पापा जी कब आयेंगे?

यह मार्मिक देशभक्ति कहानी भारतीय सेना के जांबाज सैनिक रणवीर सिंह के जीवन, कर्तव्य और बलिदान को प्रस्तुत करती है। परिवार से विदा लेते समय रणवीर अपनी पत्नी, बच्चों, बहन और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारियों को मन में लिए कार्यस्थल के लिए रवाना होता है। सीमा पर वह अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए दुश्मनों से मुकाबला करता है और अंततः भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए वीरगति को प्राप्त होता है। तिरंगे में लिपटा उसका पार्थिव शरीर जब गाँव पहुँचता है, तो पूरा गाँव शोक और देशभक्ति की भावना में डूब जाता है। कहानी एक सैनिक के बलिदान के साथ उसके पीछे छूट गए परिवार के दर्द और बच्चों के उस मासूम सवाल को सामने लाती है—“पापा जी कब आएँगे?”

Oct 8, 2026 - 12:43
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पापा जी कब आयेंगे?
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भारतीय थल सेना का जाबांज युवा सैनिक रणवीर सिंह अपने गाँव में घर-परिवार के साथ अवकाश व्यतीत करने के उपरांत अपने कार्य स्थल जाने की तैयारी कर रहा था। उस समय घर का माहौल गमगीन सा लग रहा था। उसकी पत्नी उमा देवी के सिर से साड़ी का पल्लू बार-बार गिर रहा था, उसके चेहरे पर अनायास ही घबराहट झलक रही थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन निकल नहीं पा रहे थे। वह ऊपर वाले से अपने पति की सुरक्षित लौटने की कामना कर रही थी।
जब रणवीर वर्दी पहन रहा था, उस समय दो वर्षीय पुत्र और चार वर्षीय पुत्री खेलते-खेलते रणवीर के पास आकर उसका हाथ पकड़कर बोले, ठपापा जी कहाँ जा रहे हैं? आप रहते हैं तो घर में कितना अच्छा लगता है! जल्दी आना।ठ
रणवीर ने दोनों को बहुत प्यार से गोद में लेकर समझाया कि तुम दोनों अच्छे से रहना, अपनी और दादा-दादी को परेशान मत करना, उनकी बातें मानना और अपनी मम्मी की बातें मानना, ठीक है।
बिटिया बोली, ठपापा जी, आप चिंता मत करना, हम भाई-बहन अच्छे से रहेंगे।ठ
रणवीर बड़े प्यार से अपने मासूम बच्चों से पूछा, ठअच्छा, तो ये बताओ कि तुम दोनों को क्या चाहिए।ठ
बिटिया बोली, ठपापा जी, कुछ भी नहीं चाहिए।ठ बेटे ने धीरे से बोला, ठहमें तो ढेर सारे खिलौने और टॉफी चाहिए।ठ उसकी बेटी जिद करते हुए बोली, ठपापा जी, कब आएँगे? जल्दी आना।ठ इतने में कहीं से उसकी छोटी बहन आ गई। रणवीर ने उसे समझाया, ठबहन, खूब पढ़ाई करना। तुम्हें तो प्रशासनिक अधिकारी जो बनना है।ठ
रणवीर की बहन बोली, ठहाँ भाई, मैं खूब पढ़ाई करूँगी, तुम्हारे सपनों को अवश्य साकार करूँगी।ठ उसकी आँखों से अनायास ही आँसू निकल पड़े।
रणवीर जब वर्दी पहनकर अपने माता-पिता के चरण स्पर्श कर रहा था, तब उसकी माँ बोली, ठबेटा, किसी भी बात को लेकर चिंता मत करना और अपना ख्याल रखना।ठ माँ और बेटे एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे, माँ का वात्सल्य और पुत्र का आत्मीय लगाव दोनों एक हो गए हों।
जब रणवीर अपने पिता जी के चरण स्पर्श करने के लिए झुका, तो उसके पिता जी बड़े भावविभोर होकर बोले, ठबेटे रणवीर, किसी बात की चिंता मत करना, अपने पर ध्यान देना।ठ
फिर उसके दोनों बच्चे पास आ गए। फिर बिटिया बोली, ठपापा जी, कब आएँगे?ठ रणवीर फिर समझाया, ठमैं जल्दी आऊँगा।ठ अब ऑटोरिक्शा वाला उसे रेलवे स्टेशन पहुँचाने के लिए आ गया।
अब रणवीर अपने सामान को ऑटो में रखकर घर में स्थित पूजा की ओर तेज कदमों से चल पड़ा। वहीं पर उसकी पत्नी उमा देवी खड़ी थी। वह रणवीर को एकटक देख रही थी, मानो वह कुछ कहना चाहती थी, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी, क्योंकि समय की सीमा होती है। दोनों आँखों से ही बातचीत कर रहे थे। फिर रणवीर हाथ हिलाते हुए घर से बाहर निकल गया, क्योंकि ऑटोवाला इंतजार कर रहा था। वह ऑटो में जाकर बैठ गया। उसे विदाई देने के लिए उसके माता-पिता, छोटी बहन, दोनों बच्चे और पत्नी घर से बाहर निकलकर ऑटोरिक्शा के सामने खड़े हो गए। उसके बाद ऑटोरिक्शा आगे बढ़ गया।
रणवीर जब गाँव से बाहर निकला, अब उसे गाँव का प्राथमिक पाठशाला दिखाई दिया। जहाँ उसने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की, उसे बचपन के दिन याद आ गए। उसके मन-मस्तिष्क में सैकड़ों स्मृतियाँ ताजी हो गईं, जब यह नन्हा सा-छोटा सा बच्चा था। कंधे में झोला लटकाए पढ़ने जाया करता था, दिनभर गिनती-पहाड़ा याद करता था।
पाठ्य पुस्तक की कविताएँ चिल्लाकर-चिल्लाकर अपने बाल मित्रों के साथ पढ़ता था। कितने सुहाने दिन थे बचपन के, जो समय की धारा बहते-बहते आगे निकल गए थे। वह स्मृतियों में खोकर आनंद की अनुभूति कर रहा था।
