नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति सम्मान
यह संस्मरण भारतीय वायु सेना में चयन के बाद बेंगलुरु प्रशिक्षण केंद्र की यात्रा से जुड़ी एक रोचक घटना प्रस्तुत करता है। आम काटने के लिए साथ रखे चाकू के कारण हुई सुरक्षा जाँच के दौरान सूटकेस में रखे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र ने पूरे माहौल को बदल दिया। यह प्रसंग नेताजी के प्रति देशवासियों के गहरे सम्मान, देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को भावपूर्ण ढंग से सामने लाता है।
यह घटना लगभग २९ वर्ष पुरानी है। जुलाई माह के अंतिम दिनों में भारतीय वायु सेना के तकनीकी विभाग में मेरा चयन हुआ था। चयन के बाद प्रशिक्षण के लिए मुझे बंगलुरु जाना था।
नई दिल्ली स्थित चयन केंद्र से चयनित सभी अभ्यर्थियों को बंगलुरु जाने वाली रेलगाड़ी में बैठा दिया गया। हमारी सीटें पहले से ही आरक्षित थीं। मेरे एक चाचाजी का आम का बाग था। उन्होंने रास्ते में खाने के लिए मुझे बहुत सारे आम दिए थे। यात्रा के दौरान हम सभी साथियों ने उन आमों का भरपूर आनंद लिया। रास्ते भर हो रही वर्षा ने यात्रा को और भी सुहावना बना दिया था।
दो दिन और दो रात की लंबी यात्रा के बाद हम दोपहर में बंगलुरु पहुँचे। वहाँ भारतीय वायु सेना की एक गाड़ी पहले से ही हमें लेने के लिए खड़ी थी। उसमें बैठकर हम सभी प्रशिक्षण केंद्र के मुख्य द्वार तक पहुँचे।
मुख्य द्वार पर हमारे दस्तावेज़ों और सामान की जाँच होनी थी। मेरी बारी आने पर एक अधिकारी ने मेरा नाम और शहर पूछा। फिर उन्होंने पूछा, ठक्या आपके पास कोई चाकू या ऐसा कोई सामान है?
मैंने सहजता से उत्तर दिया, ठजी हाँ, एक चाकू है।
मैंने तुरंत वह चाकू उन्हें सौंप दिया। चाकू देखते ही वहाँ मौजूद सभी अधिकारी मुझे संदेह की दृष्टि से देखने लगे। कुछ ही क्षणों में एक वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया गया। उन्होंने मुझसे पूछा, ठयह चाकू किसलिए लाए हो?
मैंने मुस्कुराकर उत्तर दिया, ठसर, आम काटने के लिए।
मेरे साथियों ने भी बताया कि मैं रास्ते में खाने के लिए काफी सारे आम साथ लाया था। इसके बाद भी अधिकारियों का संदेह पूरी तरह दूर नहीं हुआ। मेरे दोनों बैगों की बड़ी बारीकी से जाँच की गई।
अब केवल कपड़े रखने वाला मेरा सूटकेस ही बचा था।
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जैसे ही सूटकेस खोला गया, वहाँ उपस्थित लगभग सभी लोगों के मुँह से एक साथ निकला-ठबहुत बढ़िया!... बहुत शानदार!ठ
निरीक्षण कक्ष का पूरा वातावरण एकदम बदल गया।
मेरे सूटकेस में सबसे ऊपर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का एक बड़ा चित्र रखा था। उस चित्र में नेताजी घोड़े पर सवार होकर हमारे प्यारे तिरंगे को सलामी दे रहे थे। चित्र देखते ही सभी अधिकारियों ने मेरी खुलकर प्रशंसा की। सूटकेस की जाँच तो पूरी की गई, किंतु अब मेरे प्रति संदेह का भाव पूरी तरह समाप्त हो चुका था।
उस दिन मुझे पहली बार गहराई से यह अनुभव हुआ कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति देशवासियों के मन में कितना गहरा सम्मान और श्रद्धा है। उनका व्यक्तित्व आज भी लोगों के हृदय में उसी आदर के साथ जीवित है और उनका नाम सुनते ही मन स्वतः गर्व से भर उठता है।
जय भगवान
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