वीर चन्द्र सिंह 'गढ़वाली'

रित गाँधीजी से और फिर आर्यसमाजी होकर, नहीं गंवारा किया के जीते रहें आत्म को खोकर।

Nov 7, 2023 - 18:12
Nov 19, 2023 - 20:13
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वीर चन्द्र सिंह 'गढ़वाली'
Veer Chandra Singh 'Garhwali'

नायक पेशावर कांड के
वीर चन्द्र सिंह 'गढ़वाली',
ना बम ना बन्दूक मगर
अंग्रेज़ी चूल हिला डाली।
अट्ठारह सौ एकानबे में
जन्मे थे सेनानी,और युवा होकर के 
सेना में जाने की ठानी।
सैनिक बेशक अंग्रेज़ी
पर हृदय था भारत माँ का,
और उस पर सान्निध्य मिला
गाँधीजी राष्ट्रपिता का।
प्रेरित गाँधीजी से और फिर
आर्यसमाजी होकर,
नहीं गंवारा किया के
जीते रहें आत्म को खोकर।
चप्पा चप्पा भारत 
आंदोलनरत आज़ादी को,
मुक्त कराना फिरंगियों से
माँ को इस माटी को।
चरम पे जा पहुँचा था जब
आंदोलन पेशावर में,
उसे कुचलने वीर चन्द्र को
भेजा गया भँवर में।
वीर चन्द्र के सम्मुख थे जो
अपने ही थे सारे,
और अपनों के सीनों में कोई
कैसे गोली मारे।
रखा किनारे हथियारों को,
बन्दूकों-गोली को,
और मिली आवाज़ एक 
आज़ादी की बोली को।
इस बोली की सज़ा थी
ग्यारह वर्ष का कारावास,
उसके बाद तो वर्धा 
गांधीजी संग रहा प्रवास।
भारत छोड़ो आंदोलन में,
सक्रियता दिखलाई,
कारावास तीन वर्ष की 
सज़ा रूप फिर पाई।
जब आज़ादी मिली देश में
नया सवेरा आया,
वीर चन्द्र ने राजनीति के
पथ पर क़दम बढ़ाया।
मगर राजनीति की दुनियां
उनको रास न आई,
सीधे सच्चे थे उनको ना
आती थी चतुराई।
और कुछ यूं आज़ाद हवा में
खुलकर जिये वीरवर,
उन्नीस सौ उन्यासी में फिर
देह त्याग दी नश्वर।
राष्ट्रप्रेम, बलिदान के ये
पदचिह्न न कभी मिटेंगे,
और ना ही सम्मान भाव 
इन हृदयों से सिमटेंगे।
जब तक राष्ट्र रहेगा तब तक अमर है नाम तुम्हारा,
वीर चन्द्र गढ़वाली शत शत
नमन है तुम्हें हमारा।
शत शत नमन है तुम्हें हमारा।

मुकेश जोशी 'भारद्वाज'
जिला पिथौरागढ़,उत्तराखंड

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