फिर सोचती हूं गुस्से में बोला होगा, गुस्से में बोला होगा शायद! नहीं-नह...
हवाओं के रुख की फ़िक्र परिंदे कहां किया करते हैं। अरमानों की उड़ान बेख़ौफ़ प...
बैठो न पास जरा-सी देर कि देख पाऊं तुम्हारी आंखों में अपनी परछाईं।
आंखों में सागर ने पहली बार समुद्र की गहराई देखी थी कॉलेज की लाइब्रेरी में पहली ब...
बुद्धि कलम दावात लिए कोरे पन्नों को हाथ लिए वाणी भावों का विमल विम्ब साहित...