Bhilat Dev Baba Temple Guide | कैसे जाएँ, दर्शन और धार्मिक मान्यताएँ

हिंदी सारांश यह यात्रा-वृतांत लेखक की नववर्ष 2026 की पहली धार्मिक यात्रा का भावपूर्ण वर्णन है। लेखक अपनी छोटी बेटी हनी अंक्षाश देवरे, नाती धनीष्क (गणु) और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले स्थित प्रसिद्ध नागलवाड़ी भिलट देव बाबा मंदिर दर्शन के लिए निकलते हैं। यह यात्रा उनकी बेटी द्वारा पूर्व में ली गई मन्नत को पूरा करने हेतु आयोजित की गई थी। यात्रा के दौरान धार, नालछा, धामनोद और खलघाट होते हुए जुलवानिया में पुराने मित्र प्रताप मंडलोई जी के आतिथ्य का सुखद अनुभव मिलता है। इसके बाद सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित भिलट देव मंदिर पहुंचकर परिवार दर्शन करता है, भोजनशाला में प्रसाद ग्रहण करता है और मंदिर की ऐतिहासिक एवं पौराणिक मान्यताओं की जानकारी प्राप्त करता है। मंदिर कर्मचारियों द्वारा भीलट देव, नागदेवता, बुलेट बाबा, निसंतान दंपत्तियों की मनोकामना, किन्नरों से जुड़ी मान्यता और नागपंचमी मेले की रोचक कथाएँ बताई जाती हैं। लेखक ने इन जानकारियों को ऑडियो रिकॉर्ड कर बाद में यात्रा-विवरण तैयार किया। यह यात्रा श्रद्धा, पारिवारिक प्रेम, मित्रता, लोकआस्था, धार्मिक रहस्य और आध्यात्मिक अनुभवों से भरपूर एक प्रेरक यात्रा संस्मरण है।

May 16, 2026 - 17:53
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Bhilat Dev Baba Temple Guide | कैसे जाएँ, दर्शन और धार्मिक मान्यताएँ
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नव वर्ष २०२६ की मेरी यह पहली यात्रा मेरी छोटी बिटिया हनी अंक्षाश देवरे अपने चौदह माह के बेटे  धनीष्क ‌(गणु) के साथ ब्लड देव बाबा के दर्शन करने की इच्छा ज्यादा ही गई है उसने बताया था कि जब हमें पिछली बार आई थी तब मैंने यह मन्नत ली थी कि मेरी शादी होने के बाद हम पुनः परिवार के जोड़े से बाबा भिलट देव के दर्शन करने आएंगे ।
इस मन्नत को पूरी करने के लिए ३ जनवरी २०२६ को हमने नांगलवाड़ी भिलट बाबा देव मंदिर जाने का कार्यक्रम तय किया । पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वाहन चालक सतीश यादव को प्रातः ९:०० बजे का समय दिया गया, ड्राइवर द्वारा वाहन में  हवा, आइल, पानी चेक किया गया कंप्लीट होने के बाद हम  सीधे घर से  चाय-नाश्ता कर। लगभग प्रातः ९.४० को धार से नालछा, धामनोद होते हुए आगे खलघाट पहुंचे । वहां पर होटल आर्यन में चाय नाश्ता कर अपनी बीपी शुगर की दवा ली और अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हुए,तभी रास्ते के बीच में हमारे पूर्व परिचित प्रताप मंडलोई जी जो हमारे साथ जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान  उनसे परिचय हुआ था। हमने एक ही बस में जगन्नाथ पुरी के दर्शन किए थे और हम जहां-जहां भी गए हम दोनों परिवारों को एक ही होटल में एक ही कमरा मिला तो इससे हमारी मित्रता प्रगाढ़ हो गई थी। वह हमेशा हमारे हाल-चाल मोबाइल पर आदान- प्रदान करते रहते थे। यह यात्रा हमने २०१८ के दरमियान कोरोना काल के समापन के पश्चात की गई थी। जुलवानिया में ही जय अंबे रेस्टोरेंट के नाम से एक शानदार