सावन का सांस्कृतिक महत्व
यह लेख सावन यानी श्रावण मास के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत करता है। इसमें मानसून, प्रकृति और कृषि चक्र से सावन के संबंध, हरियाली तीज, कजरी तीज और रक्षाबंधन जैसे पर्वों, कांवड़ यात्रा, व्रत-परंपराओं तथा शिव-पार्वती की कथाओं का वर्णन किया गया है। लेख सावन को प्रकृति, भक्ति, पारिवारिक संबंधों, लोकगीतों और सामाजिक समरसता के सुंदर संगम के रूप में प्रस्तुत करता है।
सावन ( श्रावण) का महीना भारतीय संस्कृति में प्रकृति के अटूट सामुदायिक एकता एवं आध्यात्मिक संस्कृति का प्रतीक है, मानसून की आगमन से जुड़ी यह रितु चिलचिलाती गर्मी से राहत और जीवन दाहिनी हरियाली प्रदान करती है।
सावन के सांस्कृतिक महत्व निम्नलिखित है
१. प्रकृति के साथ जुड़ाव-सावन का महीना मानसून की फुहार और कृषि चक्र की शुरुआत का समय होता है सावन के इस महीने में पारंपरिक गीत सावन के झूले हरे भरे कपड़े वह श्रृंगार करके कई प्रकार के उत्सव मनाए जाते हैं।
२. महिला सशक्तिकरण एवं उल्लास-सावन के महीने में हरियाली तीज एवं कजरी तीज जैसे पारंपरिक त्योहार आते हैं विवाहित महिला मायके जाकर मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक लोक नृत्य एवं गीत गान करती हैं।
३. सामुदायिक एवं पारिवारिक जुड़ाव-भाई बहन की अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन त्यौहार भी श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है यह त्योहार परिवार को एकजुट रखने का कार्य करता है।
४. भक्ति और सामाजिक समरसता-सावन में होने वाली कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा ही नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न कोणों से आए सभी जाति के लोगों को एक साथ जोड़ती है।
५. स्वास्थ्य और संयम-चातुर्मास का हिस्सा होने के कारण इस माह में सावन की सोमवार और मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है किया जाता है संस्कृत दृष्टिकोण से यह मौसम में बदलाव आने के कारण शरीर को स्वस्थ रखने का एक बहुत ही सही तरीका है।
६. सावन के कुछ लोकप्रिय छंद इस प्रकार है,
७. (बरसा सावन जोर जोर से , हिय में उठी हिलोर,
(पैरों की पाजेब से, नाचे मन का मोर)
८. (आया सावन मास है-लेकर प्रेम बाहर, भोले बाबा प्रेम से करते सबका बेड़ा पार)
९. सवैया छंद मल्हार और हरियाली- (बागों में झूला पड़े सजनी सब गाते मेघ मल्हार यहां, हरियाली चारो ओर सजी बरसे मेघ मल्हार यहां, चमकी बिजली घनघोर घटा, बरसे जल की अति धार यहां, शिव की नगरी सब झूम रही, बरसे प्रभु का प्यार यहां।
१०. सावन के महीने में माता पार्वती और महादेव शिव की कथा का महत्व-सावन के महीने में माता पार्वती और शिवजी की कथा उनके पुनर्मिलन और अटूट प्रेम को दर्शाती है, देवी सती द्वारा यज्ञ में प्राण त्यागने के बाद उन्होंने हिमालय के घर देवी पार्वती के रूप में जन्म लिया शिवजी को पुनसहपति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने सावन के महीने में कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर सावन की शुक्ल पक्ष की तृतीया (हरियाली तीज) माता पार्वती एवं शिव जी का पुनर्मिलन हुआ।
११. माता पार्वती की कठोर तपस्या और विवाह-पुराने के अनुसार देवी सती के जाने के बाद भगवान शिव तपस्या में लीन हो गए हिमालय पुत्री माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पानी के लिए अन्य जल त्याग कर कठोर तपस्या की उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने सावन के महीने में ही देवी पार्वती की परीक्षा ली और बाद में प्रसन्न होकर माता पार्वती को स्वीकार कर लिया शिवरात्रि के दिन ही माता पार्वती और महादेव का विवाह संपन्न हुआ था।
१२. शिव पार्वती संवाद और सावन का महत्व-सावन का महीना भगवान शिव को सबसे ज्यादा अत्यधिक प्रिय है एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने धरती पर इंसानों को सावन के महीने में दूध और जल शिवलिंग पर अर्पित करते हुए देखा जब शिवजी ने उन्हें बताया कि सावन का महीना प्रकृति और भक्ति का अदभुत मिलन है, जो भक्त सच्ची श्रद्धा से इस माह में उनकी पूजा आराधना करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
१३. माता पार्वती और महादेव जी की हास्य में लीलाएं प्रकृति और दुनिया की सीख-शिव पुराण एवं अन्य कथाओं में माता पार्वती और महादेव की लीलाओं का बहुत अद्भुत वर्णन है एक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती और भोलेनाथ नदी पर सवार होकर कहीं जा रहे थे रास्ते में लोगों ने उन्हें ताना मारा कि इतने सक्षम होकर भी दोनों बल पर सवार होकर जा रहे हैं, और बैल को कष्ट दे रहे हैं इस बात पर भोलेनाथ और माता पार्वती पैदल चलने लगे पर लोगों ने फिर भी उनकी हंसी उड़ाई तब शिव जी ने पार्वती को समझाया कि इस संसार में बिना लोगों की बातों की परवाह किए बिना केवल ईश्वर की सच्ची भक्ति और अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
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१४. सावन में व्रत कथा का महत्व-सावन की सोमवार की कई व्रत कथाएं हैं जिसमें भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का वर्णन है जो भक्त सच्चे मन से ईश्वर की पूजा करता है अच्छे कर्म करता है ईश्वर मार्ग पर चलता है ईश्वर उसकी सदैव रक्षा करते हैं शिव पुराण में बताया गया है कि सावन के महीने पर बेलपत्र और शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
१५. माता पार्वती और भगवान शिव की इन आलोक- की कथाओं से यह ज्ञान मिलता है कि सच्चा प्रेम भक्ति वैराग्य और त्याग कठिन परिस्थिति में से भी इंसान को पार करने की शक्ति रखती है। इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि सावन में बहुत सारी ऐसी चीज हैं जिनका बहुत सांस्कृतिक महत्व है सावन का महीना एक ऐसा महीना है जो मारा महीने में से सबसे अधिक लोकप्रिय महीना है जिसमें तीज त्यौहार व्रत सभी कुछ आता है।
१६. सावन का भजन- देखो देखो रे सखी कैसी धूम है मची आया सावन का मेला इस मेले में गणपति जी आए साथ में अपने रिद्धि सिद्धि भी लाए कोई ना आया अकेला देखो आया सावन अलबेला, इस मेले में ब्रह्मा जी आए साथ में अपने ब्राह्मणी लाए कोई ना आया अकेला देखो आया सावन अलबेला, इस मेले में विष्णु जी आए साथ में अपने लक्ष्मी जी को लाए कोई ना आया अकेला देखो आया सावन अलबेला, इस मेले में शिवजी आए साथ में माता पार्वती को लाए कोई ना आया अकेला देखो आया सावन का माह अलबेला।
रूपाली वशिष्ठ
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