सरदार मैंने आपका नमक खाया है... (नमक का इतिहास और कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य)
नमक केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, व्यापार, स्वास्थ्य, धर्म, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा रहा है। साल्जबर्ग के नाम से लेकर प्राचीन सभ्यताओं, रोमन सैनिकों की कथित ‘सैलरी’, नमक मार्गों, भारत में नमक उत्पादन और गांधीजी के नमक सत्याग्रह तक इसकी अहमियत दिखाई देती है। लेख में नमक के ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, स्वास्थ्य संबंधी और पाक महत्व के साथ-साथ इसके विभिन्न प्रकारों और हिंदी मुहावरों में इसके इस्तेमाल पर भी रोचक जानकारी दी गई है।
शोले फिल्म का वह संवाद जरूर याद होगा, जब गब्बर को सांभा याद दिलाता है कि, ठसरदार, मैंने आपका नमक खाया है।ठ इस संवाद की अहमियत इस बात से है कि एक आदमी सबसे मुश्किल समय में अपनी जान बचाने के लिए नमक की याद दिलाता है।
हजारों साल पहले अपनी खोज के बाद से, नमक ने मानव जीवन को गहराई से प्रभावित किया है, न केवल भोजन के उपभोग और संरक्षण में, बल्कि मानवीय, आर्थिक, पौराणिक और धार्मिक क्षेत्रों में भी। नमक एक अत्यंत मूल्यवान विनिमय वस्तु थी, इतनी कि ठनमक मार्गठ अस्तित्व में आए, जिनके माध्यम से व्यापारी इसे उन देशों में ले जाते और बेचते थे, जहाँ इसका उत्पादन नहीं होता था।
अब आप पूछ सकते हैं कि अचानक नमक की याद क्यों और कैसे आ गयी, तो हुआ यूँ कि कुछ दिन पहले यूरोप यात्रा के दौरान हम लोग ऑस्ट्रिया देश के एक मशहूर शहर साल्जबर्ग गए थे और इस शहर का नाम ही नमक के ऊपर पड़ा है। जर्मन भाषा में साल्ज का मतलब होता है नमक और बर्ग का मतलब होता है किला, यानी नमक का किला। इस स्थान की समृद्धि का कारण नमक का व्यापार ही है। यहाँ एक म्यूजियम में नमक के इतिहास को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया था। इससे नमक के बारे में और विस्तार से जानने की जिज्ञासा हुई और फिर खोजबीन का सिलसिला शुरू हुआ और इस जानकारी को आपके साथ साझा कर रहा हूँ, जो आपको भी रोचक लगेगी।
अधिकांश प्राचीन सभ्यताओं में नमक से जुड़े मिथक, धार्मिक और जादुई अनुष्ठान प्रचलित थे। इसके लिए यहूदी लोगों का इतिहास या पुराने नियम की कुछ पुस्तकों की सामग्री ही पर्याप्त है। प्राचीन यहूदियों के लिए नमक एक मेज के चारों ओर इकट्ठा होने की खुशी का प्रतीक बन गया था, इसलिए एक साथ भोजन करना भाईचारे के प्रेम में रहने का प्रतीक था।
नमक का इतिहास ईसा पूर्व ६०५० वर्ष तक पुराना है। मिस्र में नमक का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में और ममी को संरक्षित करने के लिए किया जाता था। यह फोनीशियन और उनके भूमध्यसागरीय साम्राज्य के बीच व्यापार की एक मूल्यवान वस्तु थी। लगभग २७०० ईसा पूर्व चीन में प्रकाशित औषधि विज्ञान पर सबसे पहले ज्ञात अध्ययन में ४० से अधिक प्रकार के नमक का उल्लेख है और नमक निकालने की दो विधियों का वर्णन किया गया है, जो आज उपयोग की जाने वाली प्रक्रियाओं के समान हैं।
मध्यकालीन यूरोपीय अभिलेखों में नमक उत्पादन के लिए दी गई रियायतों का दस्तावेजीकरण मिलता है। महाद्वीपीय यूरोप में, वेनिस ने नमक के एकाधिकार के बल पर आर्थिक समृद्धि प्राप्त की। नमक के उत्पादन और परिवहन से नए शहरों का विकास हुआ और सड़कों का निर्माण भी हुआ।
नमक की अहमियत के बारे में एक और तथ्य जानना दिलचस्प रहेगा कि रोजमर्रा में उपयोग होने वाला शब्द 'सेलरी' (Salary) की उत्पत्ति 'नमक' से हुई है। प्राचीन रोम में नमक बहुत कीमती होता था। लेकिन सैनिकों को अपना भोजन सुरक्षित रखने के लिए नमक की आवश्यकता होती थी, इसलिए उन्हें वेतन या भत्ते के रूप में नमक दिया जाता था। इसे लैटिन भाषा में 'सलारियम' (Salarium) कहा जाता था। समय के साथ यह शब्द बदलकर अंग्रेजी में 'सैलरी' हो गया। रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर ने अपनी पुस्तक ‘नेचुरल हिस्ट्री (Natural History)’ में लिखा है कि प्राचीन रोम में सैनिकों को उनके काम के बदले नमक दिया जाता था। इसी परंपरा से सैलरी शब्द की शुरुआत मानी जाती है। कई अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि Soldier शब्द लैटिन भाषा के Sal Dare से जुड़ा माना जाता है, जिसका मतलब नमक देना बताया गया है।
