प्रणय दिवस पर विशेष आलेख “जीवन की सर्वोत्तम युक्ति है — प्रेम”

यह लेख प्रेम की महत्ता, उसकी पवित्रता और जीवन में उसकी आवश्यकता को दर्शाता है। प्रेम को ईश्वर का स्वरूप बताते हुए इसमें विश्वास, त्याग, समर्पण और निःस्वार्थ भावना को सच्चे प्रेम का आधार माना गया है। लेख में बताया गया है कि प्रेम जीवन को आनंद, शांति और सकारात्मकता से भर देता है तथा मनुष्य को मानवता, सह-अस्तित्व और आत्मिक सुख की ओर प्रेरित करता है।

May 23, 2026 - 13:09
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प्रणय दिवस पर विशेष आलेख “जीवन की सर्वोत्तम युक्ति है — प्रेम”
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प्रेम,दुनिया का सबसे खूबसूरत एवं अनमोल उपहार है और हमारे अंतर्मन की खूबसूरत अभिव्यक्ति भी।जहां प्रेम है वहीं ईश्वर है।अपरिपक्व प्रेम कहता है- मैं तुमसे प्यार करता हूं क्योंकि मुझे तुम्हारी जरुरत है।परिपक्व प्रेम कहता है- मुझे तुम्हारी जरुरत है क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूं।प्यार तब है जब दूसरे व्यक्ति की खुशी आपकी खुशी से कही अधिक महत्वपूर्ण होती है। प्रेम के रस में डूबो तो ऐसे कि जब सुबह तुम जागो तो प्रेम का एक और दिन पा जाने का अहसान मानो और फिर रात में जब तुम सोने जाओ तो तुम्हारे दिल में अपने प्रियतम के लिए प्रार्थना हो और होठों पर उसकी खुशी के लिए गीत।

प्रेम की पहली शुरुआत है, खूबसूरत मुस्कान
प्रेम किसी पर अधिकार नहीं जताता, न ही किसी के अधिकार को स्वीकार करता है। प्रेम के लिए तो प्रेम का होना ही बहुत है। हमेशा एक-दूसरे से मुस्कुराकर मिलो क्योंकि खूबसूरत मुस्कान ही प्रेम की पहली शुरुआत है। प्रेम आंखों से शुरू होकर दिल में चुपचाप उतर जाता है और फिर अंतस में बस जाता है। जो सचमुच प्रेम करता है उस मनुष्य का ह्रदय धरती पर साक्षात स्वर्ग है। ईश्वर उस मनुष्य में बसता है क्योंकि ईश्वर ही प्रेम है। धरती से युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता है और वह है प्रेम। प्रेम में डूबकर सब कुछ भूल जाओ। 

प्रेम,सफलता की कुंजी है 
प्रेम हमें हमारी मनचाही मंजिल की ओर अग्रसर करता है और उन्नति के सारे दरवाजें भी खोल देता है। प्रेम वह चाबी है जो दिल की तिजौरी का ताला पल भर में खोल देता है। प्रेम हमें उन्नति और सन्मति के मार्ग की ओर ले जाता है , प्रेम हमें साथ मिलकर जीना सिखाता है, प्रेम हमें त्याग,तपस्या,समर्पण और निःस्वार्थ भाव सिखाता है और प्रेम दिलों के मध्य की दूरियां भी मिटाता है। कण-कण में प्रेम व्याप्त है...बस उसे महसूस करने की जरूरत है। प्रकृति,प्रेम की सर्वोत्कृष्ट अभिव्यक्ति है।प्रेम करना सीखना है तो प्रकृति से सीखो क्योंकि प्रकृति का काम है सिर्फ देना ही देना,बदले में वह कुछ लेती नहीं है।प्रकृति अपना सब कुछ हम पर निछावर कर देती है।प्रेम अंतरात्मा की आवाज है। जहां त्याग,तपस्या और समर्पण है प्रेम भी वहीं विद्यमान है । 
प्रेम जीवन जीने की कला भी सिखाता है 
जीवन एक उत्सव है तो प्रेम बेइंतहा खुशियों का इज़हार है। प्रेम हमें निराशा के अंधेरों से बाहर निकालकर उजालों की ओर ले जाता है। प्रेम हमें तन्हाइयों में भी तन्हा नहीं होने देता है। जिजीविषा का दूसरा नाम ही है प्रेम। प्रेम,सच का वो आईना है जो झूठ को बेनकाब करता है और हमें हमारी असली सूरत का दीदार कराता है। जहां सच है वहीं प्रेम है और प्रेम में झूठ,धोखा,बेमानी और फरेब का कोई स्थान नहीं है । 