जब ऑटोरिक्शा आगे निकला तो गाँव का बगीचा आ गया, जहाँ कभी दिनभर गिल्ली-डंडा, कबड्डी और फुटबॉल खेला करता था। वसंत ऋतु में जब कोयल कू-कू करती थी, उसकी आवाज निकला करती थी। यह हमेशा अपने मित्र मंडली से घिरा रहता था। लोकगीत गाया करता था।
रणवीर को ऐसा लग रहा था, आम, महुआ और जामुन के पेड़ उसे बुला रहे हों। उसे उन पेड़ों से काफी लगाव हो गया था। महुआ के पेड़ से महुआ टपकने के मौसम में सुबह-सुबह चुनने बाग में जाया करता था। आम और जामुन के फल जब पक जाया करते, झोला लिए दिनभर बागों में घूम-घूमकर उसे एकत्रित किया करता था।
रणवीर यही समझ रहा था कि इस बाग के सभी पेड़ उसके लौटने का इंतजार करते रहेंगे। उसे अपने गाँव से बहुत लगाव था। वह अपने बचपन के दिनों को भूला नहीं पा रहा था। उसे तो अपने गाँव के कण-कण से प्रेम और आत्मीय लगाव हो गया था। धीरे-धीरे वह गाँव की सीमा से बाहर निकल गया था।
रणवीर भावनाओं की दुनिया से निकलकर यथार्थ की दुनिया में आ गया। अपने पारिवारिक दायित्व का बोझ अपने कंधे पर लिए अपने गंतव्य स्थान पर घर से निकल पड़ा था। उसे तो बहन की पढ़ाई और शादी की जिम्मेदारी के साथ-साथ दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल पढ़ाना था।
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और इनका इलाज की चिंता लिए निकल पड़ा था। उसे अपने पुराने घर की मरम्मत भी करानी थी। अपने घर के सैकड़ों दायित्व उसके कंधे पर थे। इन्हीं तमाम समस्याओं का उधेड़बुन लिए रेलवे स्टेशन की ओर चले जा रहा था।
अब उसे अपने बच्चों, पत्नी, बहन और माता-पिता सहित गाँव की यादें आने लगी थीं। इस तरह थोड़ी देर में रेलवे स्टेशन की ओर पहुँच गया। रणवीर अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व का बोझ लिए रेलवे स्टेशन में जाकर अपने गंतव्य स्थान पर जाने वाली गाड़ी का इंतजार करने लगा।
रणवीर सिंह अपने कार्य स्थल पर पहुँचकर अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गया। उस समय पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों की ओर से मुठभेड़ का दौर चल रहा था। वह सेना का युवा जाबांज बहुत ही साहसी जवान था।
एक दिन भारतीय सेना और पाकिस्तानी सेना के बीच जमकर फायरिंग हो रही थी। रणवीर सिंह अपने रण कौशल और साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सेना के चार-पाँच सैनिकों को ढेर कर दिया। बचे हुए पाकिस्तानी सैनिक रफूचक्कर हो गए।
भारतीय थल सेना का जाबांज, साहसी और बहादुर सैनिक रणवीर सिंह सिंहनाद करते हुए आगे बढ़ रहा था। उस समय दुश्मन देश के कायर सैनिक गीदड़ की तरह छिपकर फायरिंग शुरू कर दिए। रणवीर सिंह अपने आप को सँभाल पाता, तब तक गोली उनके पैर में लगी, जिससे वह गिर पड़ा और घायल हो गया, लेकिन घायल अवस्था में भी उस गीदड़ सैनिक को ढेर कर दिया।
अचानक एक और दुश्मन देश के सेना के गीदड़ सैनिक ने फायरिंग शुरू कर दी। अब रणवीर सिंह सँभल नहीं पाए। जननी जन्मभूमि के लिए अपने प्राण सुमन की आहुति दे दिया। वीरगति को प्राप्त होने रणवीर सिंह के मुख से जो ध्वनि निकली थी, ठभारत माता की जय, वंदेमातरम्ठ का उच्चारण करते हुए वीरगति रणवीर सिंह की हो गई।
लेकिन, जब दुश्मन पराजित हो जाता है, तब छल-छद्म का सहारा लेता है। भारतीय सेना की सिंह गर्जना से गीदड़ों की सेना थर-थर काँपने लगती है। इसलिए वे छल-कपट का सहारा लेते हैं। दुश्मन देश के कायर सैनिक रणवीर सिंह से भय खा रहे थे।
अब रणवीर सिंह की वीरगति हो जाने का समाचार न्यूज़ चैनल और समाचारपत्र के माध्यम से देश-प्रदेश सहित चारों ओर तेजी से फैल गया। रणवीर के गाँव सहित आसपास के गाँवों में तेजी से फैल गया। चारों ओर कोहराम और मातम छा गया। जन-जन में अब बस यही चर्चा होने लगी।
दो दिन के बाद भारतीय सेना के वाहन से तिरंगे में लिपटा रणवीर सिंह का पार्थिव शरीर उसके गाँव में पहुँच गया। उसके घर-आँगन में गाँव के लोग एकत्रित होने लगे। अब सेना के जवानों ने उसके शव को उतारकर आँगन ले जाकर रख दिया। अब तो यह हृदयविदारक दृश्य देखकर मातम छा गया। सबकी आँखों से अश्रु की धारा बह निकली। रणवीर की पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और बहन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रणवीर सिंह की यह दशा देखकर सभी की आँखों से आँसू की धारा थम नहीं रही थी।
दूसरी ओर रणवीर की पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और छोटी बहन सिसक-सिसककर असीम वेदना को समेटे हुए रो रहे थे। इधर रणवीर के मासूम बच्चे उमा देवी से यही पूछ रहे थे, ठमम्मी-मम्मी, पापा क्यों अभी तक सोए हुए हैं? देखो तो, अपने घर में इतने सारे लोग आए हैं।ठ