कुछ फ्रांसीसी इतिहासकारों का मानना है कि वेतन देने की परंपरा १०,००० ईसा पूर्व से ६,००० ईसा पूर्व के बीच शुरू हुई थी। हालांकि प्राचीन रोम में सैनिकों को लंबे समय तक भुगतान के रूप में नमक दिए जाने का उल्लेख मिलता है। उस दौर में नमक का व्यापार भी होता था और इसकी कीमत काफी ज्यादा थी। इसलिए इसे भुगतान के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बाद में जैसे-जैसे मुद्रा का प्रचलन बढ़ा, नमक की जगह सिक्कों और फिर नकद भुगतान ने ले ली, लेकिन सैलरी शब्द आज भी उसी ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है।
विभिन्न प्रकार के लवणों, उनके उपयोगों और उन्हें निकालने की विधियों का सबसे पहला व्यवस्थित विवरण लगभग २७०० ईसा पूर्व चीन में प्रकाशित हुआ था। हिप्पोक्रेट्स ने अपने साथी चिकित्सकों को अपने रोगियों को समुद्री जल में डुबोकर विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए खारे पानी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्राचीन यूनानियों ने इसे जारी रखा और १७५३ में, अंग्रेजी लेखक और चिकित्सक रिचर्ड रसेल ने 'द यूज़ेज़ ऑफ़ सी वॉटर' प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि नमक ठशरीरों के क्षय के खिलाफ एक सामान्य रक्षाठ है और ठसभी उपचारों में बहुत योगदान देता है।ठ
नए नियम में भी नमक को अपना स्थान मिला है, जो अनेक उपमाओं और दृष्टांतों में ज्ञान, अविनाशिता, शाश्वतता और ईश्वर एवं मनुष्य के बीच संबंध के प्रतीक के रूप में मौजूद है। रोम में, यीशु के जन्म के आठवें दिन, दुष्ट आत्माओं और राक्षसों को दूर रखने के लिए शिशु पर नमक का एक टुकड़ा मला गया था। सुसमाचार में, यीशु अपने शिष्यों को ठपृथ्वी का नमकठ बनने की सलाह देते हैं, अर्थात् एक ऐसी शक्ति बनने की, जो मनुष्यों को पाप के भ्रष्टाचार से बचा सके।
नमक, जिसे टेबल सॉल्ट या इसके रासायनिक सूत्र र्aण्त् (सोडियम क्लोराइड) से भी जाना जाता है, जो सोडियम और क्लोराइड आयनों से बना एक आयनिक यौगिक है। सभी जीव-जंतु जीवित रहने के लिए इसके रासायनिक गुणों पर निर्भर करते हैं। मनुष्य हजारों वर्षों से इसका उपयोग भोजन संरक्षण से लेकर मसाले के रूप में करते आ रहे हैं। भोजन को संरक्षित करने की नमक की क्षमता सभ्यता के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। इसने भोजन की मौसमी उपलब्धता पर निर्भरता को समाप्त करने में मदद की और भोजन को लंबी दूरी तक ले जाना संभव बनाया।
नमक की महत्ता स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बहुत है। पसीने में प्रति लीटर २.२५ से ३.४ ग्राम नमक होता है। गर्म दिन में लगातार परिश्रम करने पर पसीने की औसत मात्रा आसानी से १ लीटर प्रति घंटा हो सकती है। हमारे शरीर को प्रति ४० किलो वजन के लिए लगभग १०० ग्राम नमक की आवश्यकता होती है। कोशिकाओं के भीतर और मस्तिष्क से आने-जाने वाले सभी संकेतों के संचालन में सोडियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पसीने में प्रति लीटर २.२५ से ३.४ ग्राम नमक होता है। गर्म दिन में लगातार परिश्रम करने पर पसीने की औसत मात्रा आसानी से १ लीटर प्रति घंटा हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर किसी को हर दिन ५ ग्राम नमक से भी कम नमक खाना चाहिए। नमक में मौजूद सोडियम हमारे शरीर में पानी के स्तर को सही बनाने से लेकर ऑक्सीजन को सभी अंगों तक पहुँचाने का काम करता है। नमक खाना पकाने का एक मूलभूत घटक है, जो स्वाद बढ़ाता है, मिठास को संतुलित करता है और यहाँ तक कि परिरक्षक के रूप में भी काम कर सकता है। किसी विशेष व्यंजन या खाना पकाने की विधि के लिए सही प्रकार का नमक चुनना वांछित स्वाद और बनावट प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
