Posts

घर की मालकिन

लाख कोशिशों के बाद भी मुझे याद नहीं आ रहा.... हर वह जगह जहां मैं पैसे रख सकती थी...

ये केसा तेरा देश है बेटा ?

महानगरों की धकापेल में प्राचीन भारतीय संस्कृती को जीवित रखते हुए सादगी और सच्चाई...

जलता चला गया

शिकायत बहुत थी जिंदगी से, पर बताता किसको? हर शख्स मुझे देखकर, बचता चला गया।

बदल कर तो देखो

न रहेगी जिंदगी से शिकायत तुमको कभी, कई दिन से भूखे बच्चे की तरह,पल कर तो देखो।

तितली

उड़कर फुनगी पर चढ़े,रंगीली सी गात। कैसे वह पहचानती, होने वाली प्रात।।

रंगीला फाग

पहला मधुकर रंग हो, इतना तो अधिकार। गोरी कोरी देह पर,दे पिचकारी मार।।

आत्मा और शरीर

गई थी वस्त्र फैलाने, भाग कर झट से तू आई,

नारी की अभिलाषा

महिला बिन पुरुषों का अस्तित्व भला नज़र कहीं आता है

माँ की ममता

हिसाब बराबर हो रहा है बेटा जब तुम छोटे थे तो मैं तुम्हें खिलाती थी और आज तुम्हें...

जल और हमारा पर्यावरण

पर्यावरण का सरंक्षण व परिवर्द्धन का संदेश भारतीय जीवन दर्शन के आधार-चिंतन में नि...

जिंदगी

बैठी हूँ वक्त की टहनी पर परिन्दों की तरह उड़ जाने को

तबादले के बाद

लालजी साहू तारापुर कोलियरी के सेल्स आफिस का बड़ा बाबू था । जैसे थाने का बड़ा बाब...

आगे से फटा जूता

जिंदगी के आईने में अपने अनुभवों का अक्स वो हर आदमी देखना चाहता है, जिसके अंदर दू...

सच्चा साथी

रीना एक पढ़ी-लिखी संभ्रांत महिला थी।चेहरे मोहरे से भी ठीक-ठाक ही थी । यही नहीं स...

अंग्रेजी ने हमसे क्या छीना है

इस प्रकार हम देखते है कि अंग्रेजी ने हमसे हमारी भाषा का अपनापन छीन लिया है , निज...

बुजुर्ग

दादी सुकून घर की शान रही दुर्भाव नहीं।।