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बाल साहित्य

बाल साहित्य बच्चों के चरित्र निर्माण में मुख्य भूमिका निभाती है । बच्चे अपने आस-...

संतान की सुख समृद्धि का व्रत है अहोई अष्टमी

वचन से फिरूं तो धोबी के कुंड पर जा कर मरू। तब साहूकार की बहू बोली कि मेरी कोख तो...

त्योहारों का व्यवसायीकरण -वैश्वीकरण से उपजी विकट विपदा

त्योहारों के व्यवसायीकरण ने अरबों रूपये का व्यापार करने वाले बाज़ार को तो लाभ से ...

कुछ पाकर, सब कुछ क्यों खोना

नया साल नए-नए हादसों का साल बन जाता हैं। सुबह तक कई तरह की वारदात को अंजाम दे दि...

सर्दियां और सूप

टमाटर सूप में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाये जाते हैं, जो कि कैंसर की संभावना को क...

सर्दियों में स्वास्थ्य

एक या दो लौंग ऊपर का फूल हटा दें, अगर संभव हो तो थोड़ी सी गेंहू के आटे की भूसी भी...

बेटी का सुख

तब आशा देवी ने कहा, "तो तुम उस मकान पर अपना हक छोड़ क्यों नहीं देते। क्योंकि उस ...

प्रकृति में सौन्दर्य की छठा बिखेरती वसंत पंचमी

इन दिनो में हमारे बड़े बुजुर्ग मिठास के पकवान बनाते हैं। आज वह लजीज मिठास कहां र...

भारतीय संविधान पर खतरा

हमारी माँ- बहन अब बाहर निकलने से भी डर रहीं हैं। मेरे यह लेख लिखने का मतलब यह है...

लक्षद्वीप - मेरी नजर में

रतलाम में इन दिनों बड़ी सर्दी थी। हम स्वेटर शाल से लदे हुए थे, पर मुंबई और क्रूज...

ज़िंदगी

ज़िंदगी किसी ने तुझे सफ़र जाना कोई तलाश में तेरी निकले और खुद मुसाफ़िर हो गए

बसंत उत्सव

इसी दिन कामदेव को मिली थी श्राप से मुक्ति मिली थी। भगवान शिव ने क्रोध में आकर का...

गजल

जमाने का चलन कैसा आया है साहिबो । कोई खा रहा कोई है भुक्खा गजल कह रहा हूं ।।

पर्यावरण

फाड़ के छाती इस धरती में, जहर बहुत सा भर डाला।।

पिता जी की याद

हमें भी मिल जाता पिता जी का प्यार, तरसती हैं आज भी आंखें,

सूखे गुलाब

उसने अपनी डायरी खोली—एक खाली पन्ने पर उसने लिखा: "तुम्हारे बिना, मेरा शरीर सिर्फ...