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नमक को अक्सर बुरा माना जाता है, लेकिन यह मानव शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण और आवश्यक खनिज है। यह कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है, जिनमें तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारू रखना शामिल है, साथ ही यह शरीर में तरल पदार्थों के नियमन में भी सहायक होता है। अगर आपको कभी नमक खाने की तीव्र इच्छा हुई है, तो कुछ शोध बताते हैं कि हो सकता है कि आप डिहाइड्रेटेड हों।
नमक के इन महत्वपूर्ण पहलुओं के अलावा, पाक कला में स्वाद बढ़ाने के लिए नमक से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है। यह स्वाद बढ़ाने वाला तत्व है, जो साधारण आलू को भी लाजवाब बना सकता है। विभिन्न प्रकार के नमक का उपयोग करना सीखने से आपके भोजन का स्वाद और भी बेहतर हो सकता है।
भारत में नमक के आने का समय १७८२ बताया जाता है। जानकारी के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल में नमक बनाने की जिम्मेदारी उठाई थी। उस वक्त किसी अन्य कंपनी को नमक बनाने का अधिकार नहीं मिला था। हालांकि भारत की आजादी के बाद से देश के औद्योगिक विकास के लिए नमक का उत्पादन शुरू किया गया और मद्रास, गुजरात और राजस्थान के नमकीन पानी के कुओं से भी नमक की पैदावार होने लगी थी। बाकी के नमक के उत्पादन से अलग सेंधा नमक को हिमाचल प्रदेश की मंडी में खनन से निर्माण किया जाता है। भारत में बनने वाले कुल नमक का ७० प्रतिशत समुद्र के पानी से निकाला जाता है। यह भी जान लें कि देश में गुजरात और तमिलनाडु के अलावा नमक आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गोवा और दमन में भी नमक का उत्पादन होता है।
उल्लेखनीय है कि आजादी से पहले भारत में नमक की कमी थी, देश में नमक का आयात किया जाता था। हैरानी की बात है कि भारत में केवल ३५ प्रतिशत नमक का इस्तेमाल भोजन के लिए किया जाता है। वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र में मौजूद नमक कभी भी समाप्त नहीं होगा।
यह हैरानी की ही बात है कि नमक के एक या दो नहीं, बल्कि पूरे १२ प्रकार हैं। सबसे पहले बारी आती है टेबल सॉल्ट की, जिसे जमीन के नीचे पाए जाने वाले लवणीय तत्वों (सैलिन एलिमेंट्स) से बनाया जाता है। वहीं कोशेर नमक बड़े दानों के साथ अपनी मौजूदगी दिखाता है। समुद्री नमक की बारी अगली आती है, जो कि समुद्र के जल को सुखाकर बनाया जाता है। सेंधा नमक यानी कि पिंक सॉल्ट से हम सभी अवगत हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि नमक के इतिहास में इसे सबसे साफ नमक माना गया है। देश के बाहर सेल्टिक सी सॉल्ट ने अपनी पहचान विदेश में बनाई है, इसे फ्रांस के समुद्र तट पर स्थित ज्वार-भाटे से भरने वाले तालाबों से निकाला जाता है। फिर बारी आती है नमक के फूल यानी कि फ्लिउर दे सेल की, जो कि फ्रांस में बनाया जाता है। इसके बाद नमक के प्रकार की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसमें काला नमक, फ्लेक सॉल्ट, ब्लैक हवाईयन सॉल्ट, रेड हवाईयन सॉल्ट, स्मोक्ड सॉल्ट, पिकलिंग सॉल्ट का नाम शामिल है।
कई सारे हिंदी के लोकप्रिय और तेज-तर्रार मुहावरे ऐसे हैं, जहाँ पर भी नमक का इस्तेमाल चटपटे अंदाज में किया गया है, जो कि सुनने वाले को तीखी मिर्च जैसा प्रतीत होता है, जैसे-नमक का हक अदा करना, जख्मों पर नमक छिड़कना, नमक-मिर्च लगाना, नमक हरामी करना आदि। लेकिन केवल खाने और मुहावरे में ही नहीं, नमक ने अपनी अहमियत को भारतीय सिनेमा में भी बरकरार रखा है।
साल १९९६ में ‘नमक’ फिल्म रिलीज हुई थी और अभिनेता संजय दत्त ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई थी। साल १९७३ में आई फिल्म ‘नमक हराम’, जो ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित एक सदाबहार क्लासिक फिल्म है। इसमें अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना मुख्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म वर्ग-संघर्ष, दोस्ती और वफादारी की जटिलताओं को बहुत खूबसूरती से दिखाती है। वहीं साल १९८२ में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘नमक हलाल’ रिलीज की गई, जो एक हास्य फिल्म थी।
अब तो नमक की महिमा समझ ही गए होंगे, तो बस अपने हिस्से का नमक का हक अदा करते रहिए।
डॉ. रवीन्द्र दीक्षित
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