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  • मंज़िलों का निशान बाक़ी है 
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    मंज़िलों का निशान बाक़ी है 

    मंज़िलों का निशान बाक़ी है और इक इम्तहान बाक़ी है एक पूरा जहान पाया है एक पूरा जहान बाक़ी है आसमां, तुम रहो ज़रा बचकर अब भी उसकी उड़ान बाक़ी है तन तो सारा निचोड़ आया हूँ मन की सारी […] More

  • दरारों
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    इन दरारों से कहीं

    खिड़की से भीतर आती लैंप पोस्ट की रोशनी जब मेरे कमरे में गिरती है, भरम होता है कि चाँदनी है। हर बार होता है। हाँ! मैं जानता हूँ चाँदनी दूधिया होती है, पीली नहीं, पर इंतज़ार में हर आहट आने […] More

  • रु़ह़
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    रु़ह़

    मैं कोई ग़ज़ल तो नहीं जि़से,  तुम व़क्त़ वेवक्त़ गुनगुना लो। मैं कोई नज़्म भी नहीं जि़से, जब चाहें हाले दि़ल सुना लो। मैं कोई अफ़साना भी नहीं जि़से, चाहे याद रखो,चाहें भु़ला दो। मैं कोई आशि़याना भी नहीं जि़से, अपने दिल […] More

  • ग़ालिब हो जाने के लिए
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    ग़ालिब हो जाने के लिए

    सुना था ग़ालिब को उमराव की गोद में लेटे लेटे चुप जुबां आरज़ू समेटे जब नया ख्याल आता वो उनके दुपट्टे के कोने में गिरह लगा देते और ख्याल कैद कर लेते और जब कलम स्याही पाते दुपट्टे की गिरह […] More