बिटिया की शिक्षा

यह कहानी समाज में बेटियों की शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर फैली संकीर्ण मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कबीर और उसकी पत्नी दिया एक मासूम बच्ची जूली को उसके पिता द्वारा स्कूल जाने से रोकते और मारते हुए देखते हैं। दिया अपने तर्क, संवेदनशीलता और साहस से उस पिता की सोच बदल देती है। कहानी यह संदेश देती है कि यदि बेटियों को समान अवसर और शिक्षा मिले, तो वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर सकती हैं।

May 21, 2026 - 16:59
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बिटिया की शिक्षा
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आँखों में अभी भी दूर दूर तक नींद का नामोनिशान नही था, मनोमस्तिष्क में अभी भी सुबह वाली घटना का चलचित्र चल रहा था
करवट बदलते बदलते पता ही नही चला कब सुबह के ५ बज गए थे,
अचानक से एक मीठी आवाज मेरे कानों में पड़ी 


... ‘कबीर'
ये आवाज `दिया' की थी
(वैसे तो दिया मेरी पत्नी थी, लेकिन उससे पहले वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी।)
‘हाँ दिया'
(पास में लेटी दिया की तरफ करवट बदलते मैंने बोला)
‘आज बड़ी जल्दी जग गये'
‘दिया आज पूरी रात वही घटना सामने आती रही, इसी चक्कर में नींद ही नही आई।
कैसे कैसे लोग आज भी समाज मे हैं, आखिर हमारा समाज बेटियों को बोझ क्यों समझता है।
‘कबीर, ये समाज ऐसा ही है इसे सच और गलत की समझ बड़ी देर में होती, देखना आज नही तो कल ये समझेंगे जरूर'
फिर ये मत भूलो इन जैसों के साथ साथ तुम्हारे जैसे लोग भी तो हैं, तभी तो आज बेटियां किसी से कम नही हैं।
दरअसल कल हम लोग सुबह ऑफिस के लिए निकले ही थे की सामने होने वाले दृश्य ने एकाएक गाड़ी रोकने पर मजबूर कर दिया था
मुझसे पहले दिया गाड़ी से उतरती हुई बोली
‘कबीर इसे रोको'
मैंने बिना एक पल गंवाए अपनी कार को साइड में लगा कर दौड़ा ही था कि, तब तक दिया उन तक पहुँच चुकी थी
सामने एक आदमी सरकारी स्कूल की ड्रेस पहने एक मासूम बच्ची को बहुत बेरहमी से पीट रहा था
उस दिन दिया को देखकर मै दंग रह गया,
इसमें इतनी फुर्ती आयी कहाँ से
मेरे वहां तक पंहुचने से पहले दिया ने उस इंसान को रोक लिया था, और उस मासूम को अपने से बिलकुल चिपका सा लिया था
और वो प्यारी सी बच्ची अभी भी रोये ही जा रही थी
‘अरे आप इसे पीट क्यू रहे थे'
(मैं थोड़ा गुस्से में उस तक पहुँचते ही बोला)
‘आप की तारीफ़'
(कुछ अकड़ते हुए तो बोला था वो, लेकिन तब तक दिया ने उस बच्ची को अपने गोदी में उठा कर चुप करा लिया था)
'तारीफ़ न ही करो तो अच्छा है महोदय, पहले आप ये बताओ आप इसे पीट क्यू रहे थे'
(मेरे बोलने से पहले आवेशित सी मुद्रा में दिया बोली)
‘अब पीटता ना तो क्या करता, अब ये ११ साल की हो गई है, और काम काज सीखने की उम्र हो चुकी है, तब भी  जिद कर रही है हमें स्कूल जाना है, और इसको ये नही पता की ये लड़की है, इसका स्कूल में क्या काम
'ओह'


