दंड से कर्ज में दब जाते हैं, पैतृक संपत्ति और आभूषण - जीत युवाओं को गलती सुधारने के अवसर उपलब्ध हो
दंड प्रक्रिया और कर्ज के दुष्प्रभावों पर आधारित लेख, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर इसके प्रभाव और युवाओं को सुधार के अवसर देने की आवश्यकता को दर्शाता है।
जब से धरा अस्तित्व में आई हैं तब से कुछ न कुछ परिवर्तन हुए हैं । परिर्वतन चाहे तो सकारात्मक हो या नकारात्मक लेकिन परिणाम कुछ अनोखे लेके आए। नकारात्मक परिर्वतन धरा पर सदा कर्ज लेके आए जबकि सकारत्मक परिर्वतन धरा को कर्ज से सदैव मुक्ति दिलाई है ।
क्या होती है दंड प्रक्रिया -
किसी भी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने या उसे सदियों तक जिवित रखने के लिए कुछ नियम बनाए जाते हैं। उन नियमों के विपरित जब कोई भी व्यक्ति कार्य करता है। तब व्यवस्था में कुछ बिखराव देखने को मिलता है उस बिखराव का अस्थायी समाधान के लिए उस व्यक्ति पर लगाए जाने वाले जुर्माने को दंड कहा जाता है ।
कर्ज में दब जाते हैं, पैतृक संपत्ति और आभूषण -
जब किसी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर किसी अनैतिक कार्य के लिए दंड की प्रक्रिया को लगाया जाता है। तब अन्य लोगों के लिए कुछ समय हेतु एक चर्चा का विषय बन जाता है लोग उस परिवार को एक भिन्न दृष्टिकोण से देखते हैं उस पर दंड देने का दबाव बना देते हैं त् उस दबाव के कारण वह परिवार दंड का भुगतान करने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन आर्थिक स्तर तो पहले से कमज़ोर हैं फिर क्या देखते ही देखते...परिवार की पैतृक संपत्ति या परिवार के अनमोल आभूषणों को गिरवी या बेचने को मजबूर हो जाता है आख़िर वह सम्पति का कुछ हिस्सा बेचकर दंड का भुगतान करने के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन प्रश्न हमेशा के लिए खड़ा हो जाता है कि वह उस सम्पति को पुनः वापस नहीं कर पाता है क्योंकि उसका समय के साथ ब्याज अधिक हो जाता है। आख़िर में वह अनमोल सम्पति या आभूषण कर्ज में दब जाते हैं ।
दंड बन रहा है कर्ज की मुख्य जड़ -
सदियों से आ रहीं दंड देने की परम्परा के अनुसार दंड एक कष्टदायक के साथ साथ कर्ज़दार भी हैं। क्योंकि जहां तक देखा जा रहा है दंड हमेशा आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों पर लगाया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार वाले व्यक्ति अपनी जरूरतों और सामाजिक कार्यों की समय पर पूर्ति नहीं कर पाते हैं। जिससे वें असमाजिक एवं अनैतिक कार्यो को करने के लिए मजबूर हो जाते हैं । जो धरा की व्यवस्था के अनुकूल नहीं होते हैं। जिसके परिणामस्वरूप उन व्यक्तियों पर दंड लगाया जा रहा है। जिस व्यक्ति पर दंड लगाया जाता है वह आगे से कमज़ोर होता ही फिर दंड का भुगतान करने के लिए दूसरे व्यक्तियों से धन का कर्ज लेके दंड को पूरा करते हैं। दंड प्रक्रिया तो पूरी हो जाती है लेकिन वह व्यक्ति ब्याज के मारे आर्थिक रूप से बहुत कमजोर होता रहता है। जिससे न तो परिवार का सही ढंग से पालन पोषण कर पाता और न ही कोई उत्थान कर पाता है दिनोंदिन ब्याज के चक्कर में कर्ज में डूबा रहता है जो जीवन भर पूरा नहीं हो पाता है और व्यक्ति कर्ज के मारे दबी जिदंगी जीने को मजबूर हो जाता है।
युवाओं को गलती सुधारने के अवसर उपलब्ध हो - मनुष्य जीवन में कोई युवा अगर अपनी विषम परिस्थितियों के कारण कोई अनैतिक कार्य करने को मजबूर हो जाता है तो उसे दंड देने की बजाय गलती सुधारने का एक अवसर उपलब्ध करवाना चाहिए तथा उसके साथ समय समय पर सकारात्मक संवाद करते रहना चाहिए जिससे युवा पीढ़ी में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले और कोई भी गलत कार्य करने को मजबूर नहीं हो। पाक्षिक और मासिक कार्यक्रमों का आयोजन कर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का चयन करना चाहिए तथा उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सामुहिक सहयोग करने की भावना को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए
कुमार जितेंद्र 'जीत'
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