जन्मदिन की यादगार भूल
नीता के 16वें जन्मदिन पर एक मजेदार गलती उसके लिए हमेशा याद रहने वाली याद बन जाती है। स्कूल ले जाते समय वह गलती से खाने के टिफिन की जगह गूंथा हुआ आटा स्कूल ले जाती है, जिसे देखकर उसके दोस्त खूब हँसते हैं। घर लौटने पर जब उसकी माँ को इस गलती का पता चलता है तो पूरा परिवार हँसी से गूंज उठता है। यह कहानी बताती है कि जीवन की छोटी-छोटी अनजानी गलतियाँ भी कभी-कभी खूबसूरत और यादगार पलों में बदल जाती हैं।
आज घर का माहौल कुछ अलग सा है क्यूंकि आज नीता का जन्मदिन है जो अपने जीवन के सोलहवें वर्ष में प्रवेश कर रही है । जन्मदिन का उत्साह उसके चहरे से ही प्रतीत हो रहा है कि आज वो कितनी खुश है। इसी ख़ुशी को मनाने के लिए नीता स्कूल जाने के लिए जल्दी-जल्दी तैयार हो रही है। उसने जल्दी से अपनी माँ को आवाज़ लगया - माँ मेरा टिफिन जल्दी दे दो। माँ भी घर के किसी काम में व्यस्त है वो भी अपना काम करते हुए ही बोली-बेटा टेबल में टिफिन रखी हुई है वहाँ से ले ले। मैं पैक कर दी हूँ। ख़ुशी से झूमती नीता आई और टिफिन को बैग में भरकर स्कूल चली गई। स्कूल जाकर जब सब उसे शुभकामनाये दिए तो वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी। शांत स्वभाव की नीता स्कूल में एक अनुशासित और मेधावी छात्रा है। खाली पीरियड में नीता मैथ्स का अभ्यास करती या होमवर्क पूरा करती। उस दिन स्कूल में जब दूसरा पीरियड खाली था तो नीता अपने काम में व्यस्त हो गई। थोड़ी देर बाद नीता के दोस्त बोले क्या नीता आज तो एन्जॉय कर ले तेरा ही जन्मदिन है फिर हँसी-मजाक का दौर चल पड़ा। सारे दोस्त एक साथ बोले अच्छा नीता आज तो तू स्पेशल टिफिन लाई होगी, चलो टिफिन करते है। नीता बोली-नहीं पता यार ! मम्मी ने क्या रखा है। तुम लोग खा लो। मुझे अभी नहीं खाना। ये सुनते ही सारे फ्रेंड्स एक साथ नीता के टिफिन की और लपके। टिफिन खोलते ही कुछ देर के सन्नाटा के बाद पूरी क्लास हंसीं के जोर ठहाकों से गूंज उठा। नीता को सब एक साथ घूरने लगे तो नीता बोली क्या हो गया भई ! तुम तो टिफिन खा रहे थे तो ये सब क्या कर रहे। वो लोग नीता को देखकर फिर हॅसने लग गए। एक दोस्त ने बोलै तू टिफिन सच में इतना स्पेशल लाई है हमनें कभी सोचा ही नहीं था कि इसे हम इतना एन्जॉय करेंगें। नीता बोली ऐसा क्या है टिफिन में ?
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फिर ठहाकों से पूरा क्लास गूंज उठा। नीता को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि हुआ क्या है उसने जल्दी से जाकर अपना टिफिन देखा तो उसे देखकर वह भी दंग रह गई। मुख में मिश्रित भाव लेकर वह भी जोर से हंस पड़ी। वास्तव में उसके टिफिन में खाने के जगह ठगूँथा हुआ आटाठ था जो उसकी माँ फ्रिज में रखने वाली थी। तब उसे याद आया अरे टेबल पर दो टिफिन था मैं गलती से गलत टिफिन उठा कर ले आई। नीता बोली-यह घटना आज ही होनी थी अब यह बात हर जन्मदिन के दिन मुझे याद आएगी। जाने-अनजाने में मेरे लिए लाइफ टाइम मेमोरी बन गई। घर जाकर जब नीता ने अपनी माँ से पूछा कि माँ आज टिफिन में क्या दिए थे तो माँ बोली पूरी खीर। नीता बोली बहुत टेस्टी था। आप मुझे और बना दो अभी। यह सुनकर मम्मी फ्रिज खोली आटा निकालने के लिए और वो बोली खीर पूरी तो फ्रिज में है तो तू क्या खाई? इतना कहते ही उन्हें माजरा समझ आ गया और वो पेट दबा-दबा कर खूब हँसी। पूरा परिवार इस वाक्या को सुनकर हँस पड़ा।
अनामिका दास गुप्ता
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