हाइकु
टूट रहा था घर और मकान माँ के मरते
टूट रहा था
घर और मकान
माँ के मरते
मौन है प्रेम
हवा और पेड़-सा
प्राणधार भी
हम बैठे हैं
चलता है अचल
जैसे पवन
दीपा गेरा
कानपूर, उत्तर प्रदेश
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