समसामयिक दृष्टिकोण से दीपावली
जो खुशी की भावनाओं से जुड़ा एक न्यूरोट्रांसमीटर है। इसके अतिरिक्त दीयों का प्रकाश शारीरिक और मानसिक रिलेक्सेशन देता है और एक आरामदायक वातावरण बना सकता है। घी के दीपकों का धुआँ और अगरबत्ती की सुगंध इस तरह के आयन्स को ख़त्म करती है, जो वातावरण में भारीपन उत्पन्न करते हैं। आज की तनावपूर्ण दुनिया में, प्रकाश और हल्केपन के ये स्रोत हमारे जीवन में मानसिक शक्ति और आशावाद को पोषित करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में हैं।

दीपावली एक ऐसे त्यौहार के रूप में मनाई जाती है जो अंधकार पर प्रकाश, अज्ञानता पर ज्ञान और गरीबी
पर समृद्धि की जीत का प्रतीक है। यद्यपि यह त्यौहार पुरातन काल से चली आ रही प्राचीन परंपराओं
और कथाओं में निहित रहा है, तथापि आधुनिक विज्ञान भी इस त्यौहार के महत्व और लाभों से अछूता
नहीं है। समकालीन दुनिया में, जहाँ स्वास्थ्य, स्थिरता और सामाजिक संबंधों को महत्व दिया जा रहा है,
दीपावली की प्रथाओं को आधुनिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है जो वैज्ञानिक लाभ और
सामाजिक मूल्यों दोनों से जुड़ा हुआ है। इनमें से कुछ पर चर्चा करते हैं,
दीप प्रज्ज्वलन और इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव
दीपक, मोमबत्तियों और अन्य बिजली के उपकरणों द्वारा रोशनी कर घरों को रोशन करना दीपावली के
प्रतिष्ठित रीति-रिवाजों में से एक है। आधुनिक विज्ञान ने भी यह ज्ञात किया है कि प्रकाश हमारे मूड,
भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रकाश के संपर्क में
आने से सेरोटोनिन का उत्पादन उत्तेजित होता है, जो खुशी की भावनाओं से जुड़ा एक न्यूरोट्रांसमीटर है।
इसके अतिरिक्त दीयों का प्रकाश शारीरिक और मानसिक रिलेक्सेशन देता है और एक आरामदायक
वातावरण बना सकता है। घी के दीपकों का धुआँ और अगरबत्ती की सुगंध इस तरह के आयन्स को ख़त्म
करती है, जो वातावरण में भारीपन उत्पन्न करते हैं। आज की तनावपूर्ण दुनिया में, प्रकाश और हल्केपन
के ये स्रोत हमारे जीवन में मानसिक शक्ति और आशावाद को पोषित करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप
में हैं।
सफाई करना और अव्यवस्था को दूर करना
दिवाली से पहले की एक प्रमुख परंपरा में घरों की अच्छी तरह से सफाई करना शामिल है, एक ऐसा कार्य
जिसे आधुनिक मनोविज्ञान मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताता है। घरों को व्यवस्थित करने से
तनाव कम होता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है और सकारात्मकता का अनुभव किया जा
सकता है। पर्यावरण मनोविज्ञान के अनुसार, एक साफ, व्यवस्थित स्थान मानसिक उत्तमता को बढ़ावा देता
है और चिंताओं को कम करता है, जिससे हम बेहतर बन पाते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि, घर की
सफाई और नवीनीकरण एक मानसिक "रीसेट" में सहायक है, जो वातावरण में महीनों से स्थिर ऊर्जा को मुक्त कर नए अनुभवों और विचारों का मार्ग प्रशस्त करती है।
सामाजिक बंधन और समुदाय में मेलजोल
दीपावली सामाजिक, पारिवारिक और सामुदायिक समारोहों का एक त्योहार है। आधुनिक विज्ञान यह
मानता है कि सामाजिक संबंध मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, तनाव को कम
करने और आतंरिक आनंद को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। जब हम प्रियजनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय
बिताते हैं तो ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन निकलता है, जो हमारी विश्वास और सहानुभूति की भावनाओं
को बढ़ावा देता है। ऐसे युग में जहाँ सामाजिक अलगाव अधिक आम हो गया है, दीपावली के रीति-रिवाज हमारे रिश्तों को पोषित करने के रूप में कार्य करते हैं। यह त्योहार फिर से जुड़ने और एकजुटता का एक अवसर प्रदान
करता है, जिसकी ज़रूरत है।
