अ-शुभ

दोपहर के लगभग तीन बजे ह्वाट्सएप पर आया यह मैसेज कुछ अजीब था। यह मैसेज देखने के बाद कुछ लोगों को निःसंतान अकेले रहने वाले इस बूढ़े दंपति पर बहुत दया आई। दो-चार लोगों ने तो न जाने का क्या बहाना बनाना बनाया जाए, यह तय भी कर लिया।

Apr 3, 2024 - 12:53
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अ-शुभ
ominous

दुख के साथ सभी को सूचित करना पड़ रहा है कि शांतिलाल की आज मौत हो गई है। अंतिम यात्रा का समय अभी तय नहीं हुआ है। पर संभव हो तो आज शाम साढ़े सात बजे उनके घर आने की कृपा करें। उनकी पत्नी को हृदय रोग है, इसलिए उन्हें यह बात बताई नहीं गई है। इसलिए कृपा कर के उन्हें फोन मत कीजिएगा और दिए गए समय से पहले आने की कृपा भी मत कीजिएगा।

नोट : शांतिलाल के सभी शुभचिंतक, सगे-संबंधी इस सूचना पर ध्यान दें।

दोपहर के लगभग तीन बजे ह्वाट्सएप पर आया यह मैसेज कुछ अजीब था। यह मैसेज देखने के बाद कुछ लोगों को निःसंतान अकेले रहने वाले इस बूढ़े दंपति पर बहुत दया आई। दो-चार लोगों ने तो न जाने का क्या बहाना बनाना बनाया जाए, यह तय भी कर लिया। फिर मन में आया कि बहाना बनाएंगे किससे? शांतिलाल तो रहे नहीं, तो अब जाने की जरूरत ही क्या है? कुछ लोगों को चिंता हुई कि इस उम्र में शांतिलाल के बगैर उनकी पत्नी सविता अकेली कैसे जिंदगी बिताएंगीं? थोड़ी देर में कालोनी की गली के ग्रुप में भी यह मैसेज आया। इसके बाद दो-चार पड़ोसियों ने घर की गैलरी से झांका। पर कोई हलचल दिखाई नहीं दी। एक दो लोग तो बिना किसी वजह के शांतिलाल के घर के बाहर भी चक्कर लगा आए। पर वहां उन्हें कोई हलचल दिखाई नहीं दी। दो-चार उत्साहियों ने मना करने के बावजूद केवल खबर लेने के बहाने सविता को फोन कर ही दिया।

साढ़े 7 बजे एक एक कर के लोग शांतिलाल के घर इकट्ठा होने लगे। घर के बाहर कुछ कुर्सियां रखी थीं। सविता गुमसुम बैठी थी। बाहर से आने वाले कुछ रिश्तेदार सविता को पकड़ कर रोने लगे तो उन्होंने पूछा, "क्या हुआ?"

सविता को आघात न लगे, इस तरह धीरे से उन लोगों ने शांतिलाल के बारे में मिली खबर उन्हें बताई तो वह खिलखिला कर हंस पड़ीं। लोगों को लगा कि पति की मौत का इन्हें गहरा आघात लगा है। लेकिन वहां आए लोगों को तब लगा, जब शांतिलाल घर के अंदर से बाहर आए।

सभी को बाहर रखी कुर्सियों पर बैठाते हुए शांतिलाल ने कहा, "थोड़ा खराब तो था, पर जरूरी था। यह जानने के लिए कि हमारे संबंध कितने जीवंत हैं। बुरे दिनों में मुझसे कैसे हो न पूछने वाले भी यहां दिखाई दे रहे हैं। अच्छा ही हुआ, अगर मैं मर जाता तो आप लोग आते तो वह किस काम का होता? पिछले दो महीने में हमारे मोबाइल पर मात्र तीन फोन आए और आज मना करने के बावजूद केवल खबर लेने के लिए 18 फोन आए। सभी ने केवल खबर पूछ कर फोन रख दिया। अगर आप लोग कभी-कभार इसी तरह फोन कर लिया करें तो...? बात आप लोगों को हैरान करने वाली नहीं है। आप लोग आए, इस के लिए आप लोगों का हृदय से आभार। अब अगर मैं सच में चला जाऊं और आप लोग नहीं आएंगे, तब भी चलेगा। एंबुलेंस वाला ले जाएगा। पर जब तक जी रहे हैं, कभी आ कर या फोन कर के अहसास तो कराते रहें कि हम सच में जी रहे हैं।"

वीरेंद्र बहादुर सिंह 

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