मन के अंदर एक अजीब बेचैनी सी लग रही थी, और मेरी आँखे उस इंसान को नफरत से घूर रही थी
ठीक उसी पल ये ख्याल आया सड़क पर किसी का तमाशा बनाना ठीक नही लगता, और आस पास लोगो की भीड़ भी जमा होने लगी थी
'तुम्हारा घर कहां है? मुझे अपने घर ले चलो'
अब उस इंसान की बोली से स्पष्ट प्रतीत होने लगा था कि थोड़ा सहम गया है
'यही पीछे वाली गली में'दिया मेरा इशारा समझ गई थी, और उसकी तरफ देखकर बोली
‘चलो घर चलते है'
‘कबीर आप गाड़ी लेकर आओ'
(उस गुड़िया की उंगली पकड़े दिया उस इंसान के साथ उसके घर की तरफ चल दी)
(उसके घर का रास्ता इतना संकरा था कि मुझे बाहर ही गाड़ी पार्क करनी पड़ी, और बिना किसी देरी के दिया के पास आ गया)
‘बेटा इधर आओ'
(वो मेरी तरफ आ गई)
‘आपका नाम क्या है'
(उसको गोदी में उठाते हुए बोला)
‘जूली'
(वह बहुत धीमी आवाज में बोली)
‘अले बड़ा प्यारा नाम है'
दिया तब तक उसके घर के बाहर पड़ी चारपाई पर बैठ चुकी थी
'आप मुझसे उम्र में बड़े है, आपने तो दुनिया देखी है फिर आप 'जूली' को पढ़ाना क्यू नही चाहते'
(उस इंसान से मुखातिब होकर दिया बोले जा रही थी)
'मैडम जी एक तो हम गरीब लोग ऊपर से ये लड़की, और भला इसको पढ़ लिख कर करना ही क्या है, शादी के बाद वैसे भी इसे' चूल्हा चौका ही करना'
(वह रुक रुक कर बोल रहा था, उसकी सारी बातों को मैं जूली के साथ खेलते हुये आराम से सुन रहा था)
अरे गरीब है तो क्या हुआ, वैसे भी सरकार तो मुफ्त में शिक्षा प्रदान कर ही रही है,
साथ ही साथ ड्रेस, जूते मोज़े, बैग, खाना भी दे रही है।


आप कह रहे है ये लड़की है, आज लड़कियां किस क्षेत्र में नही है ये बताइए, मैं भी लड़की हूँ जबकि इनसे ज्यादा मैं कमाती हूँ और तो और अभी कल की ही बात है क्रिकेट में लड़कियों ने विश्व कप जीत लिया। उन्होंने दिखा दिया कि अगर समान मौका दिया जाए तो हम भी किसी से कम नही। आजकल  हर जगह लड़कियों का ही बोलबाला है, हम लोगो ने साबित कर दिया अगर हमें भी अच्छी शिक्षा मिले तो हम किसी से कम नही वरन लड़को से आगे ही है।
(तब तक दिवार के सहारे खड़ी एक औरत बीच में बोल पड़ी)
‘हम तो पहले से कह रहे थे जी, की मेरी बिटिया को स्कूल भेजो, लेकिन इनकी मति मारी गई है, जब देखो यही बोलते है....आखिर क्या कर लेगी स्कूल जाकर,
हमने इसी लिए घर में सिलाई का काम सुरु कर दिया जिससे मेरी बिटिया स्कूल जा सके, लेकिन हर बार यही रोकते आये है'
(उनकी बातों से लग गया ये जूली की माता जी थी)
दिया ने उन्हें अपने पास बुलाया और समझाने लगी, मैं थोड़ा दूर हो गया था, अब उनकी स्पष्ट आवाज हमे सुनाई नही पड़ रही थी।
मैं जूली के साथ खेलने में व्यस्त था, शायद वो अब सारी बातों को भूल गई थी.....

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‘जूली'
(ये उसके पिता की आवाज थी, मुझे लग गया था कि दिया ने इनको सच का ज्ञान करा दिया है)
‘बेटा इधर आओ'
(बच्चे तो प्यार के भूखे होते है, वो बिना कुछ सोचे उनकी तरफ दौड़ पड़ी)
बेटा मुझे माफ़ कर दो, आज से मैं अपनी बिटिया को रोज स्कूल छोड़कर आउंगा, तुम खूब पढ़ो लिखो, बिल्कुल मैडम जी की तरफ
(दिया की तरफ वो देख कर बोला था)
फिर मैंने उसको अपना कार्ड दिया और कहा
‘तुम्हे कभी भी कोई जरूरत हो मुझसे कहना लेकिन जूली को कभी स्कूल जाने से मत रोकना, और मैं खुद जाकर उससे स्कूल में मिल लिया करूँगा
उसने मेरी तरफ हाथ जोड़ते हुए कहा
अब मैडम जी ने मुझे सीख दे दी की
‘बेटियां किसी से कम नही है'
मैं भी अपनी बिटिया को बिल्कुल मैडम जी की तरह बनाऊंगा!!
उस वक्त मैं दिया को गर्व से बस देखे जा रहा था।

कुमार पंकज

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