राष्ट्रीय बसंत की प्रथम कोकिला श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान
यह लेख स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन, संघर्ष, साहित्य और देशभक्ति से ओत-प्रोत उनकी रचनाओं का परिचय कराता है। ‘झांसी की रानी’ और ‘वीरों का कैसा हो बसंत’ जैसी ओजस्वी कविताओं ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जन-जन में स्वतंत्रता का ज्वार उत्पन्न किया। देश के लिए जेल यात्राएँ करने वाली सुभद्रा जी महिला शक्ति, नारी अस्मिता, राष्ट्रीय भावना और बलिदान की प्रेरणा का प्रतीक हैं। उनकी कहानियाँ और कविताएँ आज भी भारतीय साहित्य और राष्ट्रप्रेम की धरोहर हैं।
हिन्दी के जिन साहित्यकारों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ साहित्य रचना करके देश को जागरूक किया,देशवासियों में स्वाधीनता के लिए मर मिटने की बलिदानी भावना भर दी,देश की स्वाधीनता के लिए अनेक बार जेल यात्राएं भी कीं, उन साहित्यकारों में से एक नाम है- सुभद्राकुमारी चौहान।
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान मूल रूप से राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा की कवयित्री हैं। आपने देश को आजादी दिलाने के लिये मन-कर्म व वचन से प्रयास किय इसकी पुष्टि राष्ट्र कवि माखन लाल चतुर्वेदी के इस कथन होती है-
`संघर्ष सुभद्रा जी के लिये जीवन के पग-पग में था।निरंकुशता से एक बार संघर्ष में उतर पड़ने के बाद वे एक पश्चात दूसरी सफलता की ओर बढ़ती गई। गति पथ के फूल और शूल उन अनासक्त प्रतिमा के दायें-बांये बिखरते रहे। भड़कते हुए आग के शोलों में विहंसती जीव निर्द्वन्द्व `झांसी की रानी' और `वीरों का कैसा हो बसंत' स्वर से लोक जीवन को चिरझंकृत करने वाली यह वीर बाला लोहे के सींखचों में कैद थी और अपनी कृतियों से आजादी के बलि-पंथियों का रथ-पथ आलोकित तथा गतिमान कर रही थी।
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उनकी प्रसिद्ध कविता `झांसी की रानी' को अंग्रेज सरकार ने देशप्रेम के कारण जप्त किया था, फिर भी वह देश में राष्ट्रीयता तथा स्वाधीनता प्रेम की प्रतीक बनी रही। देशप्रेमी युवक उसकी पंक्तियों को गाकर मस्त होते और उनके मन में देशप्रेम और स्वराज्य की ज्वाला धधकने लगतीं। देश के राष्ट्रीय आंदोलनों में प्रेरणा देनेवाली ये पंक्तियां थीं -
`बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मरदानी वह तो झांसीवाली रानी थी।
चरित्र की उदात्तता तथा भाषा और शिल्प प्रभावात्मकता से आज भी बच्चों वृद्धों एवं युवको कंठस्थ है।
सुभद्राकुमारी चौहान प्रमुखतः कवयित्री होते हुए भी उन के तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं- `बिखरे मोती', `उन्मादिनी' तथा `सीधे-सादे चित्र'। उनकी कहानियां भी मुख्यतः राष्ट्रीयता एवं नारी व्यथा से संबंधित हैं। उनकी कहानियों में झंडा आंदोलन, सत्याग्रह, जेल, साम्प्रदायिक-एकता आदि समसामयिक विषय जीवंत रूप में साकार हो उठे हैं। सभी कहानियों में स्वाधीनता आंदोलन की पृष्ठभूमि रही है।
सुभद्रा जी का संपूर्ण कृतित्व हम सब देशवासियों के लिये प्रेरणापुंज बन गया है. सुभद्रा जी भारतीय नारी की अस्मिता की शाश्वत प्रतिबिम्ब है। उनकी सरलता उनकी कविताओं में सहजता से देखी जा सकती है। यह सच है कि साहित्य में लेखक का व्यक्तित्व स्पष्ट प्रतिबिम्बित हो जाता है। चाहे विषय कुछ भी हो। इसीलिये सृजनात्मक कसौटीअपने आप में पूर्ण रूप से समर्पित भाव में ही कालजयी साहित्य की रचना होती है। `झांसी की रानी' जैसे अमर व कालजयी कविता के कारण ही सुभद्रा जी की पहचान आज भी बनी हुई है। क्योंकि इस कविता को पढ़ते समय पाठक को ऐसी अनुभूति होती है कि कवयित्री वहां पर स्वयं मौजूद है।
सुभद्रा जी आज की युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श है,महिलाओं के लिए नारी शक्ति का प्रतीक है।
उनका पूरा काव्य हृदयस्पर्शी हैं।
ओजपूर्ण काव्य सृजन के कारण ही उन्हें `राष्ट्रीय बसंत की प्रथम कोकिला' कहा गया। कदम्ब का पेड़ उनकी अमर रचना है बच्चो की प्रिय रचना है।
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान युग युगों तक एक दिव्य सितारे की तरह जगमगाती रहेंगी।
इन्दु सिन्हा "इन्दु"
रतलाम, मध्यप्रदेश
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