अनमोल रिश्ते
ननिहाल हर बच्चे के लिए एक ऐसा राज्य है जिसका वह एकछत्र राजा होता है। उसके मुॅंह से निकली हर बात तुरंत पूरी होती है। ननिहाल में हर सदस्य उसके लिए हर इच्छा पूरी करने के लिए तत्पर रहता है। नानी तो ऐसा जादू का चिराग है जिसे रगड़ने की भी जरूरत नहीं है। बस नानी की ऑंखें उसकी मौन भाषा समझती है और मन की बात पूरी हो जाती है।

ईश्वर ने जब संसार के निर्माण के बारे में सोचा होगा तो सबसे पहले पंच तत्वों को बनाया होगा। उसके बाद प्रकृति का निर्माण कर उसकी पवित्रता और खूबसूरती को देख इठलाया होगा। तब दिल के एक कोने से आवाज आई होगी कुछ छूट रहा है। तब धरती पर मानव को उतारा और मानव के साथ उतरे रिश्ते। रिश्ते जो अंधकार में रोशनी , तूफान में सहारा, सूखे में बारिश की बूंदें, सर्द रातों में गर्माहट और अवसाद में सच्ची मुस्कान जैसे होते हैं। मानव का रिश्ता जड़- चेतन,जीव जंतु, पशु-पक्षी, ईश्वर -मनुष्य सबसे होता है। वह जीवन भर रिश्तों को समझने और संभालने में लगा रहता है।
पारिवारिक रिश्तों की बात करें तो हर रिश्ते का अपना एक खास महत्व और स्थान होता है। खून के रिश्ते ईश प्रदत होते हैं और हमें उन्हें स्वीकारना होता है। दोस्ती के रिश्ते हम स्वयं बनाते हैं और निभाते हैं। आज हम परिवार के जिस अनमोल रिश्ते की बात कर रहे हैं वो हैं बच्चो का अपने दादा -दादी और नाना -नानी के साथ का। दादा-दादी के लिए उनके पोता/पोती एक धरोहर है जिन्हें वह बहुत ही प्यार और सुरक्षा से सहेजते हैं।
यह कथन एकदम सही है कि मूल से ज्यादा ब्याज
प्यारा होता है
इन नन्हें कदमों के आने की खबर मात्र से ही दादा बनने का जो एक गर्व भाव होता है वो दिल में कुलबुलाने लगता है। पुरूष होने के कारण वह मुखर तो नहीं होते पर हर समय वे अपने कुल के नन्हें के लिए प्रार्थनारत रहते हैं। बातों बातों में होने वाले शिशु और माॅं की सेहत की जानकारी लेते रहते हैं। जब शिशु जन्म लेता है तो उसका सीना गर्व से और भी चौड़ा हो जाता है। वह अपनी खुशी घर परिवार में तो बांटता ही है पर कुछ खास मित्रों के साथ अपने नन्हों के लिए भविष्य के सपनों की चर्चा भी करता है। फिर जैसे -जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है उन के कदमों के साथ वह भी चलता है, दौड़ता है,खेलता है। बालक भी दादू की छत्रछाया में सुरक्षित बढ़ते हैं। बच्चे भी उनकी बातों को समझते हैं और यह अनमोल रिश्ता बढ़ता जाता है। अब हम दादी की बात करें तो वह सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर जच्चा और बच्चा दोनों की भरपूर देखभाल करती है। जन्म के बाद ही देवी देवताओं की मनौती , पूजा प्रार्थना में जरा भी कमी नहीं छोड़ती है। दादी और पोती/पोते का तो मीठा रिश्ता होता है। वह उन्हें नैतिक और सामाजिक व्यवहार सिखाती है। बच्चों की हर शरारत पर न्योछावर होती है। उनकी सेहत का ख्याल रखती है। बच्चे भी पौष्टिक भोजन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में कुंदन जैसे निखरते हैं।
इस अनमोल रिश्ते में अब सबसे मधुरतम रिश्ते की बात करें तो वह है बच्चो का नाना/नानी के साथ का सबसे प्रगाढ़ संबंध।
ननिहाल हर बच्चे के लिए एक ऐसा राज्य है जिसका वह एकछत्र राजा होता है। उसके मुॅंह से निकली हर बात तुरंत पूरी होती है। ननिहाल में हर सदस्य उसके लिए हर इच्छा पूरी करने के लिए तत्पर रहता है। नानी तो ऐसा जादू का चिराग है जिसे रगड़ने की भी जरूरत नहीं है। बस नानी की ऑंखें उसकी मौन भाषा समझती है और मन की बात पूरी हो जाती है। रात को नानी के बिस्तर पर, उसके पेट पर पैर रखकर लेटना और कहानियाॅं सुनना तो बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। बूढ़ी नानी अनुभवों का पिटारा , मिठाईयों की दुकान और खाने का खजाना है। उनका संदूक जब खुलता है तो बच्चों को कारू का खजाना मिल जाता है। नानी जैसा मीठा पेढ़ा और उसकी कहानियाॅं रसमलाई सी होती हैं।
नानू भी बच्चों के साथ बच्चा बन जाते हैं। कैसी भी शरारत करो ,डांट पड़ती ही नही है। नानू के साथ खेत खलिहान, मेला बाजार और बगीचों में जाना ,पेड़ों से फल तोड़ना, पेड़ पर चढ़ना परमानंद होता है। जो बचपन ऐसे संरक्षण में बितता है वो युवावस्था में कभी अवसाद में नहीं घिरता है। संस्कृति, संस्कार,धर्म, रीति -रिवाज,कथा कहानियाॅं, मातृभाषा का ज्ञान, मुहावरे और कहावतें वो बखूबी जानता है। भजनों पर नाचना और कीर्तन में मंजीरे बजाने का आनंद बस इनके साथ ही आता है।
दादा दादी,नाना नानी का बच्चों से जो रिश्ता होता है वो सबसे पवित्र और अनमोल होता है। वे बच्चे खुशनसीब होते हैं जो इनकी छत्रछाया में बढ़ते हैं। दूसरी और जो बुजुर्ग नौनिहालों के संग रहते हैं वो भी अपने आप को धन्य समझते हैं।
यह अनमोल रिश्ता सदा फलता फूलता रहे तो अनेक समस्याएं जड़ से खत्म हो जाएंगी।
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