ऑपरेशन सिंदूर

यह लेख 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए जिहादी आतंकी हमले की पीड़ा, उसके मानवीय प्रभाव और भारत की निर्णायक सैन्य प्रतिक्रिया ऑपरेशन सिंदूर का सशक्त वर्णन करता है। निर्दोष पर्यटकों की हत्या, महिलाओं के उजड़े सुहाग और धर्म के नाम पर की गई बर्बरता को उजागर करते हुए यह लेख भारतीय सेना के साहस, रणनीतिक क्षमता और राष्ट्र की संप्रभुता के संकल्प को काव्यात्मक एवं तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है।

Jan 2, 2026 - 18:44
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ऑपरेशन सिंदूर
operation vermilion
                 हाल ही में २२ अप्रैल, २०२५ को कश्मीर के पहलगाम में एक दुखद घटना देखने को मिली; पूरे भारत से जहां कोई अपने बच्चों, परिवार, पति-पत्नी आदि के साथ कश्मीर घूमने के लिए आए थे। जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के पर्यटक कश्मीर की वादियो में छुट्टियां मनाने के लिए आए हुए थे। जहां उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था, कि यह पल उनके जीवन का अंतिम और बेहद खौफनाक पल होगा। उन्हें क्या पता कि वह दोबारा अपने घर का रुख नहीं कर पाएंगे। जब कश्मीर के पहलगाम में पर्यटक अपने परिवार के साथ मौज मस्ती कर रहे थे, घूम रहे थे, फिर रहे थे, कोई फोटो खींच रहा था, कोई खाना खा रहा था आदि तभी आर्मी की यूनिफॉर्म में कुछ बहरूपिए आतंकवादी वहां जाकर लोगों से उनकी पहचान पूछने लगे कि वह किस धर्म के हैं जब लोगो ने बताया कि वह 'हिंदू' हैं तब उन जिहादी आतंकवादियों ने उनको गोली मार दी। लेकिन जब  मुसलमान बताया गया तब उनसे कलमा पढ़वाया गया। कलमा पढ़ने वाले को उन आतंकियों ने छोड़ दिया।इस हमले में मरने वालों में केवल पुरुष शामिल थे, आतंकियों ने देश में डर का माहौल बनाने के लिए केवल पुरुषों को निशाना बनाया, जब महिलाओं ने आतंकियों से रहम करने और कहा- कि 'मेरे पति को मार दिया अब मुझे भी मार दो मुझे क्यों छोड़ दिया' इस पर आतंकियों ने कहा- 'जा कर मोदी को बोल देना'।  आतंकवादी अपने आप को धर्म का आका समझ रहे थे और उन्होंने इसी तरह लगभग २४ पर्यटकों को गोली मार  दी। आतंकी सिपाही की वर्दी में थे इसलिए लोग उन्हें आता हुआ देख पहचान नहीं पाए। घटना के कुछ देर बाद जब असली सिपाही पहलगाम वैली में पहुंचे, तो पर्यटक उन असली सिपाहियों को देखकर घबरा गए थे और उन्हें लगा वह वापस कोई आतंकवादी होंगे। जब सेना ने उनको विश्वास दिलाया कि वह भारतीय सिपाही हैं तब लोगों ने अपनी आपबीती सेना को सुनाई। लाशे पहलगाम घाटी में ताश के पत्तों की तरह पड़ी हुई थी। देश में ये घुसपैठिए कैसे इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे जाते हैं। इस घटना को मैने अपनी कुछ पंक्तियों में पिरोया है जो इस प्रकार हैं -
           `धर्म पूछ कर गोली मारना,
             किस वीरता की निशानी है? 
