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Sahityanama Apr 25, 2024 0 110
युगों -युगों से भीगी नहीं बसंती चोली रही सदा ही सूनी -सूनी मेरी होली
Sahityanama Apr 25, 2024 0 93
बचपन में खेली होली, की यादों ने गुदगुदाया।
Sahityanama Apr 25, 2024 0 119
नारी दुर्गा रूप को ,अबला कहे समाज। पहना कर फिर बेड़ियां,निर्बल करता आज ।
Sahityanama Apr 24, 2024 0 137
सीखो जीना अब समाज तुम एक काबिल नारी के संग
rangoli awasthi Apr 19, 2024 0 83
कविता - आज के युग में एक दूसरे की देखा देखी चलने वाले हम लोगों को , जो अपने इसी ...
Sahityanama Apr 17, 2024 0 113
प्रेम मेरे हिस्से उतना ही आया जितना जाल में फंसी मछली के हिस्से जीवन
Sahityanama Apr 16, 2024 0 107
बेटियाँ जब लौट आती हैं पीहर देखती है रूठा घर -द्वार अपना
Sahityanama Apr 16, 2024 0 110
सहना मत अन्याय को, इससे बड़ा न पाप। लो अपना अधिकार तुम, छोड़ो अपनी छाप ।
Sahityanama Apr 16, 2024 0 109
प्रेम और अनुराग से सिक्त था हृदय जो अब हमारे दिल से उठती वेदना है|
Sahityanama Apr 16, 2024 0 105
इस समाज की खातिर अबला, होती है बदनाम भला क्यों ?
Sahityanama Apr 12, 2024 0 88
लड़की पैदा होने पर जब लड्डू सारे गाँव बँटेगा.
Sahityanama Apr 3, 2024 0 104
आंधी तूफान चलती है साथ साथ, पर कर नही पाती
Sahityanama Mar 29, 2024 0 94
शिकायत बहुत थी जिंदगी से, पर बताता किसको? हर शख्स मुझे देखकर, बचता चला गया।
Sahityanama Mar 29, 2024 0 38
न रहेगी जिंदगी से शिकायत तुमको कभी, कई दिन से भूखे बच्चे की तरह,पल कर तो देखो।
Sahityanama Mar 29, 2024 0 42
उड़कर फुनगी पर चढ़े,रंगीली सी गात। कैसे वह पहचानती, होने वाली प्रात।।
Sahityanama Mar 29, 2024 0 33
पहला मधुकर रंग हो, इतना तो अधिकार। गोरी कोरी देह पर,दे पिचकारी मार।।
Sahityanama Nov 15, 2023 0 3236
Sahityanama Jun 21, 2024 0 1699
Sahityanama Apr 25, 2024 0 1166
Sahityanama Jun 21, 2024 0 828
Sahityanama Jun 21, 2024 0 641