उमा देवी मानो पत्थर की मूर्ति बन गई थी। 

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थोड़ी देर के उपरांत पराक्रमी जाबांज जवान अमर शहीद रणवीर सिंह की अंतिम यात्रा निकल पड़ी। चारों ओर से जनसैलाब उमड़ पड़ा। रणवीर सिंह के सम्मान में तरह-तरह के नारे लगाए जा रहे थे। ठरणवीर सिंह का बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तानठ, तो कहीं पर ठअमर शहीद रणवीर सिंह, अमर रहे, अमर रहेठ के नारे लग रहे थे।
भीड़ के लोग एक-दूसरे से रणवीर सिंह की शौर्यगाथा के विषय में चर्चा कर रहे थे। सभी के चेहरे पर वीरगति को प्राप्त सेना के जवान के लिए सम्मान के भाव उमड़ पड़े थे। उस समय जनसैलाब में देशभक्ति के भाव सागर की लहरों की तरह उफान मार रहे थे।
चारों ओर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस गाँव के कण-कण भी मातम मना रहे हों। पक्षी शोक गीत गा रहे थे। अपने बचपन के दिनों में जिन बाग-बगीचों में खेलता रहता था, यहाँ के पेड़ सहित घास-फूस शोक में दुखी से लग रहे थे। उन्हें भी रणवीर से बिछुड़ने का गम सता रहा था, क्योंकि रणवीर बचपन से यहाँ हमेशा आया करता था।
अब आसमान बादलों से ढक गया। रह-रहकर बिजली चमक रही थी, मानो रणवीर सिंह का सम्मान कर रही हो। थोड़ी देर बाद वर्षा की बूँदें टपकने लगीं, मानो यह प्रकृति रो रही हो।
धीरे-धीरे जनसैलाब उस स्थल की ओर पहुँच गया, जहाँ पर अंतिम संस्कार होना था। सेना के वाहन से रणवीर के शव को चिता के ऊपर रख दिया गया। सेना द्वारा तोपों से सलामी दी गई। मातमी धुन बजाई गई। शवयात्रा में आए जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ और माला से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे।
उस सम्पूर्ण वातावरण बहुत ही गमगीन हो गया, जब उसके तीन वर्षीय बेटे को रणवीर की चिता को मुखाग्नि देने के लिए गोद लेकर लाया गया। जनसैलाब की आँखों में आँसू और चेहरे पर उदासी थी।
रणवीर की चिता के साथ-साथ उसके मासूम बच्चों, पत्नी उमा देवी, बहन और बुजुर्ग माता-पिता के भविष्य की तमाम खुशियाँ भी जल रही थीं। इस परिवार के लिए ऐसे प्रश्न उभर रहे थे, जिसका इस दुनिया में कोई समाधान नहीं था।
अब घर में रणवीर सिंह के बच्चे यही क्या करते थे कि, ठपापा जी कब आएँगे?ठ 

शिवमंगल सिंह

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