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लिंचिस्तान

स्व-निर्मित आदालत को किसने दिए है ये अधिकार ।

बिना साक्ष ,अफवाहों के बल, कर दिए है नरसंहार !!

 

अपराधी के अंग भंग कर देने का ये अधिकार !

भीडतंत्र के इस भयावह रूप देने का अधिकार!!

 

स्व-निर्मित अदालत को किसने दिए हैं ये अधिकार ..

 

उपद्रवी तत्वों ने समाज को दे दिए  हैं लिंचिस्तान 

बिना साक्ष , अफवाहों के बल , कर दिए है नरसंहार !

 

    

एक छोटी सी प्रयास

    साहब कुमार

मोतिहारी (बिहार)

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Written by Sahitynama

साहित्यनामा मुंबई से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका है। जिसके साथ देश विदेश से नवोदित एवं स्थापित साहित्यकार जुड़े हैं।

One Comment

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  1. हाल के दिनों पर सटीक पंक्तिया बहुत खूब!!

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