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गजल

जमाने का चलन कैसा आया है साहिबो । कोई खा रहा कोई है भुक्खा गजल कह रहा हूं ।।

पर्यावरण

फाड़ के छाती इस धरती में, जहर बहुत सा भर डाला।।

पिता जी की याद

हमें भी मिल जाता पिता जी का प्यार, तरसती हैं आज भी आंखें,

सूखे गुलाब

उसने अपनी डायरी खोली—एक खाली पन्ने पर उसने लिखा: "तुम्हारे बिना, मेरा शरीर सिर्फ...

बसंत

भंवरो के  गुंजन की ध्वनि संग  रुचिर पवन  मंडरायी

वसंत 

शीतल मलय पवन अतिपावन, आम्र कुंज मंजरी मनभावन

रक्त दौड़ना चाहिए

रगों में है रक्त गर तो रक्त दौड़ना चाहिए 

अलविदा और साॅरी - तुवालु : Tuvalu | Culture, History, P...

Tuvalu | Culture, History, People, & Facts : ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती की लगा...

कोचिंग की कक्षाओं में क़ैद कच्चे ख्वाब: आधुनिक शिक्षा क...

आजकल सोशल मीडिया पर रिजल्टों की मार्कशीटों की बरसात हो रही है, हर बच्चे के नब्बे...

वो पागल आदमी

सुबह सुबह दिसंबर महीने की ठण्ड कलेजा कंपा रही थी। बिना आग के मानो खून बर्फ कि तर...

विश्व की भाषा बनने को अग्रसर हमारी हिंदी

भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र विश्वबंधुत्व एवं वसुधैवकुटुम्बुकम् है. विभिन्न देशों...

विलुप्त होती टेसू की परंपरा

भारतीय संस्कृति बहुत ही समृद्ध संस्कृति है जो, अनेक प्रकार के त्योहार, उत्सव, पर...