             शीश काटकर धर्म बचाना;
             ये सभ्यता हमारी है।।'
हमले के २० मिनट बाद जब सेना पहलगाम घाटी में पहुंचे तब वहां घबराए लोगों को सेना ने आश्वासन दिया और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा जताया। जांच पड़ताल में पाया गया कि इस घटना में भी पाकिस्तान शामिल है। आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान का बहुत बड़ा हाथ है। पाकिस्तान ही शायद एकमात्र ऐसा देश है जो आतंकवाद को पालता और पोसता है। यह अब से नहीं, शुरु से आतंकियों का आका बना बैठा है। लेकिन अब भारत ने भी यह सौगंध ली है कि वह आतंक को पनाह देने वाले को या आतंक को पालने वाले या फंडिंग करने वाले या आतंक को सहयोग करने वाले को छोड़ेगा नहीं। यह बदला वह पाकिस्तान से उसी के घर में उन आतंकवादियों को उन्हीं की भाषा में देगा।  हमारे पर्यटकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। 
इस हमले के दो सप्ताह बीतने के बाद सात मई २०२५ को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सौ किलोमीटर सीमा में अंदर घुसकर पाकिस्तान के आतंकवादी कैंप को निशाना और वहां के नौ आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।जिसकी जानकारी भारतीय सेना की दो महिला सिपाही विंग कमांडर व्योमिका और कर्नल सोफिया कुरैशी ने सबूतों के साथ दी। जिसका श्रेय ऑपरेशन सिंदूर को जाता है।
ये नौ ठिकाने इस प्रकार हैं: 
१). मरकज सुबहान अल्लाह बहलालपुर :- जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाना था जिसको भारतीय वायु सेवा ने हवाई हमले से नष्ट कर दिया ।
२).मरकज तैयबा मुरीदके:-
 लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया और बम से उड़ाया गया।
३). सरजल टेहडा कला :-
जैश-ए-मोहम्मद का अड्डा जहां आतंकी आपस में मिलते थे।
४). महमूना जोया, सियालकोट:-
यह हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी का ठिकाना था।
५).मरकज अहले हदीस, बरनाला:- 
यह लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा था जो एक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी है। जिसने पहले भी भारत में कई हमले कराए थे।
६).मरकज अब्बास, कोटली:-
यह जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी केंद्र था। यहां बढ़ी संख्या में आतंकवादी या स्लीपरसेल तैयार किए जाते थे।
७). मस्कट रहील शहीद, कोटली:-
यह हिजबुल मुजाहिदीन का प्रशिक्षण शिविर था । यहां भारत में हमले की योजना, हमले आदि जैसे कामों का अंजाम दिया जाता था।
८).शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद:-
यह लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी शिविर था। जहां वह आतंकवादियों को तैयार करता था ।
९).सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद:- 
यह जैश-ए-मोहम्मद का संचालन केंद्र था। जहां से मोहम्मद आतंकियों को हमला करने का आदेश या  निर्देश देता था। पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया और पाकिस्तान से व्यापार पर पाबंदी लगा दी। भारत-पाकिस्तान सीमा को भी बंद कर दिया गया। भारत में रह रहे हैं पाकिस्तानी नागरिकों को एक महीने के अंदर भारत छोड़ने के लिए कहा गया। हजारों पाकिस्तानियो के विजे रद्द कर दिए गए। भारत में पाविâस्तानियो के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। इस पर अपनी कुछ पंक्तियां प्रस्तुत करती हूं-
           `अब कोई विगुल नहीं बजेगा।
                 सीधा आक्रमण होगा;
             सिंधु का पानी ही नहीं।
                खाने को पाकिस्तान...
