सबसे पहले तो हमें यह जानना होगा कि खून के रिश्ते हैं क्या? दादा दादी,नाना नानी,भाई बहन,बेटा बेटी,भतीजा भतीजी,चाचा बुआ,भांजा भगिनी, पोता पोती,नाती नातिन सभी खून के रिश्ते हैं। एक तरह से हम तीन पीढियाँ को खून के रिश्ते में शामिल कर सकते हैं। जिस रिश्ते से हमारा खून का संबंध होता है उसे हम रिश्तेदार के नाम से जानते हैं। रिश्तो में कड़वाहट एक बीमारी की तरह है जो किसी भी रिश्ते को खराब कर सकती है। कड़वाहट ही रिश्तो में दुरियाँ पैदा कर देती है। पहले तो हमें यह समझना होगा कि खून के रिश्तों में कड़वाहट के कारण क्या है? तभी हम किसी कड़वाहट के दूर करने का उपाय भी जान सकते हैं। गलतफहमी,स्वार्थ,ज्यादा हस्तक्षेप,अहंकार (ईगो), जिम्मेदारी न, उठाना,आर्थिक स्थिति, यह सब ऐसे कारण है जिससे रिश्तो में कड़वाहट उत्पन्न होती है। खून के रिश्ते हमारे लिए बहुत अहम होते हैं। ये रिश्ते हमारी शान और हमारी पहचान होते हैं। इन रिश्तों को निभाना बहुत जरूरी भी है लेकिन कभी-कभी गलतफहमी के कारण रिश्तो में दरार उत्पन्न हो जाता है।
प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि खून के रिश्तो में आई कड़वाहट को कैसे कम करें? किसी भी रिश्ते में अगर कड़वाहट आ गई है तो हम क्या करते हैं कि बातचीत करना बंद कर देते हैं। मैं यह सुझाव देती हूँ कि कड़वाहट आने पर हमें बातचीत बंद नहीं करनी चाहिए। बैठकर आपस की गलतफहमियों को दूर करनी चाहिए। खून के रिश्तों में तो बातचीत होना बहुत ही जरूरी है। खून के रिश्तों में या कोई भी रिश्तों में स्वार्थ को नहीं आने देना चाहिए। गुस्सा और अहंकार में एक बार मुँह से बात निकल जाती है तो सामने वाले की भावनाओं को बहुत ही ठेस पहुँचाती है। नाजुक समय में की गई कड़वी बातें जीवन भर याद रहती है। इसलिए रिश्तो में खटास के समय सदा याद रखना चाहिए कि मुँह से कोई ऐसी बात न निकले जिससे हमें जीवन भर शर्मिंदा होना पड़े। माफी माँगने से रिश्तों से कड़वाहट दूर होती है तो माफी देने से भी कड़वाहट कम होती है। खून के रिश्तों में कड़वाहट दूर करने के लिए थोड़ा झुकना भी जरूरी है। कड़वाहट उत्पन्न होने के बाद हमें सबसे पहले कड़वाहट के कारण ढूँढना चाहिए। अगर गलती हमारी है तो तुरंत माफी मांग लेनी चाहिए और अगर गलती रिश्तेदार की है तो कहना चाहिए कि चलिए कोई बात नहीं।
मृदुवाणी से अक्सर बिगड़ी बात बन जाती है। रिश्तो में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। बेवजह शक को रिश्तो से दूर रखना चाहिए। अगर किसी रिश्तेदार की आर्थिक स्थिति खराब है तो उसके स्वाभिमान को ध्यान में रखकर उसकी मदद करनी चाहिए। खून के रिश्ते में अगर आप ज्यादा हस्तक्षेप करते हैं तो अच्छी बात नहीं है। जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से भी खून के रिश्तो में कड़वाहट उत्पन्न होती है। रिश्तो की डोर को मजबूत बनाए रखने के लिए हमें समय भी देना जरूरी है। थोड़ी सी समझदारी से हम रिश्तो में आई कड़वाहट को दूर कर सकते हैं।
मनोरमा शर्मा मनु