटा सा पूर्वाग्रह धीरे-धीरे एक विकराल रूप धारण कर लेता है। और बिना ऑक्सीजन से जलने वाली लकड़ी से निकलने वाले धुएँ के समान फैलता रहता है। और अचानक कहीं से लकड़ी को अगर ऑक्सीजन मिल जाए तो लकड़ी को तीव्र गति से जलते हुए आप देख सकते हैं या कहीं देखा होगा। ऐसा ही हाल वर्तमान में सम्प्रेषण के पूर्वाग्रह का भी है।
कैसे खत्म होगा जहरीले सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह - आधुनिक युग में इंसानो के बीच में जो दूरियाँ बढ़ रही है इसका मुख्य कारण अगर देखा जाए तो शत प्रतिशत सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह ही है। अब इस सम्प्रेषण के पूर्वाग्रह को समय रहते खत्म करना होगा अन्यथा इसका परिणाम कुछ अलग निकलेगा। इसके लिए हमें वास्तविक सम्प्रेषण की आवश्यकता होगी यानी कहा जाए कि किसी भी बात की सच्चाई को जानने की जरूरत है । सम्प्रेषण चाहे मौखिक, लिखित या सांकेतिक भाषा के रूप में जो भी हो। सभी की गहराई से पड़ताल करने बाद उचित कदम उठाना इंसान के भविष्य के लिए बेहतर होगा। यानी किसी भी विवाद की शुरुआत से पहले सम्प्रेषण से उत्पन्न हुए पूर्वाग्रह की तहकीकात करना बेहद जरूरी है। तभी हम अपने आस-पास बढ़ रहे जहरीले सम्प्रेषण का पूर्वाग्रह को खत्म करके एक बेह्तरीन दिशा दे सकते हैं।
सकारात्मक सम्प्रेषण का पूर्वाभ्यास है - पूर्वाग्रह का असली समाधान:- मनुष्य जीवन अनमोल हैं, मिट्टी का है एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा और सब धरा का धरा पर ही रह जाएगा। आप और हमने बहुत सुना लेकिन कितना सार्थक है य़ह जानना जरूरी है।
तो क्या इस अनमोल जिंदगी को हम पूर्वाग्रह के साथ से ही जिएंगे या कुछ बदलाव भी ला सकते हैं। आईए हम सभी मिलकर बदलाव की ओर एक छोटा सा कदम बढ़ाते हैं। वो है आधुनिक पी़ढी के भविष्य को अगर सुरक्षित और बेह्तरीन बनाना है तो सकारात्मक ऊर्जा के साथ सम्प्रेषण का पूर्वाभ्यास करना होगा। तथा इस सम्प्रेषण को तीव्र गति से बढ़ाना होगा ताकि जो तीव्र गति से पूर्वाग्रह फैला रहा है उसको समय पर रोक सकते हैं। और भविष्य में होने वाली अनहोनी से बचा कर अनमोल जीवन की मुस्कुराती जिन्दगियों को पटरी पर ला सकते हैं।
अनमोल जिंदगी का, अनमोल सम्प्रेषण !
कुमार जीत का है, सटीक विश्लेषण !!
कुमार जितेंद्र जीत