मनोवैज्ञानिक बेहतरी हेतु कृतज्ञता
दीपावली के अनुष्ठानों में समृद्धि और प्रचुरता के लिए प्रार्थना और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता सम्मिलित
होते हैं। आधुनिक मनोविज्ञान इस बात की पुष्टि करता है कि कृतज्ञता के विचारों से कई लाभ होते हैं,
जिसमें मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, तनाव में कमी और जीवन में संतुष्टि सम्मिलित हैं। कृतज्ञता व्यक्त
करने से लोगों को इस बात पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है कि उनके पास क्या
है, न कि उनके पास क्या कमी है, जिससे हम संतुष्टि और प्रचुरता की मानसिकता पैदा करते हैं।
अनुष्ठान और मानसिक स्वास्थ्य
दीपावली में दीये जलाने से लेकर पूजा करने तक अनुष्ठान किये जाते हैं। राजस्थान के उदयपुर सहर में
एक यज्ञ के दौरान किये गए शोध से ज्ञात हुआ कि उस समय वातावरण में लगभग एक किलोमीटर तक
वायु प्रदूषण में काफी कमी आई थी, अन्य शोध कार्यों से भी पता चलता है कि अनुष्ठान मस्तिष्क पर
उत्तम प्रभाव डालते हैं। मंत्र जाप मस्तिष्क के आनंद केंद्रों को सक्रिय करते हैं, डोपामाइन उत्पन्न करते हैं,
जो खुशी और संतुष्टि की भावनाओं में सहायक है। ये अनुष्ठान ग्राउंडिंग एक्सरसाइज़ के रूप में काम
करते हैं।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता
समकालीन दुनिया में, पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। बायोडिग्रेडेबल सजावट
और स्थानीय कारीगरों से खरीददारी कर हम पर्यावरण के प्रति जागरूक तरीके से दिवाली मना सकते हैं।
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का अर्थ पशु (गाय) सुरक्षा और पर्वतों के महत्व को ध्यान में लाना
है। पर्यावरण के अनुकूल उत्सव न केवल हमारे कार्बन फूटप्रिंट्स को कम करते हैं बल्कि सर्वे भवन्तु
सुखिनः के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं।
भोजन साझा करना
दीपावली में भोजन एक अभिन्न भूमिका निभाता है, जिसमें परिवार मिठाई और त्यौहारी भोजन तैयार
करने और साझा करने के लिए एक साथ आते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, खाना पकाना और खाना बाँटना
सामाजिक बंधन बनाने का एक शक्तिशाली तरीका है। दूसरों के लिए भोजन तैयार करने से ऑक्सीटोसिन
निकलता है, जिसे प्रेम हार्मोन के रूप में जाना जाता है, और जो रिश्तों को मजबूत करने और निकटता
की भावनाओं को बढ़ाने में मदद करता है।
माइंडफुलनेस और रिफ्लेक्शन
दीपावली के दौरान दीये जलाने और प्रार्थना करने की परंपरा भी माइंडफुलनेस और रिफ्लेक्शन के क्षणों
को उत्पन्न करती है। आधुनिक विज्ञान में, माइंडफुलनेस को तनाव कम करने, फोकस बढ़ाने और
भावनात्मक सुधार के लिए एक प्रभावी अभ्यास के रूप में मान्यता प्राप्त है। दीपावली की रस्में
माइंडफुलनेस के लिए स्वतः ही एक अवसर के रूप में हैं, जिससे हम अपने लोगों से जुड़ पाते हैं, पिछले
साल के बारे में सोच पाते हैं और भविष्य के लिए इरादे तय कर पाते हैं।
निष्कर्षत: दीपावली का त्यौहार सदियों से विकसित हुआ है, फिर भी इसका महत्व कालजयी बना हुआ है।
आधुनिक विज्ञान के नज़रिए से, दीपावली एक सांस्कृतिक उत्सव से कहीं अधिक है; यह एक समग्र अनुभव
है जो मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक बेहतरी का समर्थन करता है। मनोवैज्ञानिक लाभों से लेकर
पर्यावरण जागरूकता और कृतज्ञता के महत्व तक, दीपावली के रीति-रिवाज एक स्वस्थ, अधिक संतुलित
जीवन के लिए वैज्ञानिक रूप से उत्तम मार्ग प्रशस्त करते हैं। परंपरा को वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि के साथ
मिलाकर, हम इस त्यौहार को इस तरह से मना सकते हैं जो इसकी समृद्ध विरासत का सम्मान करे और
हमारे समकालीन जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करे।
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