होटल है जो रात-दिन चलती है। उनके दो पुत्र हैं और दोनों की शादी हो चुकी है। मैंने खलघाट से ही फोन किया है कि नांगलवाड़ी जा रहे हैं तो आपके यहां विश्राम करेंगे हमें सूचना पाकर बहुत प्रसन्न हुए। हम अगला पड़ाव आपके यहां कुछ देर विश्राम करके हम अपने अगले पड़ाव नांगलवाड़ी पहुंच जाएंगे प्रताप मंडल जी और उनकी पत्नी से सुनकर बहुत प्रसन्न हुए पिछले ५ सालों से वह आमंत्रण दे रहे थे लेकिन समय नहीं मिल पा रहा था। जब इस बार मौका मिला तो मैंने उनको सूचित करके आने का कार्यक्रम बता दिया कुछ देर में हम जुलवानियां पहुंचे हमारा  शानदार स्वागत किया। हम दोनों ने अपने परिवार वालों से एक-दूसरे से परिचय करवाया और कुछ देर वहां रुक कर उनके द्वारा जलपान करवाया गया और वहां से हम उनसे विदा होते हुए अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। वहां से लगभग १० किलोमीटर की कुछ दूरी पर चलने पर हमें पहाड़ी की चोटी कि ओर इशारा करते हुए वाहन चालक यादव के द्वारा बताया गया कि अब हमें यहां से ३:५० किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ना है और मंदिर के पास में ही हमारा वहां पार्किंग है।
वहां से १०० मीटर से मंदिर का प्रवेश हो जाता है। यह व्यवस्था अभी-अभी की गई इसके पहले जब मेरी बिटिया परिवार से हमारी श्रीमती बेटा, बहू और पोता आए थे। तब यहां कच्चा रास्ता था और गाड़ी चढ़ाने में बड़ी दिक्कत आती थी, लेकिन कुशल ड्राइवर दीपक भाई उनके द्वारा इस रास्ते को जैसे-तैस रास्ते से ऊपर ले गए थे, दर्शन करवा कर लौटे थे। लेकिन जब आज हम वहां पर पहुंचे तो हमें बहुत अच्छा रास्ता मिला सीमेंटेड और अच्छी व्यवस्था कर दी गई और मंदिर को भी शानदार बनाया गया है। भिलट देव बाबा के मंदिर में बहुत ही आराम से सभी ने दर्शन किए कुछ देर विश्राम किया और आसपास फोटो शूट करते हुए हम वहीं नजदीक ट्रस्ट द्वारा संचालित भोजन शाला है, जो निशुल्क रहते हैं और जो भी अपनी श्रद्धा भक्ति से जो भी दान पुण्य करना चाहें दान कर सकते हैं। हमने भी भोजन करने के पश्चात अपनी यथाशक्ति से दान दिया। आगे बढ़ते समय रास्ते में ही छोटे-छोटे पत्थर से सभी ने अपने छोटे-छोटे मकान बना लिए, ऐसी मान्यता है कि जो यहां पर पत्थर द्वारा मकान बनाता है उसके अपने स्वयं के मकान बड़े होने पर आसानी से बन जाते हैं। पार्किंग के समीप ही भक्त निवास स्थान है, यहां पर रुकने की भी शानदार जगह है। हमने वहां पर कुछ देर विश्राम किया और वहां के बैठे हुए कर्मचारियों से इस मंदिर की जानकारी ली, तो वहां पर कार्यरत कर्मचारी ने मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि :-
नागलवाड़ी (बड़वानी, मध्य प्रदेश) स्थित मंदिर असल में बाबा भीलट देव (नागदेवता) का प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग और भक्तजन `बुलेट बाबा' के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि वे भील-भीलनी के रूप में शिव-पार्वती के वरदपुत्र थे और नाग रूप में पूजे जाते हैं; यह मंदिर सतपुड़ा की पहाड़ियों पर है और नागपंचमी पर यहाँ भव्य मेला लगता है, जहाँ भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और मंदिर परिसर में लंगर भी चलता है. 
