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Tera Mera sath

तेरा मेरा साथ

माँगी थी जो दुआ वो क़बूल हो गई। जितनी दूर थी तूँ  मुझसे उतनी क़रीब हो गई। अब साथ तेरा ना छूटे,तू मुझसे इस जीवन में कभी ना रूठे। सदा ही तेरा मेरा  साथ रहे। तूँ  सदा ही मेरे पास रहे। तेरे दिल में एक जगह सदा ही मेरी खास रहे। धड़कू तेरा सीने में तेरी धड़कन बनकर। मेरी हर साँसों में मुझे बस तेरा ही आभास रहे। मौत भी आये तो तुझसे ना जुदा कर पाये। जब भी जाये इस दुनियाँ से तेरा मेरा साथ रहे। More

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फिर से गाँधी आयेंगे

धर्माडंबर के नशे में, धर्माचरण कर नहीं पाएंगे, बहुत हुआ धंधा धर्म का, मर्म सबको समझायेंगे, त्याग अहं स्वधर्म का, मूल मनुज धर्म अपनायेंगे, विप्लव का शंखनाद करने, फिर से गाँधी आयेंगे फिर से गाँधी आयेंगे। है हम सब अंश एक ब्रह् म का, नफरत का दंश नही फैलायेंगे, कह रहा कुरान यही, गीता यही More

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दोहा छंद “वयन सगाई अलंकार”

वयन सगाई अलंकार / वैण सगाई अलंकार चारणी साहित्य मे दोहा छंद के कई विशिष्ट अलंकार हैं, उन्ही में सें एक वयन सगाई अलंकार (वैण सगाई अलंकार) है। दोहा छंद के हर चरण का प्रारंभिक व अंतिम शब्द एक ही वर्ण से प्रारंभ हो तो यह अलंकार सिद्ध होता है। ‘चमके’ मस्तक ‘चन्द्रमा’, ‘सजे’ कण्ठ More

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कह रही है अजन्मी

मां मैं भी इस दुनिया में आना चाहती हूँ नन्हे नन्हे पैरो से मैं भी गिरकर ठोकर खाना चाहती हूँ गिरते गिरते उठकर सम्भलना चाहती हूँ तेरी उंगली पकड़कर चलना चाहती हूं तोतली जबान में कभी तो कभी लाड में माँ मैं भी तुझे माँ कहना चाहती हूँ। क्यों नहीं कर सकती मैं यह सब More

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बेवजह है ये अग्निपथ !!

बेवजह है ये अग्निपथ , सीधे मसान को भेज दो । खतम हो झंझट नौकरी का , जो भी बचा, सबको बेच दो ।। अभी जीवनपथ जिनका शुरू हुआ, अग्निपथ क्यों बना रहे ?? सोचो जरा उन माताओं की, जिनके हाथों  में दे  दिए तिरंगे क्या मुकाबला ओ करेगा , जिसके सर हो बहन की More

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आखिर किराये का घर छोड़ कर !!

आखिर किराये का घर छोड़ कर ,  जाने लगे सब शहर छोड़ कर , अलग रास्ते है, अलग मंजिले है।  आधा अधूरा सफर छोड़ कर ,  जाने लगे सब शहर छोड़ कर।  जब दूर होंगे और पास होंगे , कुछ अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेगे  कदमो के निशां राहो पर छोड़ कर, जाने लगे सब More

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मानवता

शीर्षक (मानवता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) ना मन्दिर में  ना  मस्जिद में ना गिरजाघर में ना ही गुरुद्वारे में, मानवता दिखती है दिल के गलियारे में। रोटी के लिये लाइन में खड़ा हर शख्स ना हिन्दू है ना मुसलमान है, वो तो बस एक भूखा इन्सान है। तुमको दिखते होगे हिन्दू और मुसलमान,  मुझको तो मानव में भी दिखते है भगवान । ईश्वर तक को बाट दिया अब हमारे दिलों में वो नफरत फैलायेगे। एक दिन फिर वही आ के हमको एकता का पाठ पढ़ायेगे। जस्बात पे अपने काबू रखना, तुम्हारे जस्बात को वो अपना हथियार बनायेगे।  इस धरती माँ के सीने पर वो नफ़रत का बीज उगायेगे। हिन्दू मुस्लिम  के नाम पे वो तुमको आपस में ही लड़ायेगे। इस धरती को वो तुम्हारे खून से लहूलुहान बनायेगे। तुम्हारी इसी गलती का वो दूर से लूफ्त उठायेगे। तुम्हारी इसी बेबसी का एक बार फिर वो मजाक बनायेगे। कब तक चीखोंगे More

