यह रिश्ता क्या कहता है?
यह लेख जीवन में रिश्तों के महत्व को सरल और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें माँ, पिता, भाई, बहन, दादा-दादी और अन्य पारिवारिक रिश्तों की विशेषता और उनके प्रेम, त्याग और अपनापन को सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। यह बताता है कि हर रिश्ता बिना शब्दों के भी बहुत कुछ कहता है।
रिश्ते – इन दो अक्षरों में पूरा जीवन समाया है। खून का रिश्ता हो या मन का – हर रिश्ता कुछ अलग कहता है, कुछ अलग सिखाता है।
`यह रिश्ता क्या कहता है?' – यह सवाल कभी हम माँ को देखकर पूछते हैं, कभी पिता को देखकर, कभी भाई से झगड़ते हैं, तो कभी बहन के साथ नटखटपन करते हैं। लेकिन जब हर रिश्ते के पीछे छिपी भावना को समझ लेते हैं, तब इस सवाल का जवाब अपने आप मिल जाता है।
माँ – प्रेम का पहला अर्थ
माँ वह रिश्ता है जो हमें जन्म देती है, पर उससे भी बढ़कर– वह हमेशा हमारी परछाई
बनकर साथ खड़ी रहती है।
उसके स्पर्श में ममता है, उसकी आँखों में चिंता है, और उसके शब्दों में आशीर्वाद।
पिता – मौन सहारा, मजबूती का पर्वत
पिता का रिश्ता कभी डाँटने वाला, कभी चुप रहने वाला, पर भीतर से पूरी तरह प्यार से भरा होता है।
वे बहुत कुछ नहीं कहते, लेकिन उनके परिश्रम और त्याग में उनके प्रेम की गहराई दिखती है।
यह रिश्ता कहता है – 'मैं हूँ, निश्चिंत रहो!'
भाई – झगड़ों में छिपा अपनापन
भाई के साथ झगड़े तो होते ही हैं, पर वही हर मुश्किल में हमारे साथ खड़ा रहता है।
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यह रिश्ता कहता है – 'तेरे लिए किसी से भी लड़ जाऊँगा!'
बहन – छोटी सी प्यारी दुनिया
बहन का रिश्ता हँसी, खेल, मीठी तकरार और मन की बातों का संगम है।
वह छोटी हो या बड़ी, उसका प्यार कभी कम नहीं होता।
मौसी – दूसरी माँ जैसी
मौसी का रिश्ता माँ जैसा ही स्नेह देने वाला होता है।
उसके घर में भी हमें अपना घर-सा अपनापन महसूस होता है।
यह रिश्ता कहता है – `तू यहाँ भी मेरा ही है।'
चाचा-चाची – स्नेह और मार्गदर्शन का संगम
चाचा पिता जैसे सहारा देने वाले और चाची माँ जैसी देखभाल करने वाली।
उनका रिश्ता कहता है – 'तू हमारे दिल का टुकड़ा है।'
मामा-मामी – प्यार और लाड़ का घर
मामा-मामी का रिश्ता बचपन की छुट्टियों, गाँव की मस्ती और ढेर सारे लाड़ से जुड़ा है।
यह रिश्ता कहता है – `तेरा जन्म हमारे जीवन की खुशी है।'
दादी – कहानियों और संस्कारों का खजाना
दादी का रिश्ता मिठास भरा, संस्कारों से लबालब और प्रेम से सराबोर होता है।
उनकी हर बात हमारे दिल में गहराई से उतर जाती है।
दादा – अनुभव और स्नेह का खजाना
दादा का रिश्ता शांत, गम्भीर और ज्ञान से भरा होता है।
उनकी कहानियों में इतिहास है, शिक्षा है, और प्यार की गर्माहट है।
अंत में...
हर रिश्ते की अपनी एक खासियत होती है –
वे हमसे कुछ नहीं माँगते, पर बहुत कुछ देकर जाते हैं।
हर रिश्ता हमें कुछ न कुछ सिखाता है, कुछ न कुछ महसूस कराता है...
इसीलिए बार-बार मन पूछता है –
`यह रिश्ता क्या कहता है?'
`रिश्ता तो रिश्ता होता है –
उसे शब्दों की ज़रूरत नहीं होती,
वह आँखों से, स्पर्श से और प्रेम से व्यक्त होता है!'
श्वेता डांगे
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