             तुझे भोजन नहीं होगा।।'
 
                 विंग कमांडर व्योमिका और कर्नल सोफिया कुरैशी ने हमले की पूरी कार्यवाही को एक-एक करके दुनिया के सामने रखा। इन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर किया। इन्होंने बताया कि किस तरह सेना पाकिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर में घुसी ओर एक-एक करके पाकिस्तान में चल रहे नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। जिसका विवरण ऊपर दिया गया है। विंग कमांडर व्योमिका ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि हमला केवल आतंकी और उनके ठिकानों पर किया गया है। जिसमें आम जनता को कोई नुकसान या हानि नहीं पहुंचने दी। 
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को अपनी कविता की पंक्तियों से बताने का प्रयास करती हूं, जो इस प्रकार हैं-
`शौर्य का प्रतीक है ये, कायरता पर वार है।
मासूमों की आवाज ये, आतंक पर प्रतिघात है।'
ऑपरेशन सिंदूर में सिंदूर से तात्पर्य यह है कि इसे भारत में माताओ और बहनों के सुहाग की पहचान माना जाता है। जिसे वह अपनी मांग में सजाती हैं। यह सिंदूर सबसे पहले विवाह के दौरान पुरुष द्वारा स्त्री की मांग में भरा जाता है। यह सिंदूर ऑपरेशन सिंदूर तब बना जब कुछ आक्रांताओ ने कश्मीर घूम रहे भारतीय पर्यटकों से यह पूछा कि उनका धर्म क्या है?और उन बेकसूर लोगों ने जब बिना कोई विचार किए 'हिंदू' बोला तभी उन आतंकवादियों ने उनको गोली मार दी। कई माताओं का सुहाग उनके सामने उजाड़ दिया , सिर्फ धर्म के नाम पर। आखिर इसकी इजाज़त उनको किसने दी।  धर्म पूछ कर हिंदुओं को गोली मार दी, कि वह हिंदू हैं। यह भारतीय या विश्व इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि किसी का धर्म पूछ कर उसको गोली मार दी। हिंदुओं पर अत्याचार की कहानी में यह घटना एक ओर अध्याय जोड़ देती है। 
अपनी कविता की कुछ पंक्तियो से ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का वर्णन इस प्रकार करती हूं-
                `जंग तुफानों से लड़ी है, 
                 ये हवाएं क्या रोकेगी?
                 हौसले इतने बुलंद है,
                 जिन्हें मौत भी नहीं रोकेगी।।'
लाहौर के पास प्ैं-९ एयर डिफेंस सिस्टम का विनाश पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था। यह सिस्टम रूसी ए-३०० की कॉपी था और चीन से एक रणनीतिक उपहार था। लेकिन यह पाकिस्तान की वायु रक्षा के पूरी तरह से ध्वस्त होने की शुरुआत थी। उनके हवाई अड्डे, जिनमें रणनीतिक हवाई अड्डे भी शामिल हैं, जहां इ-१६ और चीनी निर्मित व्-१० विमान हैं, और जो सामरिक योजना प्रभाग के मुख्यालय के बगल में स्थित हैं, जो उनके परमाणु हथियारों को संभालते हैं, कमजोर हो गए। मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए खुले होने से, पाकिस्तानियों द्वारा बनाई गई 'दीवार' का खोखलापन उजागर हो गया। ऑपरेशन सिंदूर उन महिलाओं के सम्मान में समर्पित है जिन्होंने पहलगाम हमले में अपने सुहाग को खोया। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ़ सामरिक सफलता की कहानी नहीं है। यह भारत की रक्षा स्वदेशीकरण नीतियों का प्रमाण है। वायु रक्षा प्रणालियों से लेकर ड्रोन तक, यूएएस-रोधी क्षमताओं से लेकर नेट-केंद्रित युद्ध मंचों तक, स्वदेशी तकनीक ने उस समय काम किया है जब इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी। भारत एक संप्रभु राज्य है। वह अपनी सुरक्षा के निर्णय स्वयं ले सकता है। इसके लिए उसे किसी की भी दखल अंदाजी मंजूर नहीं। भारत की पाकिस्तान को ललकार अपनी कविता की कुछ पंक्तियो के माध्यम से-
             `खाक-ए-वतन कर देंगे,
              हम तुम्हारे हर मुकाम को।
                नक्शे में भी न मिलोगे, 
           अगर टकराओगे हिंदुस्तान से।।'
शीतल शेखर 
बरेली, उत्तर प्रदेश 

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