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Burdened by unseen worries. Sad lonely man sits on wooden log at seashore looking forward. Vie from backside. Multicolored sunset background. Horizontal summertime outdoors image slightly filtered.
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काश तुम ना कहते तो अच्छा …

काश तुम ना कहते तो अच्छा होता 

हम जज्बातों  में ना बहते तो अच्छा होता !  

काश ये दिल तुझ पे आया ही ना होता 

काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा  होता !! 

                                                    काश हम एक दूसरे को पसंद ही ना आये होते 

                                              काश ओ साथ लायब्रेरी जाने के सपने सजाये ना होते !

                                                   तुम  में तुम , हम में हम ही रहते तो अच्छा होता 

                                               काश तुम्हारे दिल में नबी ही रहते तो अच्छा होता !!

ना जाने क्यों हद्द से ज्यादा जान लिया मैंने तुमको 

काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा होता। 

तुम हमसे दूर ही रहते तो अच्छा होता , 

हम बेकसूर ही रहते तो अच्छा होता ,

काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा होता !!

 

साहब कुमार यादव | मोतिहारी(बिहार)

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