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माँ दुर्गा

शीर्षक (माँ दुर्गा) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) तू ही दुर्गा तू ही अम्बे तू ही वैष्णो रानी है। तुझमे ही ये संसार समाया तू ही पर्वत वाली है। पर्वत पर है वास तेरा तू ही अम्बे महारानी है। तुझसे तो काल भी घबराये तेरी महिमा बड़ी निराली है। असुर संहारनि सिंह वाहिनी तू दुर्गा तू ही काली है। शिव संगनि जगत नंदिनी तू छपरवाली है। तू ही पाप नाशनि त्रिशूल धारणी तू ही सती तू ही मात भवानी है। खड़क धारणी महिस संहारनि तु ही चंडमुंड उद्धारनि है। दुर्गनाशिनी पापनाशिनी तू ही मात स्वरूपा है। अन्नदायनी विद्या दयानि अन्नपूर्णा तू अन्न ही स्वरूपा है। दुःखहरनि मुक्ति दयानि तू ही सती स्वरूपा है। तू ही अम्बा तू ही जग्दम्बा तू आदि शक्ति निशानी है। हंसवाहिनी विद्या दयानि तू सरस्वती स्वरूपा है।  कालो में काली है तू जग्दम्बा भवानी है। More

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भारतीय सेना

शीर्षक (भारतीय सेना) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मिटाने से भी  हस्ती हमारी मिटती नहीं,  समुंदर में भी कस्ती हमारी नही रूकती। ना विश्वास हो तो इतिहास उठा कर देख लो। जब-जब हमने हथियार उठाया है एक नया इतिहास बनाया है। अपने वतन की रक्षा हम दिलो जान  से करते है, इसमें जान भी चली जाये तो ग़म नही करते है। हम देश के लिये ही जीते है और देश के लिये ही मरते है। देश भक्ति है कि हमारे दिल से जाती नहीं,  हमको देश भक्ति के सिवा कुछ आती नहीं। जिस मिटटी में जन्म लिया है उसका कर्ज चुकायेगे।  हम भारत के वीर है पीठ नही दिखायेगे। तपती गर्मी में भी खड़े  है देश की रक्षा करने पर अड़े More

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मानवता

शीर्षक (मानवता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) ना मन्दिर में  ना  मस्जिद में ना गिरजाघर में ना ही गुरुद्वारे में, मानवता दिखती है दिल के गलियारे में। रोटी के लिये लाइन में खड़ा हर शख्स ना हिन्दू है ना मुसलमान है, वो तो बस एक भूखा इन्सान है। तुमको दिखते होगे हिन्दू और मुसलमान,  मुझको तो मानव में भी दिखते है भगवान । ईश्वर तक को बाट दिया अब हमारे दिलों में वो नफरत फैलायेगे। एक दिन फिर वही आ के हमको एकता का पाठ पढ़ायेगे। जस्बात पे अपने काबू रखना, तुम्हारे जस्बात को वो अपना हथियार बनायेगे।  इस धरती माँ के सीने पर वो नफ़रत का बीज उगायेगे। हिन्दू मुस्लिम  के नाम पे वो तुमको आपस में ही लड़ायेगे।                               More

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अभी बाकी है

शीर्षक (अभी बाकी है।) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) सांसे रुकने को है,पर कुछ काम अभी बाकी है। यमराज से बोल देना थोड़ा रुक कर आये। क्योंकि दिल में अरमान अभी बाकी है। दो पल और जी लेने दो ऐ ज़िन्दगी  क्योंकि कुछ  काम अभी बाकी है। अभी नही चल सकता मैं साथ तेरे क्योंकि मेरे कद्रदान अभी बाकी है। ऐ ज़िन्दगी कुछ वक़्त और दे- दे मुझे कुछ लोगो के अहसान अभी बाकी है। ज़िन्दगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है। ज़िन्दगी More

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मैं ईश्वर से प्यार माँगता हूँ

मैं ईश्वर से प्यार माँगता हूँ, तो वो मुझे तू दे,देते है, एक ऐसा प्यार, जिसमें तुझे छूना जरूरी नहीं, एक ऐसा प्यार, जिसमें साथ रहना जरूरी नहीं, मैं ईश्वर से प्यार… तो वो मुझे तू दे,देते है। एक ऐसा प्यार, जिसमें चीढ़ है खोने का, एक ऐसा प्यार, जिसमें खीज़ है,एक न होने की More

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