जॉनर: क्राइम-थ्रिलर / पॉलिटिकल ड्रामा
अवधि: ९० मिनट । भाषा: हिंदी । सर्टिफिकेट: UA
लॉगलाइन:
जब एक ईमानदार KJA अफसर ३ करोड़ की रिश्वत मांगने वाले अपने ही सीनियर IPS से भिड़ता है, तो उसे पता चलता है कि असली लड़ाई फाइलों से नहीं, सिस्टम से है।
कहानी:
राजधानी शहर। केंद्रीय जांच एजेंसी KJA के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्मा को एक गुमनाम टिप मिलती है - तटीय प्रदेश में नकली दवा केस को बंद करवाने के लिए ३ करोड़ की डील हो रही है। डील करा रहा है क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर विक्रम राणा और पैसे लेगा BCAS का क्षेत्रीय निदेशक IPS अर्जुन मल्होत्राङ।
आदित्य के साथ है उसकी कॉलेज की दोस्त और तेज तर्रार क्राइम रिपोर्टर अद्विका शर्माङ। वो सच दिखाने के लिए कुछ भी कर सकती है। और है आदित्य का असिस्टेंट ङहवलदार पप्पू पांडे-डरपोक पर दिल का साफ।
KJA 8 जून को एयरोसिटी के एक होटल में जाल बिछाती है। विक्रम राणा और नकली दवा कारोबारी नरेश राव के सहयोगी राजन को 1.5 करोड़ के साथ रंगे हाथ पकड़ा जाता है। 90 लाख और बरामद होते हैं। पर मीडिया ब्रीफिंग में सिर्फ २ छोटे नाम। सबसे बड़े नाम - घ्झ्ए अर्जुन का नाम गायब।
सवाल उठता है। अगर ख्व्A को सब पता था तो इघ्R में नाम क्यों नहीं? अद्विका अपने शो ‘जनता का सवाल' में यही पूछती है। ऑटो ड्राइवर से लेकर रिटायर्ड जज तक - सब एक ही सवाल करते हैं: ‘बड़े लोग बच क्यों जाते हैं?'
INTERVAL POINT:
आधी रात को आदित्य को अर्जुन का फोन आता है। धमकी। ‘फाइल बंद करो, वरना तुम्हारे परिवार की जांच होगी'। उसी रात अद्विका को भी धमकी भरा मैसेज। लगता है सिस्टम बहुत ऊपर तक गया है।
INTERVAL के बाद:
आदित्य टूटने के बजाय और मजबूत होता है। 'वर्दी का कर्ज' गाने के साथ वो रात-रात भर फाइलें खंगालता है। उसे लगता है केस कमजोर है,सबूत मिट चुके हैं।
प्री-क्लाइमेक्स ट्विस्ट:
हवलदार पप्पू को BCAS ए के कचरे से एक टूटी हुई CCTV हार्ड डिस्क मिलती है। उसमें १४ मई का वीडियो है-जिसमें अर्जुन खुद नरेश से ३ करोड़ मांग रहा है। ‘फाइल बंद करवा दूंगा'। ये आखिरी और पक्का सबूत है।
आदित्य, अद्विका और KJA की टीम रात में BCAS ऑफिस पर रेड करती है। अर्जुन भागने की कोशिश करता है। बिल्डिंग की छत पर आदित्य अर्जुन की हाथापाई होती है। बारिश में। अर्जुन: ‘तुम सिस्टम नहीं बदल सकते'। आदित्य: ‘सिस्टम हमसे ही बनता है सर'। अर्जुन गिरफ्तार।
CLIMAX - कोर्टरूम:
१५ दिन बाद। कोर्ट में वही ण्ण्ऊन्न् वीडियो चलता है। अर्जुन की सारी दलीलें धरी रह जाती हैं। उसे १४ दिन की रिमांड।
ENDING:
कोर्ट से बाहर आदित्य से मीडिया पूछती है `सर प्रमोशन?'
आदित्य: `प्रमोशन नहीं। इंसाफ हुआ। यही सबसे बड़ा प्रमोशन है'
आखिरी शॉट: आदित्य अपने पिता की फोटो को सलाम करता है। स्क्रीन पर लाइन: `वर्दी रुतबा नहीं, जिम्मेदारी है'
THE END
विजय शिंदे