मुख्य जानकारी :-
स्थान: नागलवाड़ी, बड़वानी जिला, मध्य प्रदेश (महाराष्ट्र की सीमा के पास). 
देवता: बाबा भीलट देव (भगवान शिव के वरदपुत्र, नागदेवता). कर्मचारी द्वारा यहां पर स्थानीय लोग इसे
लोकप्रिय नाम: `बुलेट बाबा' (नागदेवता को भील-भीलनी के रूप में पालन-पोषण के कारण भीलट कहा जाता है).
महत्व: यह एक सिद्ध स्थान है जहाँ भक्तजन आकर अपनी मनोकामनाएँ मांगते हैं और माना जाता है कि वे पूरी होती हैं; इन्हें वर्षा प्रदान करने वाले और रक्षक देवता भी मानते हैं.
विशेष: नागपंचमी के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
सुविधा: मंदिर में भक्तों के िलए लंगर (भोजन) की व्यवस्था होती है और मध्य प्रदेश सरकार यहाँ कॉरिडोर बनाने का कार्य कर रही है. जोशी रही निर्माण होने वाला है. मैंने भक्त निवास से कर्मचारी श्री राधेश्याम से पूछा कि  क्या है `बुलेट बाबा' नाम की कहानी? 
तो वह कुछ देर सोचता रहा फिर वही पास के एक वृद्ध कर्मचारियों को बुलाया उनसे कहा गया कि दादाजी आप इन्हें बुलेट बाबा की कहानी बताएं तब उसे वृद्धि कर्मचारियों द्वारा हमें बताया गया कि यह मंदिर राजस्थान के पाली में स्थित `ओम बन्ना' (बुलेट बाइक से जुड़ी कहानी) वाले मंदिर से अलग है; नागलवाड़ी में 'भीलट देव' को नाग रूप में पूजने के कारण `बुलेट बाबा' कहा जाता है, जो भील समुदाय के रक्षक और चमत्कारिक शक्ति वाले देवता हैं.
इसका एक रहस्य भी है, 
नागलवाड़ी मंदिर (भीलट देव मंदिर) का रहस्य- यह है कि यह नाग देवता का चमत्कारी स्थान है, जहाँ निसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, और यह भी कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद किन्नर यहाँ नहीं रुकते हैं। यह मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित है और भीलट देव, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है, की तपोभूमि है।  
नागलवाड़ी मंदिर के रहस्य और मान्यताएँ: 
भीलट देव की कथा: भीलट देव का जन्म भगवान शिव की कृपा से हुआ था, लेकिन शिवजी ने उन्हें वचन के अनुसार वापस ले लिया और नाग देवता के रूप में उनकी पूजा होने लगी, जो लोगों की इच्छाएँ पूरी करते हैं। 
नाग देवता का वास: इस स्थान का नाम नागलवाड़ी इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ नाग देवता (भीलट देव) निवास करते हैं, और उन्हें भील-भीलनी के रूप में पालन-पोषण करने के कारण भीलट देव भी कहा जाता है। 
चमत्कारी शक्तियाँ: मान्यता है कि भीलट देव की पूजा से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है और सभी मन्नतें पूरी होती हैं। 
किन्नरों का न रुकना: एक रहस्य यह भी है कि सूर्यास्त के बाद किन्नर (ट्रांसजेंडर समुदाय) इस मंदिर परिसर में नहीं रुकते हैं, जिसके पीछे कई स्थानीय कथाएँ हैं। 
शक्तिशाली स्थान: यह मंदिर तंत्र-मंत्र और अलौकिक शक्तियों के लिए जाना जाता है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। 
मंदिर की विशेषताएँ: यह मंदिर गुलाबी पत्थरों से बना है और पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। नागपंचमी जैसे अवसरों पर यहाँ बड़ा मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु आते हैं। 
कुल मिलाकर, नागलवाड़ी मंदिर एक प्राचीन और रहस्यमयी स्थान है जो अपनी चमत्कारी शक्तियों और भीलट देव से जुड़ी किंवदंतियों के कारण प्रसिद्ध है।  