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प्रेम की प्रथम सीढ़ी है विश्वास
विश्वास की डोर के सहारे ही प्रेम रूपी पतंग उन्मुक्त गगन में हौसलों से उड़ान भरती है । एक-दूसरे पर भरोसा करना सफल प्रेम की पहली सीढ़ी है। जहां भरोसा है वही निश्छल प्रेम है। निःस्वार्थ प्रेम सफलता की दूसरी सीढ़ी है। प्रेम देता ही है लेता कुछ नहीं है। परमाणु बम से भी बड़ी शक्ति है प्रेम। जो काम अणुबम नहीं कर सकते वह काम चुटकी में कर दिखाता है प्रेम। वैश्विक महामारी और विश्व युद्ध के इस दौर में आज जिस चीज की सबसे अधिक आवश्यकता है तो वह है प्रेम।बड़ी से बड़ी लड़ाई तलवार के बल पर नहीं अपितु प्रेम के माध्यम से जीती जा सकती है।युद्ध तो विनाश का सूचक है तो प्रेम हमारे बीच की सारी नफरतों को मिटाकर हमें सही अर्थों में जीवन जीने की कला सिखाता है ।

प्रेम आत्मा से होता है शरीर से नहीं
कहते हैं कि प्रेम और जंग में सब जायज है लेकिन जहां प्रेम है वहां जंग का कोई स्थान नहीं है । प्रेम को न ही धन से खरीदा जा सकता है और न ही शक्ति,सामर्थ्य से । प्रेम ही जीवन है। प्रेम सूर्य के समान है, जितना फैलेगा, उतना प्रकाश बढ़ता ही जाएगा। प्रेम बलिदान सिखाता है, हिसाब नहीं। प्रेम मस्तिष्क को नहीं हृदय को छूता है। प्रेम आत्मा से होता है शरीर से नहीं। प्रेम, थकान और द्वंद्व को मिटाता है तथा जीवन की वाटिका में सुगंध रूपी सुंदर पुष्प खिलाता है। प्रेम ही शांति है, प्रेम ही सुख और आनंद की विलक्षण अनुभूति है। बुरा कुछ नहीं है, संसार को हम जिस दृष्टि से देखेंगे, वह वैसा ही नजर आएगा, जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि । संसार में राग भी है और द्वेष भी है।अवगुण पर हम प्रेम से ही विजय पा सकते हैं। द्वंद्व के घोर अंधकार को हम प्रेम के दीप जलाकर दूर करें ।

प्रेम ही जीवन की सर्वोत्तम युक्ति है
चिंताएं छोड़कर सुख और आनंद से जियो क्योंकि चिंताएं , चिता समान होती है।जीवन को एक उत्सव की तरह जिएं। नफरत को भूल कर प्रेम में डूब जाओ, प्राणीमात्र से प्रेम करो, क्योंकि प्रेम ही शक्ति है, प्रेम ही भक्ति है और प्रेम ही जीवन की सर्वोत्तम युक्ति है। यानि प्रेम हर मुश्किल समस्या का एक सरल समाधान है।जहां प्रेम है वहां अलौकिक शक्तियाँ विद्यमान है। जहां प्रेम है वहीं जीत है।जहां प्रेम है वहीं जीवन का माधुर्य संगीत है। जहां प्रेम है वहां मन का मीत है ।जहां प्रेम है वहां केवल आनंद है...मस्ती है..उल्लास है...उमंग है...उत्सव है । प्रेम हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाता है और जीवन जीने का अर्थ समझाता है।प्रेम तन्हाइयों में भी हमारे साथ रहता है और हमें कभी उदास होने नहीं देता है । जीवन पुष्प है तो प्रेम उसका मधु।प्रेम,दुनिया का सबसे अधिक खूबसूरत एहसास हैं,जिसे खुदा ने हमें तोहफे में अता किया है।

प्रेम है एक अग्निपरीक्षा, इस पर चलकर तो देखो,
गहरा है यह दरिया, इसमें उतर कर तो देखो ।
प्रेम का है रंग गहरा, इसमें तुम घुल कर तो देखो
जान लोगे माँ यशोदा, खुद कान्हा बनकर तो देखो।

नलिन खोईवाल

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