वीर सैनिक
कलाई पर सजी राखी बहन की है कहती भैया फिर आना तू घर पर सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
कृपा कर भारती मां आज मुझ पर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
कलाई पर सजी राखी बहन की
है कहती भैया फिर आना तू घर पर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
लगा भाई है रूठा आज मुझसे
गिरा जब मुझसे मेरा हाथ कटकर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
कलेजे के कई टुकड़े हुए जब
विदा मां ने किया था मुझको हंसकर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
लगा मेरी है ये अंतिम विदाई
पिता ने बाहों में जकड़ा जो कसकर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
क्षमा करना मुझे ऐ मातृभूमि
नहीं कर पाया सेवा तेरी जी भर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
बदन था छलनी थी घायल कलाई
तिरंगा फिर भी लहराया गगन पर
सुला मुझको तू लोरी आज गाकर
सुधाकर मिश्र "सरस"
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