नागलवाड़ी का इतिहास मुख्य रूप से प्रसिद्ध भीलट देव मंदिर से जुड़ा है, जो सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित है और नाग देवता के रूप में पूजे जाने वाले भीलट देव से संबंधित है; यह स्थान निमाड़ क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहाँ संतान प्राप्ति और अन्य मन्नतें पूरी होने की मान्यता है, और यह मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर बड़वानी जिले में स्थित एक दर्शनीय स्थान है, जहाँ हर साल नागपंचमी पर बड़ा मेला लगता है।  
मुख्य बिंदु: 
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व: नागलवाड़ी का इतिहास सदियों पुराना है, जो भीलट देव के चमत्कारों और उनसे जुड़ी लोककथाओं से जुड़ा है। 
 भीलट देव की कथा: भीलट देव का जन्म शिव-पार्वती के वरदान से हुआ था और वे नाग देवता के रूप में पूजे जाते हैं; उनके जन्म की कथा हरदा जिले के रोल हुथा गाँव से जुड़ी है। 
स्थान: यह मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला पर स्थित है, जो इसे एक सुंदर और दुर्गम स्थान बनाता है। 
मन्नतें और चमत्कार: निसंतान दंपत्ति यहाँ संतान प्राप्ति के लिए आते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं; यहाँ नाग देवता के रूप में भीलट देव की पूजा होती है। 
किन्नरों से जुड़ा रहस्य: एक मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के बाद किन्नर यहाँ नहीं रुकते, क्योंकि भीलट देव के आशीर्वाद से एक किन्नर गर्भवती हुई थी और फिर उसकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद यह मान्यता स्थापित हुई। 
पर्यटन और मेला: यह स्थान धार्मिक पर्यटन का केंद्र है और नागपंचमी के अवसर पर यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। 
संरक्षण: मंदिर की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट है जो भक्तों की सुविधाओं के लिए भोजनशाला और गौशाला का संचालन करता है। 
संक्षेप में, नागलवाड़ी सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि भीलट देव की लोककथाओं, चमत्कारों और गहरी आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण‌ धार्मिक और पर्यटन स्थल है।
भक्त निवास के कर्मचारियों द्वारा जो नाना प्रकार की जानकारी है मुझे दी गई थी उन सबको मैं अपने मोबाइल में ऑडियो टेप किया  ताकि में  बाद में अपने संस्करण यात्रा में बिंदुवार जानकारी दे सकूं उसी के अनुसार मैंने उपयोगी जानकारी तैयार करके आपको अपनी यात्रा वृतांत देना वाला हूं। अब शाम के लगभग चार बज चुके थे हम अपने वहां से पुनः अपने घर रवाना हुए। धार यहां से १३२ किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है। रास्ते में हम पुनः एक जगह अच्छे से रेस्टोरेंट देखकर गाड़ी को रोक वहां हमने चाय नाश्ता किया और सभी सदस्य सुविधा घर का लाभ लेते हुए अपने वाहन में आकर बैठे  और फिर हम पुनः आगे बढ़े।
रास्ते में शाम को ठीक ६:०० बजे ग्राम बगड़ी फाटे के पास ही एक होटल में हल्का स्ाा चाय नाश्ता किया और ठीक ६:३० बजे हम अपने घर पर पहुंच चुके थे। यहीं पर हमारी नांगलबाड़ी स्थित बाबा भिलट देव की यात्रा समाप्त हुई।
विजय शिंदे 

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